GDP

मोदी सरकार के व्यापार प्रतिबंधों के पीछे आर्थिक तर्क की जगह राजनीतिक नुकसान का डर है

अप्रैल में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘निर्यात केंद्रित अर्थव्यवस्था’ के निर्माण के सपने की बात की थी, लेकिन एक महीने के भीतर ही केंद्र सरकार ने गेहूं, कपास, चीनी और स्टील पर निर्यात प्रतिबंध लगा दिए हैं.

विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाया, आरबीआई ने रेपो दर 0.5% बढ़ाई

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद बताया कि बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट को 0.5 प्रतिशत बढ़ाकर 4.9 प्रतिशत कर दिया गया है. केंद्रीय बैंक के इस क़दम से ऋण महंगा होगा और क़र्ज़ की मासिक किस्त यानी ईएमआई बढ़ेगी.

भारत की आर्थिक वृद्धि दर में सुस्ती, प्रति व्यक्ति आय कोविड पूर्व समय की तुलना में नीचे आई

एनएसओ के अनुसार, जनवरी-मार्च तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर साल-दर-साल धीमी होकर 4.1% हो गई. यह एक साल में इसकी सबसे धीमी गति है. वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 6.71 प्रतिशत रहा है जो संशोधित बजट अनुमान से कम है.

भारत के भुगतान संतुलन की स्थिति को लेकर निश्चिंत होकर बैठ जाना सही नहीं होगा

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अच्छा-ख़ासा है, लेकिन बीते कुछ सप्ताह से इसमें धीरे-धीरे गिरावट आती जा रही है. 9 अप्रैल को ख़त्म हुए हफ्ते में भारत के रिज़र्व बैंक के मुद्रा भंडार में 11 अरब अमेरिकी डॉलर की कमी आई और यह गिरकर 606 अरब डॉलर का रह गया.

विश्व बैंक ने भारत का जीडीपी अनुमान घटाया, देश के लिए इसके क्या संकेत हैं?

वीडियो: भारत में पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी की कीमतें बढ़ रही हैं. इसके चलते कई राज्यों में कैब सर्विस कंपनियों ओला और उबर ने भी यात्रा की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है. एक तरफ महंगाई बढ़ी है तो दूसरी तरफ सीएमआईई के मुताबिक बेरोजगारी के आंकड़े कम हुए हैं. इन मुद्दों पर प्रो. संतोष मेहरोत्रा से द वायर के याक़ूत अली की बातचीत.

क्या दुनियाभर में मंदी के साथ महंगाई का खौफ़नाक दौर बस आने को है

वैश्विक अर्थव्यवस्था में होने वाली किसी भी हलचल की सूरत में भारत को ख़राब स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ेगा क्योंकि अब यह व्यापार, निवेश और वित्त में कहीं अधिक वैश्वीकृत हो चुका है. आज यहां यूएस फेडरल रिज़र्व की कार्रवाइयां भारतीय रिज़र्व बैंक की तुलना में अधिक असर डालती हैं.

रूस-यूक्रेन संघर्ष: तेल के बढ़ते दाम और रुपये की गिरावट के बीच सरकार के पास क्या उपाय हैं?

भारत को ख़ुद को ऊर्जा बाज़ार में लंबे व्यवधान और मुद्रा की कमज़ोरी का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि इनका आर्थिक विकास, आजीविका और रोज़गार पर गंभीर असर होगा.

देश में अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या कम-से-कम 30 प्रतिशत बढ़ाने की ज़रूरत: नीति आयोग रिपोर्ट

नीति आयोग के रिपोर्ट में कहा है कि ब्रिक्स देशों (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) में भारत का स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च सबसे कम है और  देश के 21 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों की 50 प्रतिशत आबादी की केवल 35 प्रतिशत अस्पतालों के बिस्तरों तक पहुंच है. 

बजट में आरटीई क़ानून की अनदेखी, ग़ैर-बराबरी व निजीकरण को बढ़ावा देने वाला: संगठन

राइट टू एजुकेशन फोरम का कहना है कि बजट के आधे-अधूरे और अदूरदर्शी प्रावधान बताते हैं कि सरकार स्कूली शिक्षा को लेकर बिल्कुल संजीदा नहीं है. डिजिटल लर्निंग और ई-विद्या संबंधी प्रस्ताव निराशाजनक हैं, जिनसे वंचित वर्गों समेत अस्सी फीसदी बच्चों के स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर होने का ख़तरा मंडरा रहा है.

बजट 2022: महामारी के प्रकोप के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कोई बड़ी योजना नहीं

केंद्रीय बजट 2022-23 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए केवल एक नई योजना की घोषणा की गई है. वित्त मंत्री ने कहा कि महामारी ने सभी उम्र के लोगों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाया है, इसलिए ‘गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और देखभाल सेवाओं तक बेहतर पहुंच के लिए एक राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ शुरू किया जाएगा.

बजट 2022: वित्त मंत्री के चौथे बजट में जनता को क्या मिलेगा

विशेषज्ञों का मानना ​​​​है कि 2020 में महामारी के प्रकोप के बाद आर्थिक व्यवधान के बाद अपर्याप्त राहत पर बढ़ती सार्वजनिक आलोचना के बीच वित्त मंत्री किफायती आवास और उर्वरक के लिए उच्च सब्सिडी के अलावा सड़कों और रेलवे पर अधिक ख़र्च की घोषणा करेंगी.

बीते पांच सालों में देश के ग़रीबों की आय 53 फीसदी घटी, अमीरों की आय में 39% इज़ाफ़ा: सर्वे

मुंबई के थिंक टैक पीपुल्स रिसर्च ऑन इंडियाज़ कंज्यूमर इकोनॉमी द्वारा किए गए एक सर्वे में पता चला है कि कोरोना महामारी ने शहरी ग़रीबों को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया और उनकी घरेलू आय कम हुई.

अर्थव्यवस्था को भगवान की ज़रूरत, एमएसएमई और रोज़गार से जुड़े मुद्दे गंभीर: प्रणब सेन

भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद और वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रणब सेन ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ीं समस्याओं का एकमात्र उपाय सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक मतभेदों को दूर करने की ज़रूरत है.

बेरोज़गारी और बढ़ती महंगाई चिंताजनक, पकौड़े वाला काम किसी काम का नहीं

वीडियो: देश में लगातार बढ़ रही महंगाई और बेरोज़गारी का हाल ऐसा है कि प्रधानमंत्री द्वारा रोज़गार के रूप में गिनाया गया पकौड़ा बेचने का काम भी करना अब मुश्किल होता जा रहा है. वर्तमान भारतीय अर्थव्यवस्था, बेरोज़गारी और बढ़ती महंगाई पर बाथ यूनिवर्सिटी के विज़िटिंग प्रोफेसर संतोष मेहरोत्रा से द वायर के मुकुल सिंह चौहान से बातचीत.

कोविड-19 लॉकडाउन: सरकार द्वारा जीडीपी में काफ़ी ज़्यादा वृद्धि का भ्रम फैलाया जा रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की पूरी प्रचार मशीनरी अप्रैल-जून 2021 के दौरान भारत की जीडीपी में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि को बड़े आर्थिक सुधार के रूप में दिखा रही है. हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अप्रैल-जून 2021 की यह वृद्धि साल 2019 और 2018 के आंकड़ों से कम है. पिछले साल लॉकडाउन के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था में काफ़ी ज़्यादा गिरावट आई थी, इसलिए पिछले साल से तुलना कर काफ़ी ज़्यादा वृद्धि का भ्रम फैलाया जा रहा है.