Hindutva

कश्मीर फाइल्स पर नदाव लपिद की राय भारत की प्रतिष्ठा की चिंता का ही नतीजा है

इस्राइली फिल्मकार नदाव लपिद को लगा कि ‘कश्मीर फाइल्स’ फिल्म समारोह की गरिमा को धूमिल करने वाली प्रविष्टि है, उसकी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए उन्होंने ईमानदारी से अपनी राय रखी. भारत उनके लिए सत्यजित राय, मृणाल सेन, अपर्णा सेन आदि का भारत है. वे उसे अपनी निगाह में गिरते नहीं देखना चाहते.

सावरकर पर हमारी चर्चाओं को अतीत में अटके न रहकर वर्तमान में आगे बढ़ना होगा

‘माफ़ीवीर’ कहकर सावरकर की खिल्ली उड़ाने की जगह सावरकरवाद के आशय पर बात करना हमारे लिए आवश्यक है. अगर वह कामयाब हुआ तो हम सब चुनाव के ज़रिये राजा चुनते रहेंगे और आज्ञाकारी प्रजा की तरह उसका हर आदेश मानना होगा.

भारत में रहने वाला हर शख़्स ‘हिंदू’, किसी को पूजा के तरीके बदलने की ज़रूरत नहीं: भागवत

छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले में स्वयंसेवकों के एक कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सभी भारतीयों का डीएनए एक है. जो भारत को अपनी मातृभूमि मानता है, विविधता में एकता वाली संस्कृति को जीना चाहता है, वह किसी भी तरह पूजा करे, कोई भी भाषा बोले, खानपान, रीति-रिवाज कोई हो, वह​ हिंदू है.

भाजपा से ज़्यादा हिंदुत्ववादी होकर क्या पाएगी आम आदमी पार्टी

कई जानकार कह रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल के नोट-राग ने ज़रूरी मुद्दों व जवाबदेहियों से देशवासियों का ध्यान भटकाकर लाभ उठाने में भाजपा की बड़ी मदद की है. ये जानकार सही सिद्ध हुए तो केजरीवाल की पार्टी की हालत ‘माया मिली न राम’ वाली भी हो सकती है.

केजरीवाल ‘प्रो-हिंदू’ या ‘एंटी-हिंदू’ हो न हों, मोदी के नक़्शे-क़दम पर ज़रूर हैं

अरविंद केजरीवाल के ‘देश की तरक्की के लिए लक्ष्मी-गणेश का चित्र नोटों पर छापने’ की सलाह से पहले देश ने पैसों के बारे में ऐसा अहमक़ाना प्रस्ताव 2016 में देखा था, जब देश के प्रधानमंत्री ने अचानक चलन में रहे अस्सी फीसदी नोटों को रातोंरात अवैध बताकर भ्रष्टाचार और काले धन पर अंकुश लगाने का दावा किया था.

नव बौद्ध अब मुस्लिम विरोधी हिंदुत्व की आग जलाए रखने को ईंधन बने रहने को तैयार नहीं हैं

सवर्ण समाज झूठ बोलता रहा है कि वह समानता के उसूल को मानता है. उसने किसी भी स्तर पर दलितों के साथ साझेदारी से इनकार किया. दलितों का हिंदू बने रहना मात्र एक जगह उपयोगी है- कि ‘मुसलमान, ईसाई’ के प्रति द्वेष और घृणा पर आधारित राजनीति के लिए ऐसे हिंदुओं की संख्या बढ़ती रहनी चाहिए.

बिखराव के बीज बोते हुए सद्भाव का खेल खेलते रहने में संघ को महारत हासिल है

संघ की स्वतंत्रतापूर्व भूमिकाओं की याद दिलाते रहना पर्याप्त नहीं है- उसके उन कृत्यों की पोल खोलना भी ज़रूरी है, जो उसने तथाकथित प्राचीन हिंदू गौरव के नाम पर आज़ादी के साझा संघर्ष से अर्जित और संविधान द्वारा अंगीकृत समता, बहुलता व बंधुत्व के मूल्यों को अपने कुटिल मंसूबे से बदलने के लिए बीते 75 वर्षों में किए हैं.

