Communalism

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमित शाह. (फोटो: रॉयटर्स)

बंगाल के चुनाव परिणाम ने भाजपा को ‘एक देश, एक संस्कृति’ की सीमा बता दी है

कई सालों से मोदी-शाह की जोड़ी ने चुनाव जीतने की मशीन होने की जो छवि बनाई थी, वह कई हारों के कारण कमज़ोर पड़ रही थी, मगर इस बार की चोट भरने लायक नहीं है. वे एक ऐसे राज्य में लड़खड़ाकर गिरे हैं, जो किसी हिंदीभाषी के मुंह से यह सुनना पसंद नहीं करता कि वे उनके राज्य को कैसे बदलने की योजना रखते हैं.

विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भतीजे अभिषेक की बेटी के साथ ममता बनर्जी. (फोटो: पीटीआई)

बंगाल परिणाम: टीएमसी की जीत नहीं, उन दो नेताओं की हार महत्त्वपूर्ण है

बंगाल के समाज के सामूहिक विवेक ने भी उस ख़तरे को पहचाना, जिसका नाम भाजपा है. तृणमूल कांग्रेस की यह जीत इसलिए बंगाल में छिछोरेपन, लफंगेपन, गुंडागर्दी, उग्र और हिंसक बहुसंख्यकवाद की हार भी है.

(प्रतीकात्मक फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

मुस्लिमों के उत्पीड़न की वजह अब ध्रुवीकरण नहीं, उन्हें अपमानित ज़िंदगी जीने के लिए मजबूर करना है

देश के नेता विगत कोई बीस सालों के अथक प्रयास से समाज का इतना ध्रुवीकरण पहले ही कर चुके हैं कि आने वाले अनेक वर्षों तक उनकी चुनावी जीत सुनिश्चित है. फिर कुछ लोग अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और उन्हें अपमानित करने के लिए जोशो-ख़रोश से क्यों जुटे हुए हैं?

न​रसिंहानंद सरस्वती. (फोटो: फेसबुक)

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों ने डासना मंदिर के पुजारी की गिरफ़्तारी की मांग की

इससे पहले धार्मिक नेता और ग़ाज़ियाबाद के डासना देवी मंदिर के प्रमुख पुजारी नरसिंहानंद सरस्वती के ख़िलाफ़ मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को कथित तौर पर आहत करने के लिए राजधानी दिल्ली में आप विधायक और दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्ला ख़ान द्वारा बीते तीन अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.

न​रसिंहानंद सरस्वती. (फोटो: फेसबुक)

धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में डासना मंदिर के पुजारी के ख़िलाफ़ केस दर्ज

आप विधायक अमानतुल्ला ख़ान ने हिंदुत्वादी नेता और ग़ाज़ियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के पुजारी नरसिंहानंद सरस्वती के ख़िलाफ़ पैंगबर मुहम्मद और मुस्लिमों के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में शिकायत दर्ज कराई है. नरसिंहानंद पिछले महीने तब चर्चा में आए थे, जब डासना मंदिर में पानी पीने के चलते 14 वर्षीय एक मुस्लिम लड़के की बर्बर पिटाई की गई थी.

उत्तराखंड में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने वाला पोस्टर लगाते हिंदू युवा वाहिनी के सदस्य. (फोटो: ट्विटर)

उत्तराखंड: देहरादून के 150 मंदिरों में ‘ग़ैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित’ का बैनर लगा

ये बैनर दक्षिणपंथी समूह हिंदू युवा वाहिनी द्वारा लगाए गए जिसके सदस्यों का दावा है कि वे उत्तराखंड के सभी मंदिरों में ऐसे बैनर लगाएंगे. यह क़दम गाज़ियाबाद के डासना देवी मंदिर में एक मुस्लिम किशोर को पानी पीने के लिए प्रताड़ित किए जाने के बाद सामने आया है.

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‘अगर मुझे पढ़ना आता तो मैं मंदिर में कभी नहीं जाता’

वीडियो: उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद स्थित शिव शक्ति धाम डासना मंदिर में एक मुस्लिम लड़के को पानी पीने के लिए बर्बरतापूर्वक पीटा गया. हिंसा की इस घटना को लेकर पीड़ित परिवार से बातचीत.

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क्या हिंदुओं को हिंसक बनाया जा रहा है?

वीडियो: उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद स्थित शिव शक्ति धाम डासना मंदिर में एक मुस्लिम लड़का पानी पीने के लिए बर्बरतापूर्वक पीटा गया. डासना में हुई घटना नफ़रत की एक मानसिकता को दर्शाती है. यह मानसिकता क्यों पनपती है? इसके पीछे क्या वजह है? इन मुद्दों को समझने के लिए स्वतंत्र पत्रकार अलीशान जाफ़री से दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अपूर्वानंद की बातचीत.

