Healthcare Workers

सिर्फ़ 56 फ़ीसदी स्वास्थ्यकर्मियों और 47 फ़ीसदी फ्रंटलाइन वर्कर्स का पूर्ण टीकाकरण हुआः सरकार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि 82 फ़ीसदी स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना वायरस टीके की सिर्फ़ एक डोज़ लगी है, जबकि 56 फ़ीसदी को वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी है. इसी तरह 85 फ़ीसदी फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीके की एक, जबकि 47 फ़ीसदी को दोनों डोज़ लगी है.

डॉक्टरों की स्वास्थ्य मंत्रालय से अपील, कोविड टीकाकरण के बाद हुई 13 मौतों की जांच हो

16 जनवरी को टीकाकरण शुरू होने के बाद से अब तक विभिन्न राज्यों में 13 लोगों की जान गई है, इनमें से अधिकतर मौतें टीका लेने के बाद कुछ घंटों से लेकर पांच दिनों के भीतर हुई हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से किसी भी मौत के लिए टीकाकरण के कारण होने को ख़ारिज किया है.

ओडिशा: टीकाकरण के बाद शख़्स की मौत, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा- टीके से कोई संबंध नहीं

मामला नौपाड़ा ज़िले का है. सोमवार को एक 27 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड को जी मिचलाने की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अगले दिन उन्होंने दम तोड़ दिया. उन्होंने बीमार होने के तीन दिन पहले कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत टीका लगवाया था.

तेलंगाना: टीकाकरण के बाद स्वास्थ्यकर्मी की मौत, अधिकारी ने कहा- मृत्यु का कारण टीका नहीं

तेलंगाना में अभी तक 69,625 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है. सार्वजनिक स्वास्थ्य के निदेशक के अनुसार, अभी तक राज्य के 77 लोगों में टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव के मामले सामने आए हैं, जिसमें से तीन को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था और उनकी हालत स्थिर है.

असम: कोविड वार्ड में लगातार 11 दिन ड्यूटी देने के आदेश के विरोध में आए डॉक्टर्स

कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच असम सरकार द्वारा नियमों में बदलाव करने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक पत्र लिखकर कहा है कि पर्याप्त संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों की व्यवस्था किए बिना बेड बढ़ाना एक निरर्थक कवायद होगी. अगर उचित योजना नहीं बनाई गई, तो हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा.

कोरोना से अपने बचाव की अंतिम ज़िम्मेदारी स्वास्थ्यकर्मियों की: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

केंद्र ने दो श्रेणियों को छोड़कर बाकी सभी स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 14 दिन के क्वारंटीन की अनिवार्यता को ख़त्म कर दिया गया है. केवल उन कर्मचारियों के लिए 14 दिन तक क्वारंटीन में रहना अनिवार्य है, जो कोरोना संक्रमित के मरीज़ों के सीधे संपर्क में आए हों या जिनमें बीमारी के लक्षण हों.