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सरकार ने चुनावी बॉन्ड की 19वीं किस्त को मंज़ूरी दी, एक जनवरी से शुरू होगी बिक्री

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारतीय स्टेट बैंक को एक जनवरी से 10 जनवरी 2022 के बीच उसकी 29 अधिकृत शाखाओं के जरिए चुनावी बॉन्ड जारी करने और उसे भुनाने के लिए अधिकृत किया गया है.

केंद्रीय सूचना आयोग ने चुनावी बॉन्ड पर एसबीआई की रिपोर्ट का खुलासा करने से इनकार किया

आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने भारतीय स्टेट बैंक द्वारा चुनावी बॉन्ड की बिक्री और उन्हें भुनाने के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक और केंद्र को साल 2018 में सौंपी गई रिपोर्ट का खुलासा करने की मांग की थी.

ग़ैर-चुनावी अवधि में भी एसबीआई ने 614 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बेचे: आरटीआई

614 करोड़ रुपये के इन चुनावी बॉन्ड में से 200 करोड़ रुपये के बॉन्ड एसबीआई की कोलकाता शाखा, 195 करोड़ रुपये के बॉन्ड चेन्नई शाखा और 140 करोड़ रुपये के बॉन्ड हैदराबाद शाखा से बेचे गए हैं. साल 2018 से लेकर अक्टूबर 2021 तक कुल 18 चरणों में 7,994 करोड़ रुपये के गोपनीय चुनावी बॉन्ड बेचे जा चुके हैं, जिनका मुख्य मक़सद राजनीतिक दलों को चंदा देना है. 

सुप्रीम कोर्ट गोपनीय चुनावी बॉन्ड मामले पर सुनवाई क्यों नहीं कर रहा है

वित्त मंत्रालय के निर्देश पर चुनावी बॉन्ड के 18वें चरण की बिक्री शुरू हो गई है और यह 10 अक्टूबर तक चलेगी. हालांकि कई कार्यकर्ताओं और नेताओं ने गोपनीय चुनावी बॉन्ड को जारी रखने को लेकर चिंता ज़ाहिर की है और सर्वोच्च न्यायालय से इसमें तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है.

साल 2019-20 में कुल चुनावी बॉन्ड की 75 फ़ीसदी राशि भाजपा को मिली, कांग्रेस को महज़ नौ फ़ीसदी

चुनाव आयोग में दायर किए गए पार्टी के वार्षिक ऑडिट के अनुसार, भाजपा देश की सबसे धनी राजनीतिक पार्टी बनी हुई है, जिसकी कुल नकदी 3,501 करोड़ रुपये (कैश और बैंक खातों में) है, जो कि साल 2019-20 में 1,904 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है. 2019-20 में पार्टी ने 73 करोड़ रुपये की ज़मीन और लगभग 59 करोड़ रुपये के भवन ख़रीदे थे.

ग़ैर-चुनावी अवधि में भी 150 करोड़ रुपये से अधिक का चुनावी बॉन्ड बेचा गया

आरटीआई के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेज़ों से पता चला है कि एक जुलाई से 10 जुलाई के बीच 17वें चरण में कलकत्ता ब्रांच से 97.31 करोड़ रुपये, चेन्नई ब्रांच से 30 करोड़ रुपये और हैदराबाद ब्रांच से 10 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बेचे गए थे.

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बीच 695 करोड़ रुपये से अधिक के चुनावी बॉन्ड बिके

देश में अब तक कुल 16 चरणों में चुनावी बॉन्ड की बिक्री हुई है. एसबीआई ने एक आरटीआई आवेदन के जवाब में बताया है कि इस साल जनवरी में 15वें चरण में 42.10 करोड़ रुपये और अप्रैल में 16वें चरण में 695.34 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बेचे गए हैं. इस दौरान सर्वाधिक बॉन्ड पश्चिम बंगाल के कोलकता शाखा से बिके.

