Climate change

2019 में भारत में प्रदूषण के कारण दुनिया में सर्वाधिक 23.5 लाख से अधिक लोगों की मौत: लांसेट अध्ययन

‘द लांसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन में साल 2019 में भारत में सभी प्रकार के प्रदूषण के कारण 23.5 लाख से अधिक मौतें समय से पहले हुई हैं, जिसमें वायु प्रदूषण के कारण 16.7 लाख मौतें शामिल हैं. वैश्विक स्तर पर हर साल होने वाली 90 लाख मौतों के लिए सभी प्रकार का प्रदूषण ज़िम्मेदार है.

पर्यावरण में हो रहे बदलाव को किस तरह से झेल रहे हैं हिमाचल प्रदेश के किसान?

वीडियो: कृषि पर जलवायु परिवर्तन का बुरा प्रभाव पड़ रहा है. पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है. प्रदेश के लाहौल क्षेत्र में किसानों से जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी के अलावा, बदलते कृषि पैटर्न आदि पर द वायर के इंद्र शेखर सिंह ने चर्चा की.

उत्तराखंड: कॉमन सिविल कोड से पहाड़ की जनता को क्या मिलेगा

अगर पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार कोई क़ानून लाना चाहती है तो उसके बारे में आम जनता को पहले से तफ़्सील से क्यों नहीं बताया जाता कि उत्तराखंड के लिए इसके क्या फ़ायदे होंगे.

ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कटौती करना ज़रूरी, 2030 के बाद कोई लाभ नहीं होगा: आईपीसीसी रिपोर्ट

इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अगले कुछ सालों में ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में कटौती को लेकर कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं किया गया तो 2030 के बाद जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उठाया गया कोई भी क़दम वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा. ग्रीनहाउस गैस वातावरण में गर्मी को बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार होती हैं.

उत्सर्जन में कटौती नहीं की गई तो भारत में हो सकती है असहनीय गर्मी, भोजन-पानी की कमी: रिपोर्ट

जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी समिति द्वारा जारी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि भारत में उत्सर्जन में कटौती नहीं की गई तो मानवीय अस्तित्व की दृष्टि से असहनीय गर्मी से लेकर, भोजन और पानी की कमी तथा समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी से गंभीर आर्थिक क्षति तक हो सकती है.

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन कॉन्फ्रेंस के लक्ष्य कृषि में सुधार के बिना संभव नहीं

वीडियो: बीते नवंबर महीने में स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन कॉन्फ्रेंस जिसे ‘सीओपी26’ (COP26) भी कहा जाता है, को लेकर दो पर्यावरणविदों- वंदना शिवा और श्याम शरण (पूर्व विदेश सचिव और भारतीय सीओपी वार्ताकार) से द वायर के इंद्र शेखर सिंह से बातचीत.

भारत ने सुरक्षा परिषद में जलवायु परिवर्तन पर चर्चा संबंधी प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट किया

भारत ने इस क़दम का विरोध करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन पर चर्चा का उचित मंच ‘जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन’ यानी यूएनएफसीसीसी है, न कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद. भारत के अलावा वीटो का अधिकार रखने वाले रूस ने इस प्रस्ताव के विपक्ष में वोट किया, जबकि चीन ने मतदान में भाग नहीं लिया.

भारत विश्व के सर्वाधिक असमान देशों में, शीर्ष एक प्रतिशत के पास है राष्ट्रीय आय का 22 फीसदी

विश्व असमानता रिपोर्ट 2022 के मुताबिक़, भारत की शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास कुल राष्ट्रीय आय का 57 फीसदी हिस्सा है, जबकि नीचे से 50 फीसदी आबादी की इसमें हिस्सेदारी मात्र 13 फीसदी है.

