Communalism

योगी आदित्यनाथ का ‘अब्बा जान’ बयान, यूपी में भाजपा का सांप्रदायिक चुनावी अभियान

वीडियो: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पर निशाना साधते हुए दावा किया था कि ‘2017 से पहले केवल ‘अब्बा जान’ कहने वालों को ही राशन मिलता था. आज अगर कोई गरीब लोगों के राशन को हथियाने की कोशिश करेगा, तो वह निश्चित रूप से जेल चला जाएगा.’ इस बयान पर चर्चा कर रही हैं द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.

यूपी: राशन वितरण को लेकर योगी आदित्यनाथ ने सांप्रदायिक और झूठा दावा किया है

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कुशीनगर में कहा था कि साल 2017 से पहले सिर्फ ‘अब्बा जान’ कहने वालों को ही राशन मिलता था. आंकड़े दर्शाते हैं कि ऐसा किसी भी तरह से संभव नहीं है.

‘घोर सांप्रदायिकता और नफ़रत’ के सहारे चुनाव लड़ना भाजपा का एकमात्र एजेंडा: उमर अब्दुल्ला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने योगी आदित्यनाथ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेरा मानना रहा है कि भाजपा का सारा ज़हर मुस्लिमों के प्रति होता है. यहां एक मुख्यमंत्री हैं, जो दोबारा यह दावा कर चुनाव जीतना चाहते हैं कि मुस्लिमों ने हिंदुओं के हिस्से का पूरा राशन खा लिया. योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि वर्ष 2017 से पहले सिर्फ़ ‘अब्बा जान’ कहने वालों को ही राशन मिलता था.

यूपी: अवैध धर्मांतरण मामले में गिरफ़्तार आठ लोगों पर देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया

इस साल 21 जून  को उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकरोधी दस्ते ने दिल्ली से दो मौलवियों को गिरफ़्तार किया था और धर्मांतरण में कथित रूप से शामिल एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया था. बाद में पुलिस ने आठ अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया था और दावा किया था कि आरोपियों ने बड़े पैमाने पर धर्मांतरण को अंजाम दिया.

मथुरा डोसा स्टॉल पर सांप्रदायिक हमला, आरोपी की पहचान हुई

वीडियो: उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीनाथ डोसा स्टॉल पर देवराज पंडित और राष्ट्रीय हिंदू युवा वाहिनी के कुछ कार्यकर्ताओं ने बीते 18 अगस्त को एक मुस्लिम के काम करने की वजह से हमला कर दिया था. हमले के बाद इसका नाम बदलकर अमेरिकन डोसा कॉर्नर नाम दिया गया है. इसे लेकर द वायर ने कुछ खाद्य स्टॉल मालिकों और पुलिस उपाधीक्षक वरुण कुमार सिंह से मुलाकात की और देवराज पंडित के एक दोस्त से भी बात की, जो हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं के समूह का हिस्सा है, जिसने स्टॉल पर हमला किया था.

आम आदमी पार्टी की तिरंगा यात्रा बहुसंख्यकवादी राष्ट्रवाद का ही नमूना है

आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसके तिरंगे के रंग पक्के हैं. शुद्ध घी की तरह ही वह शुद्ध राष्ट्रवाद का कारोबार कर रही है. भारत और अभी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को राष्ट्रवाद का असली स्वाद अगर चाहिए तो वे उसकी दुकान पर आएं. उसकी राष्ट्रवाद की दाल में हिंदूवाद की छौंक और सुशासन के बघार का वादा है.

यूपी: मथुरा में डोसा स्टॉल पर सांप्रदायिक हमले के बाद मुस्लिम कामगार को नौकरी छिनने का डर

उत्तर प्रदेश के मथुरा की विकास मार्केट में 18 अगस्त को हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम डोसा विक्रेता के स्टॉल में तोड़फोड़ की थी. हमलावरों का आरोप है कि मुस्लिम होकर डोसा विक्रेता ने दुकान का नाम हिंदू भगवान श्रीनाथ के नाम पर रखा है. घटना का वीडियो पुलिस के संज्ञान में आने के बाद बीते 28 अगस्त को मथुरा के कोतवाली थाने में एफ़आईआर दर्ज की गई.