Ranchi: Jharkhand Mukti Morcha (JMM) executive president Hemant Soren addresses a press conference ahead of Jharkhand Assembly Elections, in Ranchi, Sunday, Sept. 15, 2019. (PTI Photo) (PTI9_15_2019_000038B)

चुनावी बांड के ज़रिये चंदा देने वालों का नाम घोषित करने वाली पहली पार्टी बनी झामुमो

झारखंड में सत्तारूढ़ पार्टी झामुमो ने बताया है कि उसे एल्युमिनियम एवं तांबा विनिर्माता कंपनी हिंडाल्को से एक करोड़ रुपये का चंदा चुनावी बांड के ज़रिये मिला है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक दलों को दान देने वालों की पहचान की जानकारी है, जिन्होंने उसे चुनावी बॉन्ड के ज़रिये योगदान दिया है.

चुनावी बॉन्ड की बिक्री पर रोक की याचिका ख़ारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पर्याप्त सुरक्षा मौजूद

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने एक याचिका में राजनीतिक दलों की फंडिंग और खातों में पारदर्शिता की कथित कमी संबंधी एक मामले के लंबित रहने और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी बॉन्ड की आगे बिक्री की अनुमति न देने की मांग की थी. शीर्ष अदालत ने इससे इनकार कर दिया है.

चुनाव आयोग ने चुनावी बॉन्ड पर रोक का विरोध किया, सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रखा

इस संबंध में याचिका दायर करने वाली ग़ैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से कहा गया कि इस तरह के गोपनीय चुनावी बॉन्ड के चलते ‘भ्रष्टाचार को क़ानूनी मान्यता’ मिल रही है और चूंकि सरकार फायदा पहुंचा सकती है, इसलिए कंपनियां सत्ताधारी दल को ही इसके ज़रिये फंड करेंगी.

चुनावी बॉन्ड की बिक्री पर मोदी सरकार ने 4.10 करोड़ रुपये के कमीशन का भुगतान किया

आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड के ज़रिये मिलने वाले ‘गोपनीय’ चंदे के लिए भारत सरकार को अब तक कुल 15 चरणों में हुई बिक्री के लिए 4.35 करोड़ रुपये के कमीशन देना है. साथ ही, बॉन्ड की छपाई के लिए सरकार ने 1.86 करोड़ रुपये ख़र्च किए हैं.

चुनावी बॉन्ड से राजनीतिक दलों को दान देने वालों का खुलासा करने में कोई जनहित नहीं: सीआईसी

सूचना के अधिकार कानून के तहत चुनावी बॉन्ड बेचने के लिए निर्धारित भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं के बहीखातों से इन बॉन्ड को ख़रीदने वालों और इन्हें प्राप्त करने वालों की जानकारी मांगी गई थी. एसबीआई द्वारा जानकारी दिए जाने से इनकार करने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग का रुख़ किया गया था.

बिहार चुनाव से पहले अधिकतर चुनावी बॉन्ड एक करोड़ रुपये की राशि के बेचे गए: आरटीआई

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले 19-28 अक्टूबर के दौरान एक-एक करोड़ रुपये के 279 चुनावी बॉन्ड बेचे गए. इसके अलावा 32 चुनावी बॉन्ड 10-10 लाख रुपये, नौ चुनावी बॉन्ड एक-एक लाख रुपये और एक चुनावी बॉन्ड एक हज़ार रुपये का बेचा गया.

अमीरों-नेताओं के चुनावी बॉन्ड की छपाई और बैंक कमीशन का ख़र्च करदाता उठा रहा: आरटीआई

आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेज़ों से पता चलता है कि अब तक क़रीब 19,000 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड की छपाई हो चुकी है. ख़ास बात ये है कि इनकी छपाई, बिक्री और इसे भुनाने में बैंक का जो कमीशन बनता है, इसके ख़र्च की भरपाई केंद्र सरकार कर रही है.

पंद्रह क्षेत्रीय दलों ने नहीं दिया आय-व्यय का ब्योरा, बीजद सबसे धनी क्षेत्रीय दल : एडीआर

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें सर्वाधिक आय वाले क्षेत्रीय दलों में बीजद के अलावा तेलंगाना राष्ट्र समिति और वाईआरएस कांग्रेस शामिल हैं. इन तीनों दलों की आय में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में सर्वाधिक इज़ाफ़ा भी दर्ज किया गया.