फ़ैज़ाबाद: अयोध्या नगर निगम का एक अनाम-सा हिस्सा

नवाबों का शहर फ़ैज़ाबाद, अब उस अयोध्या नगर निगम का अनाम-सा हिस्सा है, जिसके ज़्यादातर वॉर्डों के पुराने नाम भी नहीं रहने दिए गए हैं. नवाबों के काल की उसकी दूसरी कई निशानियां भी सरकारी नामबदल अभियान की शिकार हो गई हैं. हालांकि अब भी ग़ुलामी के वक़्त के तमाम नाम नज़र आते हैं, जो सरकार को नज़र नहीं आते.

विपक्ष ने कहा- केंद्र सरकार काली सच्चाइयों को छिपाने के लिए श्वेत पत्र लेकर आई है

अर्थव्यवस्था पर केंद्र द्वारा लाए गए श्वेत-पत्र पर राज्यसभा में अल्पकालिक चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने इसका इस्तेमाल ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया है. इसमें नोटबंदी, बेरोज़गारी, मुद्रास्फीति, किसानों की दिक्कत और अर्थव्यवस्था की स्थिति के मुद्दों को छोड़ दिया गया है.

कांग्रेस ने ‘अनुशासनहीनता’ और पार्टी के ख़िलाफ़ बोलने पर आचार्य प्रमोद को निष्कासित किया

कांग्रेस ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है. उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर अभिषेक समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी और इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के कांग्रेस के रुख़ की आलोचना की थी. पिछले कुछ समय से वह कांग्रेस नेतृत्व के कुछ फैसलों की आलोचना करते रहे हैं.

भाजपा सरकार लोकसभा चुनाव से पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करेगी: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सीएए नागरिकता प्रदान करने के लिए लाया गया है, न कि ‘किसी की नागरिकता छीनने’ के लिए. हमारे देश में अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से हमारे मुस्लिम समुदाय को उकसाया जा रहा है. सीएए किसी की नागरिकता नहीं छीन सकता, क्योंकि क़ानून में इसका कोई प्रावधान नहीं है.

भाजपा को 2022-23 में चुनावी बॉन्ड से लगभग 1300 करोड़ रुपये मिले, जो कांग्रेस से 7 गुना अधिक है

भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा सार्वजनिक की गई भाजपा की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, सत्तारूढ़ दल की कुल आय वर्ष 2022-23 में बढ़कर 2,361 करोड़ रुपये हो गई, जो 2021-22 में 1,917 करोड़ रुपये थी. वहीं, कांग्रेस की कुल आय 2021-22 के 541.27 करोड़ रुपये से घटकर 2022-23 में 452.37 करोड़ रुपये रह गईं.

जनवरी में 570 करोड़ रुपये से अधिक के चुनावी बॉन्ड बिके, 94% राशि 1 करोड़ मूल्य वर्ग वाले बॉन्ड में

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले जवाब से पता चला है कि बीते 2 जनवरी से 11 जनवरी 2024 तक चले चुनावी बॉन्ड बिक्री के नवीनतम चरण में 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, 1 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के मूल्यवर्ग में बेचे गए 897 बॉन्ड में से 415 या लगभग आधे कोलकाता में बेचे गए हैं.

विधेयक से कुछ समुदायों को बाहर रखा गया है तो वह समान नागरिक संहिता कैसे हुई: उत्तराखंड कांग्रेस

वीडियो: उत्तराखंड में भाजपा नेतृत्व वाली पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने हाल ही में समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा में पारित कर दिया. इस मुद्दे को लेकर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा से द वायर के अतुल होवाले की बातचीत.

क्या उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड का सहारा लिया गया है?

उत्तराखंड के सुदूर गांवों, तहसीलों और क़स्बों में आम आदमी और लिखे-पढ़े लोग भी पूरी तरह भ्रमित हैं कि बेशुमार समस्याओं से घिरे इस छोटे-से प्रदेश में अफ़रा-तफ़री में पारित हुए विवादास्पद यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल से उनकी ज़िंदगी किस तरह से बदलेगी.

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता, निशाने पर मुसलमान

वीडियो: उत्तराखंड विधानसभा में पुष्कर सिंह धामी की सरकार द्वारा पेश समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर दिया गया है. इसे लेकर द वायर की ​सीनियर ​एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का नज़रिया.

2022-23 में भाजपा ने दो हज़ार करोड़ रुपये कमाए

2022-2023 में भारतीय स्टेट बैंक द्वारा कुल 2,800.36 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बेचे गए. भाजपा की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट बताती है कि पार्टी को उस वर्ष बेचे गए चुनावी बॉन्ड्स की कुल राशि का 46% प्राप्त हुआ.

‘उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता विधेयक से एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है’

वीडियो: उत्तराखंड विधानसभा में पुष्कर सिंह धामी की सरकार द्वारा पेश समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर दिया गया है. इसे लेकर उत्तराखंड बार काउंसिल की पूर्व अध्यक्ष रज़िया बेग से बातचीत.

लोकसभा चुनाव के लिए क्या एकजुट हो सकेगा विपक्ष?

वीडियो: लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र विपक्षी एकजुटता, कांग्रेस की रणनीति और तैयारी को लेकर कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

उत्तराखंड में पारित समान नागरिक संहिता के विरोध में विपक्ष, महिलाएं और मुस्लिम संगठन

उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित समान नागरिक संहिता विधेयक के विरोध में सामने आए विचारों में कहा गया है कि राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए इस लाने में जल्दबाजी की गई है, कई प्रावधान एकरूपता के सिद्धांत के ख़िलाफ़ हैं और लिव-इन रिलेशनशिप के नियमों के माध्यम से भाजपा अब लोगों के बेडरूम तक में घुस गई है.

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता पारित करने की ओर; ग़ैर-पंजीकृत लिव-इन रिश्ते के लिए होगी जेल

भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा उत्तराखंड विधानसभा में पेश किए गए समान नागरिक संहिता विधेयक को लेकर विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने कांग्रेसी विधायकों को प्रावधानों का अध्ययन या समीक्षा करने का समय दिए बिना ही विधेयक पेश कर दिया और वह बिना बहस के क़ानून पारित करना चाहती है.