डासना के मंदिर में नाबालिग मुस्लिम लड़के की बर्बर पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. (साभार: वीडियोग्रैब)

हिंसा, क्रूरता कितनी भी नियमित हो जाए, उसे सामान्य मानने से इनकार करने की मानवीयता बची रहती है

डासना की घटना से मालूम होता है कि जो हिंसा का निशाना बनाया गया है, पुलिस उसके साथ खड़ी हो सकती है. जिसने हिंसा की, पुलिस उसे खोजकर उसके साथ इंसाफ की प्रक्रिया शुरू कर सकती है. इंसानियत के बचे रहने की उम्मीद क़ानून या संविधान के बोध के जीवित और सक्रिय रहने पर ही निर्भर है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

ग़ाज़ियाबाद: मंदिर के अंदर पानी पीने के लिए लड़के की बर्बर पिटाई, आरोपी गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद शहर के मंदिर से पानी पीने के लिए 14 वर्ष के एक मुस्लिम लड़के को गालियां देने और उसकी बर्बर पिटाई करने के आरोपी और उसके एक सहयोगी ​को गिरफ्तार कर लिया गया है. मंदिर प्रबंधन की ओर से कहा गया है कि वह आरोपी की क़ानूनी मदद करेंगे.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

‘देश ख़तरे में है’ का हौवा स्वतंत्र विचारधारा वालों को प्रताड़ित करने का बहाना है

देश में 2017 से 2019 के बीच राष्ट्र विरुद्ध अपराधों के आरोप में प्रति वर्ष औसतन 8,533 मामले दर्ज किए गए. दुनिया का कोई देश अपने ही नागरिकों पर उसे नुकसान पहुंचाने के इतने केस दर्ज नहीं करता. अगर ये सब केस सच हैं तो दो बातें हो सकती हैं- या तो देश में असल में इतने गद्दार हैं, या देश के निर्माण में ही कोई मूलभूत गड़बड़ी है.

इतिहासकार डीएन झा. (फोटो साभार: ट्विटर/@manojkumarjnu)

डीएन झा: वो इतिहासकार, जिसने तथ्यों-तर्कों के आधार पर इतिहास से जुड़े मिथकों को तोड़ा

डीएन झा ने राष्ट्रवादी इतिहासकारों द्वारा हिंदू संस्कृति को भारतीय संस्कृति का पर्याय बताने, सामाजिक विषमताओं की अनदेखी की आलोचना की थी. वे कहते थे कि ऐसे लोगों ने राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक औज़ार तो दिया, लेकिन भारतीय इतिहास संबंधी उनका लेखन ब्रिटिश इतिहासकारों से कम समस्याग्रस्त नहीं था.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

क्या भारत कट्टरता के मामले में पाकिस्तान बनने की राह पर है?

बहुत साल पहले पाकिस्तान की कवियित्री फ़हमीदा रियाज़ ने लिखा था कि ‘तुम बिल्कुल हम जैसे निकले, अब तक कहां छुपे थे भाई. वो मूरखता वो घामड़पन, जिसमें हमने सदी गंवाई, आख़िर पहुंची द्वार तुम्हारे… देश के आज के हालात में ये पंक्तियां सच के काफ़ी क़रीब नज़र आती हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर. (फोटो: पीटीआई)

स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत नोटिस का अनिवार्य प्रकाशन निजता के अधिकार का उल्लंघन: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी के लिए 30 दिन पहले नोटिस का अनिवार्य प्रकाशन कराना स्वतंत्रता और निजता के मूल अधिकार का उल्लंघन है. अब से नोटिस का प्रकाशन विवाह के इच्छुक पक्षों के लिए वैकल्पिक होगा.

(प्रतीकात्मक  फोटो: पीटीआई)

भारतीय मुसलमानों की विडंबना: हुए अपने ही घर में पराये

जिस तरह देश में सांप्रदायिक वैमनस्य बढ़ रहा है, उससे मुसलमानों के निराश और उससे कहीं ज़्यादा भयग्रस्त होने के अनेकों कारण हैं. समाज एक ‘बाइनरी सिस्टम’ से चलाया जा रहा है. अगर आप बहुसंख्यकवाद से सहमत हैं तो देशभक्त हैं, नहीं तो जिहादी, शहरी नक्सल या देशद्रोही, जिसकी जगह जेल में है या देश से बाहर.