समस्या सड़क पर नमाज़ पढ़ने में नहीं, उसे देखने के तरीके में है

क्या वाकई सड़कों पर सभी प्रकार के धार्मिक आयोजनों पर रोक लगा सकते हैं? तब तो बीस मिनट की नमाज़ से ज़्यादा हिंदुओं के सैकड़ों धार्मिक आयोजन प्रभावित होने लग जाएंगे, जो कई दिनों तक चलते हैं. बैन करने की हूक सड़कों के प्रबंधन बेहतर करने की नहीं है, एक समुदाय के प्रति कुंठा और ज़हर उगलने की ज़िद है.

कांग्रेस के हिंदुत्व की होड़ में शामिल होने की विवशता भाजपा के लिए अमृतकाल साबित हुआ है

छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा राम वनगमन पथ परियोजना के क्रियान्वयन का मक़सद समाज में लोगों के बीच जातिगत और लैंगिक भूमिकाओं की जड़ों को और भी मज़बूत करना था. इसका क्रियान्वयन हिंदुत्व सांस्कृतिक साम्राज्यवाद के विस्तार के अलावा और कुछ भी नहीं था. असल में कांग्रेस का सॉफ्ट हिंदुत्व एक धूर्ततापूर्ण नाम है. 

गुजरात: राम मंदिर समारोह को लेकर निकली शोभा यात्रा में झड़प के बाद कई मुस्लिम युवक गिरफ़्तार

मेहसाणा ज़िले की घटना. मुस्लिम समुदाय के लोगों का आरोप है कि 21 जनवरी को हिंदुत्व समूहों ने राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की पूर्व संध्या पर एक शोभा यात्रा निकाली थी, जो निर्धारित रूट से हटकर उनके इलाके से गुज़री. तब दोनों पक्षों के बीच झड़प होने के बाद दो नाबालिगों समेत 15 मुस्लिमों को गिरफ़्तार किया गया है.

‘1992 के अपराधी आज के राष्ट्रवादी हो चले हैं’

वीडियो: टीवी मीडिया में क़रीब दो दशकों तक काम करने वाले दयाशंकर मिश्र द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर लिखी गई किताब के विमोचन समारोह में द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का वक्तव्य.

कोशल में रात गहराती जा रही है!

आज की अयोध्या में बहुसंख्यक सांप्रदायिकता के समक्ष आत्मसमर्पण और उसका प्रतिरोध न कर पाने की असहायता बढ़ती जा रही है. आम लोगों के बीच का वह स्वाभाविक सौहार्द भी, जो आत्मीय रिश्तों तक जाता था, अब औपचारिक हो चला है.

अभी भले एहसास न हो, पर हिंदू जनता सिर्फ़ राजनीतिक लाभ का साधन बनकर रह जाएगी

अगर हिंदू जनता को यह यक़ीन दिलाया जा सकता है कि यह मंदिर उसकी चिर संचित अभिलाषा को पूरा करता है तो इसका अर्थ है कि हिंदू मन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पूरी तरह कब्ज़ा हो चुका है.

सारे अंधेरे के बावजूद रोशनी का इंतज़ार अप्रासंगिक नहीं

कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: एक तरह का 'सभ्य अंधकार' छाता जा रहा है, पूरी चकाचौंध और गाजे-बाजे के साथ. लेकिन, नज़र तो नहीं आती पर बेहतर की संभावना बनी हुई है, अगर यह ख़ामख़्याली है तो अपनी घटती मनुष्यता को बचाने के लिए यह ज़रूरी है.

क्यों अलग है उत्तर और दक्षिण भारत का राजनीतिक मिजाज़?

बीते दिनों आए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उत्तर भारत और दक्षिण भारत के लोगों और उनके प्रतिनिधि चुनने की प्राथमिकताओं पर लंबी बहस चली, तमाम सवाल उठाए गए. क्या वजह है कि इन क्षेत्रों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मिजाज़ में इतना अंतर है?

हेट स्पीच के लिए प्रशासनिक तंत्र बनाने पर विचार, व्यक्तिगत मामलों से नहीं निपट सकते: अदालत

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि नफ़रत फैलाने वाले भाषण (हेट स्पीच) को अदालत ने परिभाषित किया है. अब सवाल कार्यान्वयन और समझने का है कि इसे कैसे लागू किया जाए. हम व्यक्तिगत मामलों से नहीं निपट सकते. अगर हम व्यक्तिगत मामलों से निपटना शुरू कर देंगे तो इससे मामलों की बाढ़ आ जाएगी.

राजस्थान विधानसभा चुनाव: भाजपा के जीतने को लेकर मुस्लिम समुदाय में डर क्यों है?

वीडियो: राजस्थान विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र जयपुर में मुस्लिम समुदाय के विभिन्न लोगों और प्रतिनिधियों से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

राजस्थान चुनाव: भाजपा ने क्यों नहीं दिया किसी मुस्लिम को टिकट?

वीडियो: राजस्थान विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और आमेर विधानसभा से विधायक सतीश पूनिया से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

साल 2023 में 80% मुस्लिम विरोधी नफ़रती भाषण भाजपा शासित राज्यों में दिए गए: रिपोर्ट

हिंदुत्व वॉच के एक अध्ययन के मुताबिक़, हेट स्पीच वाले कार्यक्रमों में से एक तिहाई ( 33%) में स्पष्ट रूप से मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा और 12% में हथियार उठाने का आह्वान किया गया था. लगभग 11% में मुसलमानों के बहिष्कार के आह्वान किए गए. 

‘सांप्रदायिकता 2014 से शुरू हुई कहने वाले 1950 से चली आ रही सांप्रदायिकता को छिपाना चाहते हैं’

वीडियो: पूर्व आईपीएस अधिकारी अब्दुर रहमान की नई किताब 'पॉलिटिकल एक्सक्लूशन ऑफ इंडियन मुस्लिम्स' के लोकार्पण के अवसर पर नई दिल्ली में हुए कार्यक्रम में एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी का भाषण.

1947 की सांप्रदायिकता अब 2023 में राष्ट्रवाद बन गई है: राजद सांसद मनोज झा

वीडियो: पूर्व आईपीएस अधिकारी अब्दुर रहमान की नई किताब 'पॉलिटिकल एक्सक्लूशन ऑफ इंडियन मुस्लिम्स' के लोकार्पण के अवसर पर नई दिल्ली में हुए कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनता दल के सांसद और डीयू में प्रोफेसर मनोज कुमार झा का भाषण.

भारत में लोकतंत्र की गिरावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा

जो लोग यक़ीन करते हैं कि भारत अब भी एक लोकतंत्र है, उनको बीते कुछ महीनों में मणिपुर से लेकर मुज़फ़्फ़रनगर तक हुई घटनाओं पर नज़र डालनी चाहिए. चेतावनियों का वक़्त ख़त्म हो चुका है और हम अपने अवाम के एक हिस्से से उतने ही ख़ौफ़ज़दा हैं जितना अपने नेताओं से.