जम्मू कश्मीर: वन क्षेत्र बढ़ाने के वादे के उलट प्रशासन ने सशस्त्र बलों को अतिरिक्त वन भूमि दी

साल 2019 में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्ज़ा ख़त्म किए जाने के बाद से 250 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि ग़ैर-वन कार्यों के लिए ट्रांसफर किया गया है. ये भूमि पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है और यहां कई लुप्तप्राय जानवरों की प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से कुछ इलाकों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि जम्मू कश्मीर प्रशासन ने इन प्रस्तावों को मंज़ूरी देने से पहले यहां की पंचायत समितियों या स्थानीय लोगों से परामर्श नहीं किया है.

मानवाधिकार परिषद ने स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण तक पहुंच को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने स्वच्छ पर्यावरण प्रस्ताव को पारित किया. इसमें देशों से पर्यावरण में सुधार करने की अपनी क्षमताओं को भी बढ़ाने की मांग की गई है. इस प्रस्ताव के समर्थन में 43, जबकि विरोध में एक भी मत नहीं पड़ा. वहीं चार सदस्य देश चीन, भारत, जापान और रूस अनुपस्थित रहे.

बढ़ते समुद्र, घटते ग्लेशियर; लगभग 100 प्रतिशत ग्लोबल वार्मिंग का कारण इंसान: यूएन जलवायु समिति

जलवायु परिवर्तन पर आई आईपीसीसी की हालिया रिपोर्ट बताती है कि अगर पृथ्वी के जलवायु को जल्द स्थिर कर दिया जाए, तब भी जलवायु परिवर्तन के कारण जो क्षति हो चुकी है, उसे सदियों तक भी ठीक नहीं किया जा सकेगा. आईपीसीसी इस बात की पुष्टि करता है कि 1950 के बाद से अधिकांश भूमि क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी, हीटवेव और भारी बारिश भी लगातार और तीव्र हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने इसे ‘मानवता के लिए कोड रेड’ क़रार दिया है.

बुंदेलखंड पैकेज: योजनाएं आईं, करोड़ों रुपये बहाए गए, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं बदला

विशेष रिपोर्ट: बुंदेलखंड पैकेज का उद्देश्य सिंचाई, पेयजल, कृषि, पशुपालन समेत विभिन्न क्षेत्रों में सुधार कर पूरे इलाके का समग्र विकास करना था, लेकिन इसके तहत बनीं संरचनाओं की दयनीय स्थिति इसकी असफलता की कहानी बयां करती है. मंडियों को अभी भी खुलने का इंतज़ार है, उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान ज़्यादा पानी वाली फ़सल उगाने को मजबूर हैं, जो कि क्षेत्र में एक अतिरिक्त संकट की आहट है.

भारत में जलवायु आपदाओं और संघर्षों की वजह से 2020 में 39 लाख लोग विस्थापित हुए: रिपोर्ट

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट द्वारा जारी ‘भारत के पर्यावरण की स्थिति की रिपोर्ट 2021’ के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में पलायन के लिहाज़ से भारत दुनिया का चौथा सबसे बुरी तरह प्रभावित देश बन गया है. चीन, फिलीपींस और बांग्लादेश में पिछले साल सर्वाधिक पलायन हुआ. प्रत्येक देश में 40 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.

असमानता दूर करने में सरकारों की विफलता की कीमत चुका रही है दुनिया: ऑक्सफैम

विश्व आर्थिक मंच की दावोस एजेंडा शिखर बैठक में ऑक्सफैम इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक गैब्रिएला बुचर ने कहा कि महामारी की आर्थिक मार से उबरने में अरबों लोगों को एक दशक से अधिक का समय लग सकता है, जबकि मार्च 2020 के बाद से सबसे शीर्ष पर सिर्फ़ 10 अरबपतियों का धन आसमान छू लिया है.

भारत साल 2019 में जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होने वाले देशों में सातवें स्थान पर रहा

जर्मनी स्थित एक एनजीओ द्वारा जारी ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स के मुताबिक, साल 2019 में भारत में मानसून सामान्य दिनों के मुक़ाबले एक महीने ज़्यादा देर तक रहा. भारी बारिश के कारण आई बाढ़ से 14 राज्यों में 1,800 लोगों की मौत हुई और 18 लाख लोगों का विस्थापन हुआ था.