देश में फैली सांप्रदायिकता का वायरस अब अप्रवासी भारतीयों तक पहुंच गया है

भारतीय अप्रवासी राजनीति अब भारत के ही सूरत-ए-हाल का अक्स है. वही ध्रुवीकरण, वही सोशल मीडिया अभियान, वही राजनीतिक और आधिकारिक संरक्षण और वैसी ही हिंसा. असहमति तो दूर की बात है, एक भिन्न नज़रिये को भी बर्दाश्त नहीं किया जा रहा है.

अब देश की जनता को ही सिकुड़ते लोकतंत्र के विरुद्ध खड़ा होना होगा

मोदी सरकार एक ऐसा राज्य स्थापित करने की कोशिश में है जहां जनता सरकार से जवाबदेही न मांगे. नागरिकों के कर्तव्य की सोच को इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल के दौरान संविधान में जोड़ा था. मोदी सरकार बिना आपातकाल की औपचारिक घोषणा के ही अधिकारहीन कर्तव्यपालक जनता गढ़ रही है.

पूर्व आरएसएस कार्यकर्ता का दावा- नांदेड़ धमाके में थी शीर्ष दक्षिणपंथी नेताओं की भूमिका

पच्चीस साल तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता रहे यशवंत शिंदे ने सीबीआई की विशेष अदालत के समक्ष दायर एक हलफ़नामे में दावा किया है कि 2006 नांदेड़ धमाके से तीन साल पहले विहिप के एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें आतंकी प्रशिक्षण शिविर के बारे में बताया था, जो ‘देशभर में बम धमाके करने के इरादे से चलाया गया था.’

आज़ादी के 75 सालों बाद भी देश की दलित-बहुजन आबादी की सभी उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं

भारत और यहां रहने वाले सभी जातियों, समुदायों के नागरिकों का भविष्य अब संविधान के इसके वर्तमान स्वरूप में बचे रहने पर निर्भर करता है.

कानपुर: हर धर्म की प्रार्थना कराने वाले स्कूल पर लगा ‘शिक्षा जिहाद’ का आरोप

वीडियो: उत्तर प्रदेश में कानपुर शहर स्थित फ्लोरेट्स इंटरनेशनल स्कूल में इस्लामिक प्रार्थना के माध्यम से छात्रों का धर्मांतरण कराने की कोशिश का आरोप हिंदुत्ववादी संगठनों ने लगाया था, जिसके बाद स्कूल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर की गई थी.

सावरकर गोडसे के गुरु थे, उन्हें गांधी की हत्या के दोष से मुक्त नहीं माना जा सकता: धीरेंद्र झा

वीडियो: बीते दिनों गांधी स्मृति और दर्शन समिति की हिंदी में प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका ‘अंतिम जन’ ने हिंदुत्व नेता वीडी सावरकर पर विशेषांक प्रकाशित किया था, जिसकी गांधीवादियों ने आलोचना की थी. इस बारे में लेखक और वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्र झा से अजॉय आशीर्वाद की बातचीत.

कानपुर के स्कूल में इस्लामिक प्रार्थना को हिंदुत्ववादियों ने ‘शिक्षा जिहाद’ बताया, केस दर्ज

हिंदुत्ववादी संगठन का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में कानपुर के फ्लोरेट्स इंटरनेशनल स्कूल में इस्लामिक प्रार्थना के माध्यम से छात्रों का धर्मांतरण कराने की कोशिश की जा रही थी, जबकि स्कूल प्रबंधन का कहना है कि उनके यहां किसी धर्म विशेष नहीं, बल्कि सभी धर्मों की प्रार्थनाएं छात्रों से कराई जाती हैं और ऐसा 12-13 वर्षों से चल रहा है.

संवैधानिक संस्थाओं में व्यक्तिगत आज़ादी के मूल्य के प्रति तिरस्कार का भाव क्यों है

अक्सर गिरफ़्तारी हो या ज़मानत, पुलिस और अदालत सत्ता से सहमति रखने वालों के मामले में ‘बेल नियम है, जेल अपवाद’ का सिद्धांत का हवाला देते दिखते हैं पर मुसलमानों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं या पत्रकारों का नाम आते ही इस नियम को उलट दिया जाता है.