नरसिंहानंद और सूरज पाल अमू पर केस दर्ज करने से इनकार पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगी रिपोर्ट

बीते 4 अगस्त को फ़ैसल अहमद ख़ान नाम के शिक्षक ने धुर दक्षिणपंथी नेताओं यति नरसिंहानंद और सूरज पाल अमू द्वारा अलग-अलग मौकों पर मुस्लिम विरोधी भाषण दिए जाने पर जामिया नगर पुलिस स्टेशन में शिकायतें दी थी. कोई कार्रवाई न होने पर 7 अगस्त को उन्होंने ने साकेत ज़िला अदालत से पुलिस को एफ़आईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की.

राजस्थान में मुस्लिम भिखारी को पीटने के आरोपी ने क़ुबूला गुनाह

वीडियो: राजस्थान के अजमेर शहर में कानपुर के रहने वाले अशमन अली को उनके नाम और धर्म के कारण ही पीटा गया था. हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता ललित शर्मा ने उनके परिवार के साथ भी मारपीट की थी. इसके बावजूद पुलिस ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. द वायर से बातचीत में ललित शर्मा का दावा है कि वह किसी भी चीज़ से नहीं डरते. चूंकि उन्हें बजरंग दल के नेताओं और स्थानीय पुलिसकर्मियों का भी समर्थन प्राप्त है.

नाम छिपाकर कौन लोग जीते आए हैं और उनकी घुटन को किसने महसूस किया है?

पहचान की अवधारणा खालिस इंसानी ईजाद है. पहचान के लिए ख़ून की नदियां बह जाती हैं. पहचान का प्रश्न आर्थिक प्रश्नों के कहीं ऊपर है. उस पहचान को अगर कोई भूमिगत कर दे, तो उसकी मजबूरी समझी जा सकती है और इससे उसके समाज की स्थिति का अंदाज़ा भी मिलता है.

क्या राष्ट्रध्वज का अपमान देश का सम्मान करने का नया तरीका है?

तिरंगे में लिपटे एक पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यपाल के पार्थिव शरीर के आधे हिस्से पर अपना झंडा प्रदर्शित करके भाजपा ने पूरी तरह साफ कर दिया कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के मामले में वह अब भी ‘ख़ुद मियां फजीहत दीगरे नसीहत’ की अपनी नियति से पीछा नहीं छुड़ा पाई है.

जिसने पार्टी हित को राष्ट्रहित से ऊपर रखा, उसके लिए राष्ट्रध्वज दल के झंडे के नीचे ही होना चाहिए

राष्ट्रध्वज को जब बहुसंख्यकवादी अपराध को जायज़ ठहराने के उपकरण के रूप में काम में लाया जाने लगेगा, वह अपनी प्रतीकात्मकता खो बैठेगा. फिर एक तिरंगे पर दूसरा दोरंगा पड़ा हो, इससे किसे फ़र्क़ पड़ता है?

सरकारी समिति की ‘मोपला शहीदों’ को इतिहास की किताब से हटाने की मांग, कहा- विद्रोही सांप्रदायिक थे

भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद की समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि 1921 का मालाबार विद्रोह हिंदू समाज के ख़िलाफ़ था और केवल असहिष्णुता के चलते किया गया था.

पूर्व नौकरशाहों ने कहा- यूएपीए का मौजूदा स्वरूप नागरिकों की स्वतंत्रता के लिए गंभीर ख़तरा

‘कांस्टिट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप’ के तत्वाधान में 108 पूर्व नौकरशाहों द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) पांच दशकों से अधिक समय से भारत की क़ानून की किताबों में मौजूद है और हाल के वर्षों में इसमें किए गए संशोधनों ने इसे निर्मम, दमनकारी और सत्तारूढ़ नेताओं तथा पुलिस के हाथों घोर दुरुपयोग करने लायक बना दिया है.

मुस्लिम विरोधी घृणा का एक संगठन तंत्र है और उससे हममें से ज़्यादा को कोई ऐतराज़ नहीं

मुसलमान विरोधी घृणा से मुक्ति फ़ौरी राष्ट्रीय काम है. इसमें पहले ही 70 साल की देर हो चुकी है. अब और देर नहीं की जा सकती. अगस्त के महीने में यह नहीं हो सकता कि चीखें भारत के आसमान को ढंक लें: मुझे बचाओ और आप स्वाधीनता के बैंड बाजे के शोर से उन चीखों को दबा दें. स्वाधीनता का ऐसा पतन हमें क़बूल नहीं होना चाहिए.