Jagdeep Dhankhar

कॉलेजियम की सिफ़ारिशों पर केंद्र का फैसला न लेना लोकतंत्र के लिए घातक: पूर्व जज

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू की कॉलेजियम पर सार्वजनिक टिप्पणियों को निंदनीय बताते हुए कहा कि अदालत के फैसले स्वीकार करना उनका कर्तव्य है. उन्होंने जोड़ा कि अगर यह गढ़ (न्यायपालिका) भी गिर जाता है तो हम अंधकार युग के गर्त में चले जाएंगे.

सिब्बल का रिजिजू पर तंज़: क्या आपके विवादित बयान न्यायपालिका को मज़बूत करने के लिए हैं

राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल की यह टिप्पणी केंद्रीय कानून मंत्री रिजिजू के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार और न्यायपालिका में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि दोनों एक-दूसरे पर हमले कर रहे हों और उनके बीच ‘महाभारत’ चल रहा हो.

केंद्र सरकार न्यायपालिका पर क़ब्ज़ा करना चाहती है, जनता ऐसा कभी होने नहीं देगी: केजरीवाल

केंद्र और न्यायापालिका के बीच जजों की नियुक्ति को लेकर चल रही खींचतान के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश की सभी स्वतंत्र संस्थाओं पर ग़ैर-क़ानूनी रूप से क़ब्ज़ा करने के बाद अब ये लोग न्यायपालिका पर क़ब्ज़ा करना चाहते हैं. जनता ऐसा कभी नहीं होने देगी.

जजों को सरकार की तरह चुनाव या सार्वजनिक जांच का सामना नहीं करना पड़ता: क़ानून मंत्री

क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार और न्यायपालिका के बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ‘महाभारत’ हो रही है. वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस आरएस सोढ़ी ने क़ानून मंत्री द्वारा कॉलेजियम पर उनके बयान के समर्थन के बाद कहा कि उनके कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की बजाय सरकार और न्यायपालिका को इस मुद्दे पर परिपक्व बहस करनी चाहिए.

रिटायर्ड जज बोले- सुप्रीम कोर्ट ने संविधान को ‘हाईजैक’ कर लिया है, रिजिजू ने समर्थन किया

केंद्रीय क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस आरएस सोढ़ी के विचारों का समर्थन किया है. जस्टिस सोढ़ी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार संविधान का अपहरण कर लिया. इसके बाद कहा कि वह न्यायाधीशों की नियुक्ति ख़ुद करेगा और इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होगी.

उपराष्ट्रपति को सीजेआई का जवाब- संविधान का मूलभूत ढांचा ध्रुव तारे की तरह मार्गदर्शन करता है

भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जब आगे का रास्ता जटिल होता है तो भारतीय संविधान की मूल संरचना अपने व्याख्याताओं और कार्यान्वयन करने वालों को मार्गदर्शन और निश्चित दिशा दिखाती है. बीते दिनों उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा था कि 1973 में केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मूलभूत ढांचे में संसद द्वारा बदलाव न किए जाने की ग़लत परंपरा रखी थी.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की हालिया टिप्पणियों के पीछे क्या मक़सद है?

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने केशवानंद भारती फैसले की वैधता पर सवाल उठाया है, जिसका आशय है कि संसद को संविधान में संशोधन करने का संप्रभु अधिकार होना चाहिए, चाहे वह संविधान के बुनियादी ढांचे का अतिक्रमण ही क्यों न करता हो.

भागवत व धनखड़ के बोल: सवाल संविधान की सर्वोच्चता का है…

संघ प्रमुख की मुसलमानों से अपना ‘श्रेष्ठताबोध’ छोड़ने को कहकर उनकी भारतीयता की शर्त तय करने की कोशिश हो या उपराष्ट्रपति की विधायिका का ‘श्रेष्ठताबोध’ जगाकर उसके व न्यायपालिका के बीच का संतुलन डगमगाने की, दोनों के निशाने पर देश का संविधान ही है.

सरकार स्वतंत्रता के अंतिम स्तंभ ‘न्यायपालिका’ पर क़ब्ज़ा चाहती है: कपिल सिब्बल

जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच चल रहे गतिरोध को लेकर पूर्व क़ानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार इस तथ्य से सामंजस्य नहीं बैठा पा रही है कि उच्च न्यायपालिका में होने वाली नियुक्तियों को लेकर उसकी बात अंतिम नहीं है.

उपराष्ट्रपति ने फिर न्यायपालिका को घेरा, कहा- संसदीय क़ानून को अमान्य करना लोकतांत्रिक नहीं

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम निरस्त किए जाने पर कहा कि ऐसा दुनिया में कहीं नहीं हुआ. कोई भी संस्था लोगों के जनादेश को बेअसर करने के लिए शक्ति या अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकती है. इससे पहले भी वह सुप्रीम कोर्ट के इस क़दम की आलोचना कर चुके हैं.

कांग्रेस ने धनखड़ को लिखा: इस सरकार से पहले किसी ने न्यायपालिका के कामकाज में दख़ल नहीं दिया

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ द्वारा कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की न्यायपालिका से जुड़ी टिप्पणी को ‘अनुचित’ कहे जाने के बाद पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने धनखड़ को लिखे पत्र में कहा कि मौजूदा सरकार ने न्यायपालिका के कामकाज में दख़ल के साथ न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया बदलने का प्रयास भी किया है.

रिजिजू के बयान पर कांग्रेस सांसद ने पूछा- क्या सरकार न्यायपालिका से टकराने का प्रयास कर रही है

बीते हफ्तेभर में केंद्रीय क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू संसद में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत अर्ज़ियां और ‘दुर्भावनापूर्ण’ जनहित याचिकाएं न सुनने को कह चुके हैं, इसके बाद उन्होंने अदालत की छुट्टियों पर टिप्पणी की और कोर्ट में लंबित मामलों को जजों की नियुक्ति से जोड़ते हुए कॉलेजियम के स्थान पर नई प्रणाली लाने की बात दोहराई.

अदालतों में लंबित मामलों के बहाने क़ानून मंत्री ने फिर कॉलेजियम प्रणाली पर निशाना साधा

गुरुवार को राज्यसभा में देश की अदालतों में लंबित मामलों के बारे में पूछे गए एक सवाल को केंद्रीय क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू ने न्यायाधीशों के रिक्त पदों से जोड़ते हुए कहा कि यह मुद्दा जजों की नियुक्तियों के लिए ‘कोई नई प्रणाली’ लाए जाने तक हल नहीं होगा. 

बीते आठ सालों में केंद्रीय एजेंसियों ने तीन हज़ार विपक्ष सदस्यों के यहां छापे मारे: आप सांसद

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान आम आदमी पार्टी के सदस्य संजय सिंह ने ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि ईडी ने पिछले आठ सालों में विपक्षी नेताओं के ख़िलाफ़ 3,000 छापे डाले हैं लेकिन सिर्फ 23 ही लोगों को दोषी पाया गया है.

राज्यसभा में अहम मुद्दों पर बात रखने के लिए पूर्व पीएम और वरिष्ठ सांसदों को तरजीह मिलेगी: धनखड़

राज्यसभा नियमों के अनुसार, बहस के दौरान राजनीतिक दलों की संख्या के अनुसार समय का आवंटन किया जाता है. जिस दल के जितने अधिक सदस्य होते हैं, उसे उतना ही अधिक समय दिया जाता है. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा सदन में अपनी पार्टी जद (एस) के एकमात्र सदस्य हैं, इसलिए उन्हें अपनी बात रखने के लिए सबसे कम समय आवंटित होता है.