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एप्पल ने पेगासस स्पायवेयर की निर्माता कंपनी इज़रायल के एनएसओ ग्रुप पर मुक़दमा दायर किया

तकनीकी कंपनी एप्पल ने उत्तरी कैलिफोर्निया अदालत में इज़रायल के एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुक़दमा दायर किया है. एप्पल ने एक बयान में कहा है कि एनएसओ ग्रुप ने अपने पेगासस स्पायवेयर के ज़रिये एप्पल यूज़र्स की डिवाइसों को निशाना बनाया है. एप्पल का यह क़दम अमेरिकी सरकार द्वारा एनएसओ ग्रुप को ब्लैकलिस्ट करने के कुछ हफ़्तों बाद आया है.

अमेरिका ने पेगासस स्पायवेयर बनाने वाले इज़रायल के एनएसओ ग्रुप को ‘ब्लैकलिस्ट’ में डाला

अमेरिकी के वाणिज्य विभाग ने इस ‘ब्लैकलिस्ट’ में चार कंपनियों को शामिल किया है, जिसमें एनएसओ के अलावा इज़रायल की ही एक कंपनी- कैंडिरू भी शामिल है. विभाग की इस लिस्ट में शामिल की गई कंपनियों को अमेरिकी सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर मुहैया कराने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है.

पेगासस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय देश के लोकतंत्र को फिर मज़बूत करने का माद्दा रखता है

पेगासस जासूसी का मामला एक तरह से मीडिया, सिविल सोसाइटी, न्यायपालिका, विपक्ष और चुनाव आयोग जैसे लोकतांत्रिक संस्थानों पर आख़िरी हमले सरीख़ा था. ऐसे में कोई हैरानी की बात नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम फ़ैसले ने कइयों को राहत पहुंचाई, जो हाल के वर्षों में एक अनदेखी बात हो चुकी है.

पेगासस फैसला ‘ऐतिहासिक’, यह ‘अंधेरे में उजाले’ की तरह है: वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि ये फैसला ही अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि कोर्ट ने प्रथमदृष्टया सरकार को दोषी ठहराया है. वहीं आर्यन ख़ान मामले में उन्होंने कहा कि निचली न्यायपालिका में कुछ गंभीर गड़बड़ है, जिसके चलते भारत एक ‘पुलिस राज्य’ बनने की ओर बढ़ रहा है.

भारत में इज़रायल के नए राजदूत ने कहा- पेगासस स्पायवेयर सिर्फ़ सरकारों को ही बेचा जाता है

इज़रायल के राजदूत नाओर गिलोन ने कहा कि पेगासस स्पायवेयर को लेकर भारत में जो कुछ भी हो रहा है, वह उसका आंतरिक मामला है, लेकिन हम केवल सरकारों को निर्यात करने के लिए एनएसओ जैसी कंपनियों को निर्यात लाइसेंस देते हैं.

पेगासस मामला: विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया, क़ानूनविदों ने ‘ऐतिहासिक’ बताया

विपक्षी दलों ने पेगासस स्पायवेयर के माध्यम से कुछ भारतीय नागरिकों की जासूसी और सर्विलांस के प्रयास के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा समिति गठित करने के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि जांच से केंद्र सरकार की ओर से किया गया क़ानूनों के उल्लंघन का सच सामने आ जाएगा. वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने इस आदेश को ‘अंधेरे में रोशनी की किरण’ बताया.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

पेगासस के ज़रिये भारतीय नागरिकों की जासूसी के आरोपों की जांच के लिए विशेष समिति गठित

सुप्रीम कोर्ट ने समिति का गठन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में निजता का हनन नहीं हो सकता. अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा उचित हलफ़नामा दायर न करने को लेकर गहरी नाराज़गी जताई और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा होने का दावा करना पर्याप्त नहीं है, इसे साबित भी करना होता है.

पेगासस मामला: क्या हैं वे सात बिंदु, सुप्रीम कोर्ट ने जिनकी जांच करने का आदेश दिया है

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति को पेगासस जासूसी मामले में सात बिंदुओं पर जांच करने और सात बिंदुओं पर महत्वपूर्ण सिफ़ारिश करने का निर्देश दिया गया है. अदालत ने कहा कि सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा की दुहाई देने मात्र से न्यायालय मूक दर्शक बना नहीं रह सकता है.

2019 में भारत में हुए वॉट्सऐप-एनएसओ हैक का वक़्त पेगासस प्रोजेक्ट के डेटाबेस से मेल खाता है

पेगासस प्रोजेक्ट के तहत मिले दस्तावेज़ दिखाते हैं कि 2019 में जिन भारतीय नंबरों को वॉट्सऐप ने हैकिंग को लेकर चेताया था, वे उसी अवधि में में चुने गए थे जब वॉट्सऐप के मुताबिक़ पेगासस स्पायवेयर ने इस मैसेजिंग ऐप की कमज़ोरियों का फायदा उठाते हुए उसके यूज़र्स को निशाना बनाया था.