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केंद्र तीन देशों के ग़ैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए नागरिकता पाने की राह आसान बनाएगा: रिपोर्ट

एक सरकारी सूत्र ने बताया है कि गृह मंत्रालय पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से आए छह अल्पसंख्यक समुदायों – हिंदू, सिख, पारसी, ईसाई, बौद्ध और जैन – के सदस्यों के नागरिकता आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए सहायक दस्तावेज़ के रूप में एक्सपायर्ड पासपोर्ट और वीज़ा को स्वीकार करने के लिए नागरिकता पोर्टल में बदलाव करने वाला है.

सामूहिक हत्याओं के उच्चतम जोख़िम वाले देशों में भारत आठवें स्थान पर: अमेरिकी रिपोर्ट

एक अमेरिकी शोध संस्थान ने 162 देशों में सामूहिक हत्याएं होने की संभावनाओं पर एक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट में भारत को आठवें पायदान पर रखते हुए ऐसे कई उदाहरणों पर प्रकाश डाला गया है कि किस तरह केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों ने देश के मुस्लिम अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ भेदभाव किया है.

भारत में घृणा अपराधों को बढ़ावा देने में पुलिस की भूमिका: रिपोर्ट

एक अमेरिकी एनजीओ द्वारा प्रकाशित ‘भारत में धार्मिक अल्पसंख्यक’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ घृणा अपराध की ज़्यादातर घटनाएं भाजपा शासित राज्यों में हुई हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में राजनीतिक प्रभाव में आकर पुलिस पीड़ितों की मनमानी गिरफ़्तारी करती है या उनकी शिकायत दर्ज करने से मना कर देती है.

नौ राज्यों के 31 डीएम पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान के ग़ैर-मुस्लिमों को नागरिकता दे सकेंगे

केंद्रीय गृह मंत्रालय की वर्ष 2021-22 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र ने अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को नागरिकता देने का अधिकार 2021-22 में और 13 ज़िला कलेक्टरों और दो राज्यों के गृह सचिवों को सौंपा गया है.

गुजरात: दो ज़िलों से पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, अफ़ग़ानी अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने को कहा गया

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 16 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए गुजरात के मेहसाणा और आनंद ज़िलों के कलेक्टरों को पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफ़ग़ानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बुद्ध, जैन, पारसी, ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र प्रदान करने की अनुमति दी है.

सीएए संबंधी याचिकाओं पर तीन सप्ताह में जवाब दें असम व त्रिपुरा सरकार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई में केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार पहले ही हलफ़नामा दे चुकी है, पर असम व त्रिपुरा सरकारों को अलग-अलग जवाब देने की ज़रूरत है. अदालत के समक्ष 50 याचिकाएं इन दो राज्यों से संबंधित हैं.

झारखंड: सरना धर्म संहिता की मांग को लेकर आदिवासियों का प्रदर्शन

‘आदिवासी सेंगेल अभियान’ ने सरना धर्म संहिता और जनगणना प्रपत्र में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कॉलम की मांग को लेकर कहा कि यदि केंद्र 20 नवंबर तक ऐसा न करने की वजह बताने में विफल रहा तो ओडिशा, बिहार, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल के पचास ज़िलों में आदिवासियों को 30 नवंबर से ‘चक्का जाम’ करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

कर्नाटक: विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा ने धर्मांतरण रोधी विधेयक पारित किया

कर्नाटक के गृह मंत्री अरगा ज्ञानेंद्र ने ‘कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण विधेयक 2022’ को सदन में पेश किया. राज्यपाल की मंज़ूरी के बाद यह विधेयक 17 मई, 2022 से क़ानून का रूप ले लेगा, क्योंकि इसी तारीख़ को अध्यादेश लागू किया गया था.

कर्नाटक: विपक्ष के विरोध के बीच धर्मांतरण विरोधी विधेयक विधान परिषद में पारित

विधानसभा ने पिछले वर्ष दिसंबर में ‘कर्नाटक प्रोटेक्शन ऑफ राइट टू फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल’ पारित किया था लेकिन विधान परिषद में भाजपा को बहुमत न होने की वजह से यह लंबित था. सरकार इस विधेयक को प्रभाव में लाने के लिए इस वर्ष मई में अध्यादेश लाई थी.

सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 31 अक्टूबर तक स्थगित

सुप्रीम कोर्ट ने मामला तीन सदस्यीय पीठ को सौंपने की भी बात कही है. नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल कई याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि यह संविधान के मूल ढांचे के विपरीत है और इसका उद्देश्य मुसलमानों से स्पष्ट रूप से भेदभाव करना है.

नागरिकता संशोधन क़ानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 12 सितंबर को

नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल कई याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि यह संविधान के मूल ढांचे के विपरीत है और इसका उद्देश्य मुसलमानों से स्पष्ट रूप से भेदभाव करना है, क्योंकि अधिनियम ने केवल हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को लाभ दिया है.

यदि धार्मिक स्थलों को बिना किसी दिशानिर्देश के अनुमति दी, तो रहने के लिए जगह नहीं बचेगी: कोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने एक व्यावसायिक इमारत को मुस्लिम प्रार्थना स्थल में बदलने की याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा कि राज्य में पूजा स्थलों की संख्या अस्पतालों की संख्या से लगभग 3.5 गुना अधिक है. इसलिए यदि आगे धार्मिक स्थलों को बिना दिशानिर्देश के अनुमति दी गई, तो नागरिकों के रहने के लिए जगह नहीं होगी.

आदिवासियों ने प्रदर्शन कर कहा, ‘सरना’ को आदिवासियों के धर्म के तौर पर मान्यता दे केंद्र

झारखंड, ओडिशा और असम सहित पांच राज्यों के विभिन्न आदिवासी समुदायों के लोगों ने दिल्ली के जंतर मंतर में प्रदर्शन कर केंद्र से उनके धर्म को ‘सरना’ के रूप में मान्यता देने और आगामी जनगणना के दौरान इस श्रेणी के तहत उनकी गणना सुनिश्चित करने की मांग की. उनका कहना है कि देश में आदिवासियों का अपना धर्म, धार्मिक प्रथाएं और रीति-रिवाज हैं, लेकिन इसे अभी तक सरकार द्वारा मान्यता नहीं मिली है.

कर्नाटक में राज्यपाल ने धर्मांतरण-रोधी अध्यादेश को मंज़ूरी दी

कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार विधेयक, 2021 के अनुसार, इसके तहत दोषी पाए जाने पर उसे तीन साल की क़ैद, जो बढ़ाकर पांच साल तक की जा सकती है और उसे 25,000 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा. सामूहिक धर्मांतरण के संबंध में तीन साल की जेल की सज़ा का प्रावधान है, जो दस साल तक बढ़ सकती है और जुर्माना एक लाख रुपये तक हो सकता है.

कर्नाटक सरकार धर्मांतरण विरोधी क़ानून लागू करने के लिए ला रही है अध्यादेश, आर्कबिशप नाख़ुश

कर्नाटक विधानसभा ने पिछले वर्ष दिसंबर में धर्म स्वतंत्रता अधिकार सुरक्षा विधेयक पारित किया था, लेकिन यह विधेयक अभी विधान परिषद में लंबित है, जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पास बहुमत नहीं है. बेंगलुरु के आर्कबिशप ने कहा कि सही लोकतांत्रिक परंपरा के तहत ईसाई समुदाय राज्यपाल से इस अध्यादेश को मंज़ूरी नहीं देने की अपील करता है.