सेल में सैकड़ों करोड़ के कथित घोटाले में ऐसी कंपनी का नाम सामने आया है, जिसने भाजपा को 30 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड दिए थे. इस पूरे प्रकरण को उजागर करने वाले अधिकारी राजीव भाटिया को सेल ने पहले निलंबित किया था, अब कार्यकाल पूरा होने से सात वर्ष पहले ही उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया.
एम्स-झज्जर में कार्यरत हरियाणा की एक दलित फार्मासिस्ट ने अपने वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी. जांच समिति ने आरोपी के कृत्यों की पुष्टि की. लेकिन एम्स ने कार्रवाई करने की बजाय उन्हें प्रमोशन दे दिया. स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग एम्स के निदेशक से जवाब मांग रहे हैं, लेकिन देश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान एकदम चुप है.
एम्स के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की वजह से सरकार को करीब पचास लाख रुपये का नुकसान हुआ. संस्थान ने एक कंपनी के भुगतान को देर तक लंबित रखा, जिसके परिणामस्वरूप लंबी क़ानूनी लड़ाई चली, लेकिन एम्स हर पड़ाव पर परास्त हुआ. जब स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स को नोटिस भेजा, एम्स ने जवाब तक नहीं दिया.
देश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान एम्स तमाम आरोपों से घिरा हुआ है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एम्स के निदेशक को ख़त लिखकर जांच रिपोर्ट मांग रहा है, लेकिन प्रबंधन के पास कोई जवाब नहीं. नई दिल्ली के इस संस्थान पर द वायर हिंदी की सीरीज की पहली कड़ी, जो सर्जिकल ग्लव्स की खरीद में हुई अनियमितताओं पर केंद्रित है.
वित्त वर्ष 2023-24 में राजस्थान में चूना पत्थर के कुल 21 ब्लॉक की नीलामी हुई थी. इनमें से 20 अंबुजा सीमेंट ने हासिल की थीं, और कम-अस-कम 15 खदानों की नीलामी में अंबुजा सीमेंट बोली लगाने वाली इकलौती कंपनी थी. इनमें से 13 राजस्थान सरकार ने रद्द कर दी हैं.
नागौर ज़िले में स्थित ये खदानें करीब छह महीने पहले अडानी समूह की कंपनी अंबुजा सीमेंट को आवंटित हुई थीं. लेकिन सरकार ने पाया कि नागौर में नीलाम हुए अन्य ब्लॉक की तुलना में इन खदानों में बहुत कम बोली हासिल हुई थी.
सितंबर-नवंबर 2022 में जबलपुर में हुई अग्निपथ की परीक्षा पर अभ्यर्थियों ने धांधली का आरोप लगाया है. हाल ही में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सेना को निर्देश दिया है कि इस भर्ती के दौरान चयनित हुए सभी उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों का ख़ुलासा किया जाए.
परीक्षा केंद्रों पर सामूहिक नकल का माहौल था. पर्यवेक्षक कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे. कहीं से नहीं लग रहा था कि भारत सरकार की प्रमुख वैज्ञानिक संस्था में भर्ती की परीक्षा हो रही है. गुजरात की कंपनी एडुटेस्ट द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर पढ़ें द वायर हिंदी की पड़ताल की तीसरी क़िस्त.
'जल जीवन मिशन' के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के दावों की पोल खोलती पहली किश्त के बाद यह दूसरी किश्त बताती है कि किस तरह ज़मीनी स्तर पर इस योजना को लागू करने में धांधली चल रही है.
इस योजना ने इन गांवों और युवाओं का जीवन किस तरह प्रभावित किया है? क्या अब ये फौजियों के गांव नहीं कहलाए जाएंगे? जीवन का एकमात्र सपना बिखर जाने के बाद ये युवक अब क्या कर रहे हैं? क्या सेना को इस योजना की आवश्यकता है? क्या सेना के आधुनिकीकरण के लिए यह एक अनिवार्य कदम है?
इन प्रश्नों की पड़ताल के लिए द वायर ने देश के ऐसे कई इलाकों की यात्रा की. इस सिलसिले में पहली क़िस्त हरियाणा
मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में सेना में जाने की लम्बी परम्परा रही है. मसलन, अब तक हर भर्ती में मुरैना के काजी बसई गांव के 4-5 युवक सेना में चुने जाते थे. अग्निपथ योजना आने के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि गांव से कोई नहीं चुना गया. सेना की भर्ती पर निर्भर रहते आये ये युवक अब अनजाने काम खोज रहे हैं.
पूर्व सैनिकों का कहना है कि जब आप चार साल के अनुबंध पर लड़कों को भर्ती करेंगे, तो संभव है कि कहीं कम और कमतर लड़के सेना में जाएंगे, जिनके भीतर जुनून कम होगा, और देश के लिए मिट जाने का जज़्बा भी नहीं होगा. क्या सेना को उस श्रेणी और गुणवत्ता के जवान मिल पाएंगे जो वह चाहती है?
अहमदाबाद की एडुटेस्ट कंपनी को यूपी सरकार ने ब्लैकलिस्ट किया है, पर यह अब पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले सीएसआईआर में भर्ती की परीक्षा का दूसरा चरण आयोजित कर रही है. इसी परीक्षा के कुछ अभ्यर्थी पहले चरण के दौरान हुई नकल के आरोप में जेल में हैं. द वायर हिंदी की ख़ास पड़ताल की दूसरी क़िस्त.
एडुटेस्ट के संस्थापक सुरेशचंद्र आर्य एक हिंदू संगठन के अध्यक्ष हैं, उनके कार्यक्रमों में मोदी शामिल होते हैं. कंपनी के प्रबंध निदेशक विनीत आर्य को जेल हो चुकी है, लेकिन फिर भी इसे परीक्षा के ठेके मिलते रहे हैं.
द वायर हिंदी की ख़ास पड़ताल की पहली क़िस्त.
गुजरात का भर्ती घोटाला मॉडल: 11 पेपर लीक, 201 आरोपी, चयन बोर्ड अध्यक्ष का इस्तीफ़ा, पर सज़ा एक भी नहीं
गुजरात कांग्रेस के मुताबिक यह भर्ती घोटाले सरकारी सरंक्षण के बगैर संभव नहीं हैं. भाजपा के प्रमुख नेता और नरेंद्र मोदी के करीबी असित वोरा को एक चर्चित घोटाले के बाद चयन बोर्ड के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था. इसी तरह जो प्रिंटिंग प्रेस पेपर लीक के मसले पर सुर्ख़ियों में थी, उसने कभी मोदी की किताब का मुद्रण किया था.