सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना काल में अभिभावक को खोने वाले या बेसहारा, अनाथ हुए बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि अनाथ बच्चों को गोद लिए जाने का आमंत्रण देना कानून के प्रतिकूल है, क्योंकि केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की भागीदारी के बिना गोद लेने की अनुमति नहीं है.
सूचना का अधिकार के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि पिछले साल नवंबर तक देश में छह महीने से छह साल तक के क़रीब 927,606 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान की गई. इनमें से सबसे ज़्यादा 398,359 बच्चों की उत्तर प्रदेश में और 279,427 की बिहार में पहचान की गई. ये आंकड़े उन चिंताओं पर ज़ोर डालते हैं कि कोविड-19 महामारी ग़रीब तबकों के बीच स्वास्थ्य एवं पोषण के संकट को और बढ़ा सकती है.
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 29 मई तक राज्यों की ओर से प्रदान किए गए आंकड़ों के मुताबिक 9,346 ऐसे बच्चे है, जो कोरोना महामारी के कारण बेसहारा और अनाथ हो गए हैं या फिर अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया है. ऐसे सबसे ज़्यादा 2,110 बच्चे उत्तर प्रदेश में हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने कहीं पढ़ा था कि महाराष्ट्र में 2,900 से अधिक बच्चों ने कोविड-19 के कारण अपने माता-पिता में से किसी एक को या दोनों को खो दिया है. हमारे पास ऐसे बच्चों की सटीक संख्या नहीं है. न्यायालय ने कहा कि ऐसे बच्चों के साथ सड़कों पर भूख से तड़प रहे बच्चों की देखभाल करने का निर्देश राज्य सरकारों और संबंधित प्राधिकारियों को दिया है.
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि भारत सरकार हर उस बच्चे का सहयोग एवं संरक्षण करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने कोविड-19 के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है.
म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद जून महीने से स्कूल के नए सत्र की शुरुआत हो रही है, लेकिन कई परिवारों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजने का फैसला लिया है. उन्होंने कहा है कि वे तानाशाही सरकार से शिक्षा नहीं लेना चाहते हैं. शिक्षक समूह के अनुसार, लगभग 19,500 विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को भी निलंबित कर दिया गया है.
मामला मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय का है. प्रशासन ने एक महिला नर्स को निलंबित कर दिया. इसके अलावा अस्पताल में साफ-सफाई और सुरक्षा की ठेकेदार कंपनी के दो कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं. घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है.
असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिज़नर्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर की गई जुंटा की कार्रवाई में सोमवार तक 802 लोगों की मौत हो चुकी है. कार्यकर्ता समूह ने कहा कि वर्तमान में 4,120 लोगों को हिरासत में रखा गया है, जिनमें 20 को मौत की सज़ा सुनाई गई है. म्यांमार की मिस यूनिवर्स प्रतियोगी थूजर विंट ल्विन ने भी प्रतियोगिता के मंच से दुनिया से जुंटा की सेना के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की अपील की है.
वीडियो: अनुच्छेद 15 (3) राज्य को यह आधिकार देता है, कि महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष क़ानून बना पाए. भारत में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को मद्देनजर रखते हुए, यदि सरकारें कोई भी ऐसा क़ानून बनाती है, जिससे महिलाओं का उत्थान हो सके, तो वह अनुच्छेद 15 (3) के तहत संविधानिक माना जाएगा और अनुच्छेद 15 (1) का अपवाद माना जाएगा.
असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिज़नर्स द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक फरवरी को म्यांमार में तख़्तापलट के बाद सैन्य शासन के ख़िलाफ़ लगातार चल रहे प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई में अब मृतकों की कुल संख्या 701 हो चुकी है. साथ ही क़रीब 3,012 लोगों को हिरासत में लिया गया या सज़ा दी गई है.
केरल हाईकोर्ट उस मामले को सुन रहा था, जहां लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली एक महिला ने अपने साथी से संबंध ख़त्म होने पर अपने बच्चे को गोद दे दिया था, पर अब दोबारा बच्चे को हासिल करना चाहती थीं. अदालत ने कहा कि जैविक माता-पिता का अधिकार एक स्वाभाविक अधिकार है.
म्यांमार में तख़्तापलट के बाद सैन्य शासन के ख़िलाफ़ हुए लगातार प्रदर्शनों में हुई हिंसक कार्रवाई में मारे गए लोगों में 46 बच्चे भी शामिल हैं. साथ ही क़रीब 2,751 लोगों को हिरासत में लिया गया या सज़ा दी गई है.
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, वॉट्सऐप और यूट्यूब को भारत में व्यवसाय करना है तो बच्चों के अधिकार के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी, अन्यथा इनको इस तरह से चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने राज्यसभा में बताया कि एक जनवरी, 2020 से 31 जनवरी, 2021 के बीच 43,515 बच्चों के लापता होने की जानकारी मिली और इनमें से 38,113 बच्चों का पता लगाया जा सका.
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 12 दिसंबर को जारी किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-2020 के पहले चरण के आंकड़े बताते हैं कि कई राज्यों में स्वच्छता में सुधार और ईंधन एवं पीने योग्य साफ पानी तक बेहतर पहुंच के बावजूद बच्चों में कुपोषण का स्तर तेजी से बढ़ा है.