फसल बीमा योजना की सफलता के गान के बीच निजी कंपनियों ने ख़ारिज किए 75 फीसदी दावे

विशेष रिपोर्ट: कृषि क़ानूनों के विरोध के बीच ख़ुद को 'किसान हितैषी' बताते हुए मोदी सरकार ने फसल बीमा योजना की सफलता के दावे किए हैं. हालांकि दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि इस बीच किसानों द्वारा दायर किए गए फसल बीमा दावों को ख़ारिज करने की संख्या में नौ गुना की बढ़ोतरी हुई है, जहां एचडीएफसी ने 86, टाटा ने 90 और रिलायंस ने 61 फीसदी दावों को ख़ारिज किया है.

किसानों के फसल बीमा दावों को ख़ारिज करने के मामलों में 900 फ़ीसदी की बढ़ोतरी

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत साल 2017-18 में किसानों के 92,869 दावों को ख़ारिज किया था. इसके अगले ही साल 2018-19 में आंकड़ा दोगुनी से भी ज्यादा हो गया है और इस दौरान 2.04 लाख दावों को ख़ारिज किया गया.

पीएम किसान के तहत 20 लाख अयोग्य लाभार्थियों को 1,364 करोड़ रुपये का भुगतान: आरटीआई

आरटीआई के तहत केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान) के तहत अयोग्य लाभार्थियों की बड़ी संख्या पांच राज्यों- पंजाब, असम, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में है. अयोग्य लाभार्थियों में आधे से अधिक यानी 54.03 प्रतिशत लोग पंजाब, असम और महाराष्ट्र से हैं.

फंड की कमी से जूझ रही कृषि योजनाओं के लिए हुई थी बजट बढ़ाने की मांग, वित्त मंत्रालय ने नकारा

विशेष रिपोर्ट: कृषि मंत्रालय ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अलावा कृषि लोन पर ब्याज सब्सिडी, राज्यों को दाल वितरण, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं के बजट को बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन वित्त मंत्रालय द्वारा इन मांगों को ख़ारिज कर दिया गया.

फसल बीमा योजना: कोरोना संकट के बीच नहीं हुआ किसानों के 80 फीसदी बीमा दावों का भुगतान

कृषि मंत्रालय से आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ 2019-20 रबी सीज़न के लिए फसल बीमा योजना के तहत कुल 3,750 करोड़ रुपये के दावे किए गए थे, जिसमें समयसीमा बीत जाने के बाद भी अब तक केवल 775 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है.

11 राज्यों में रजिस्ट्रेशन कराए 11.5 लाख से अधिक किसानों से दाल-तिलहन की ख़रीदी नहीं हुई

द वायर द्वारा आरटीआई के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि केंद्र की पीएसएस योजना के तहत दालें एवं तिलहन की ख़रीद के लिए 25.79 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन सरकारों ने इसमें से 14.20 लाख किसानों से ही उनकी उपज की ख़रीददारी की है.

केंद्र ने लक्ष्य का सिर्फ़ 50 फ़ीसदी दाल-तिलहन ख़रीदा, नौ राज्यों में बिल्कुल भी ख़रीदी नहीं हुई

द वायर द्वारा सूचना का अधिकार क़ानून के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि केंद्र सरकार ने रबी-2020 ख़रीद सीज़न में 20 राज्यों से कुल 58.71 लाख टन दालें और तिलहन ख़रीदने का लक्ष्य रखा था, हालांकि इसमें से सिर्फ़ 29.25 लाख टन उपज की ख़रीदी हो पाई है.

राहत पैकेज की घोषणा के दो हफ्ते बाद भी करीब दो करोड़ लोगों को पीएम किसान का पैसा नहीं मिला

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहत पैकेज के तहत घोषणा की थी कि 8.69 करोड़ किसानों को पीएम-किसान का 2000 रुपया तत्काल प्रभाव से दिया जाएगा. हालांकि अभी तक 7.1 करोड़ किसानों को ही इसका लाभ मिला है.

फसलों का उचित दाम दिलाने वाली योजना का बजट बढ़ाने की हुई थी मांग, वित्त मंत्रालय ने नकारा

द वायर द्वारा प्राप्त किए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि कृषि मंत्रालय ने कहा था कि चूंकि पीएम-किसान योजना के तहत पूरी राशि ख़र्च नहीं हो पा रही है, इसलिए जो राशि बच गई है उसे अन्य योजनाओं के इस्तेमाल में लाया जा सकता है. हालांकि वित्त मंत्रालय ने इस मांग को ख़ारिज कर दिया था.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलावों से कौन होगा प्रभावित?

हाल ही में मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कई बदलावों को मंजूरी दी है. इसके तहत केंद्र ने अपनी प्रीमियम सब्सिडी को घटा ली है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राज्यों पर काफी भार बढ़ सकता है.

फसलों के उचित दाम देने वाली योजना के बजट में बड़ी कटौती, 2019-20 के लिए भी फंड घटा

मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को पाने के लिए पिछले कुछ सालों में कई कृषि योजनाओं को लॉन्च किया था. हालांकि इनके लागू होने की खराब स्थिति के चलते सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए इन योजनाओं के आवंटित बजट में बड़ी कटौती की है.

आर्थिक समीक्षा में विकिपीडिया, अन्य निजी संस्थानों से भी लिए गए आंकड़े

केंद्रीय बजट से एक दिन पहले जारी किए गए आर्थिक सर्वे में भगवद गीता, ऋगवेद, कौटिल्य के अर्थशास्त्र, तमिल संत तिरुवल्लुवुर की शिक्षाओं ‘द तिरुकुरल’ के उद्धरण भी दिए गए हैं.

आर्थिक सर्वे में कृषि मशीनीकरण पर जोर, जल संरक्षण के लिए माइक्रो इरिगेशन पर फोकस

रिपोर्ट में इस ओर इशारा किया गया है कि अगर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को पूरा करना चाहती है तो उसे कृषि क्षेत्र में मूलभूत चुनौतियों का समाधान करना होगा.

कृषि विकास दर में गिरावट जारी, अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी घटकर 16.5 फीसदी हुई: आर्थिक सर्वे

वित्त वर्ष 2019-20 के लिए कृषि विकास दर घटकर मात्र 2.8 फीसदी पर आ गई है. आर्थिक सर्वे 2019-20 में कृषि क्षेत्र की मूलभूत चुनौतियों का समाधान करने के लिए कहा गया है.

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