Jobs

मेटा ने 11,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, ज़ुकरबर्ग ने ‘ज़िम्मेदारी ली’

फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की मूल कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स ने 11,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया है. कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा, ‘व्यापक आर्थिक मंदी, प्रतिस्पर्धा और विज्ञापन हानि ने राजस्व को बहुत कम कर दिया है. मैंने इसका गलत आकलन किया और मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं.’

मेघालय: सरकारी पदों को भरने की मांग को लेकर आयोजित रैली में हिंसा

मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में आयोजित रैली के दौरान प्रदर्शनकारी संगठनों ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोज़गार देने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है. नौकरियों की कमी के कारण अधिकांश युवा ड्रग्स या अन्य असामाजिक गतिविधियों में शामिल हैं.

बायजूस अगले छह महीनों में पांच प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी करेगी

ऐप आ​धारित कोचिंग सेवा प्रदान करने वाली कंपनी बायजूस ने कहा कि कंपनी अगले छह महीनों में पांच प्रतिशत यानी लगभग 2,500 कर्मचारियों की छंटनी करेगी. इसके अलावा यह भारत और विदेशी कारोबार के लिए 10,000 शिक्षकों को नियुक्त करेगी.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सिर्फ भाषा बदली है, विचार नहीं

बीते कुछ दिनों से आरएसएस नेताओं की भाषा बदली दिख रही है लेकिन बदलाव संघ के एजेंडा पर कभी रहा नहीं है. यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि संघ ने ‘अराजनीतिक होने की राजनीति’ करते हुए अपने स्वयंसेवकों को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाया है और कैसे वे लोकतंत्र व संविधान के गुणों व मूल्यों से खिलवाड़ कर रहे हैं.

सितंबर में भारत की सेवा क्षेत्र की गतिविधि छह महीने के निचले स्तर पर पहुंची

अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ‘एसएंडपी ग्लोबल’ द्वारा जारी सेवा क्षेत्र के लिए क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) अगस्त में 57.2 से घटकर सितंबर में 54.3 पर आ गया. यह मार्च के बाद सबसे धीमी दर से विस्तार को दर्शाता है. 

देश के श्रमबल में महिलाओं के साथ होने वाली ग़ैर-बराबरी की जड़ें पितृसत्ता में छिपी हैं

ऑक्सफैम की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारतीय श्रम बाज़ार में महिलाएं पुरुषों की तुलना में भागीदारी और मेहनताने- दोनों पहलुओं पर ग़ैर-बराबरी का सामना करती हैं. इसकी वजहें आर्थिक तो हैं ही, लेकिन इसका मूल समाज की पितृसत्तात्मक व्यवस्था में छिपा है.

गैस, ईंधन की बढ़ी क़ीमतों से ध्यान हटाने के लिए नफ़रत और हिंसा फैला रही है भाजपा: राहुल गांधी

भारत जोड़ो यात्रा पर निकले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि देश हर रोज़ ईंधन के दामों में भारी वृद्धि देख रहा है. भारत में जनता से अधिकाधिक पैसे लेकर चंद उद्योगपतियों को दिए जा रहे हैं. सच्चाई यही है कि भाजपा द्वारा फैलाई जा रही हिंसा और नफ़रत इन बातों से ध्यान भटकाने के लिए है.

म्यांमार में बंधक बनाए गए भारतीयों के रिहा कराने के हरसंभव प्रयास जारी: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि म्यांमार के म्यावड्डी क्षेत्र में फंसे 80-90 भारतीयों में से अब तक 32 लोगों को बचा लिया गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों को नौकरी को लेकर लुभाने वाली कंपनियों से सचेत रहना चाहिए.

Jammu: Special Police Officers (SPO) applicants stand in a queue to submit their forms at Police line, in Jammu, Thursday, Sept 20, 2018. (PTI Photo)(PTI9_20_2018_000028B)

बेरोज़गारी दर अगस्त में बढ़कर एक साल के उच्च स्तर 8.3 प्रतिशत पर: सीएमआईई

आर्थिक शोध संस्थान सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में रोज़गार पिछले महीने की तुलना में 20 लाख घटकर 39.46 करोड़ रह गया. इस दौरान शहरी बेरोज़गारी दर बढ़कर 9.6 प्रतिशत और ग्रामीण बेरोज़गारी दर बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई.

दिल्ली हाईकोर्ट का ‘अग्निपथ’ योजना पर रोक लगाने से इनकार, केंद्र से मांगा जवाब

केंद्र ने संविदा आधारित अग्निपथ सैन्य भर्ती योजना की घोषणा बीते 14 जून को की थी, जिसमें साढ़े 17 साल से 21 साल के बीच के युवाओं को केवल चार वर्ष के लिए सेना में भर्ती करने का प्रावधान है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने समक्ष लंबित उन सभी जनहित याचिकाओं को बीते 19 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट को स्थानांतरित कर दिया था, जिनमें इस योजना को चुनौती दी गई थी.

बीते आठ सालों में सरकारी नौकरियों के लिए 22 करोड़ आवेदन, 7.22 लाख को नौकरी मिली

केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2014-15 से 2021-22 के बीच उसके विभागों को नौकरियों के लिए 22.05 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए, लेकिन नौकरी एक फीसदी से भी कम (0.33) उम्मीदवारों को मिली. वहीं, वर्ष 2019-20 को छोड़ दें तो केंद्र द्वारा दी जाने वाली नौकरियों में 2014-15 के बाद से साल दर साल गिरावट देखी गई है.

क्या भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी ख़त्म हो चुकी है

यूपी में बीते दिनों हुई दो गिरफ़्तारियां स्पष्ट करती हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अब मौजूद नहीं है. या फिर जैसा कि ईदी अमीन ने एक बार कहा था कि ‘बोलने की आज़ादी तो है, लेकिन हम बोलने के बाद की आज़ादी की गारंटी नहीं दे सकते.’

जीवन के ज़रूरी मुद्दों को लेकर अप्रासंगिक होती बहसें

कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: ग़रीबी, बेरोज़गारी, कुपोषण, शिक्षा का लगातार गिरता स्तर, बढ़ती विषमता, रोज़-ब-रोज़ बढ़ाई जा रही हिंसा-घृणा, असह्य हो रही महंगाई आदि मुद्दों पर बहस ‘सबका साथ सबका विकास’ जैसे जुमले का खोखलापन उजागर कर देगी, इसलिए उन्हें बहस से बाहर रखना सत्ता की सुनियोजित रणनीति है.

विपक्षी नेताओं ने अग्निपथ सैन्य भर्ती योजना में जाति पूछने का आरोप लगाया

राजद नेता तेजस्वी यादव, आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह आदि ने केंद्र की मोदी सरकार पर इस मुद्दे पर तीखा हमला बोला है. यादव ने कहा कि जात न पूछो साधु की, लेकिन जात पूछो फौजी की. संघ की भाजपा सरकार जातिगत जनगणना से दूर भागती है, लेकिन देश सेवा के लिए जान देने वाले अग्निवीर भाइयों से जाति पूछती है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आरोपों को ख़ारिज करते हुए इसे अफ़वाह बताया है.

‘पंजाब: जिनां राहां दी मैं सार न जाणां’ कविता या कहानी नहीं, अतीत और आज का जीवंत दस्तावेज़ है

पुस्तक समीक्षा: अमनदीप संधू की किताब ‘पंजाब: जर्नी थ्रू फॉल्ट लाइंस’ के पंजाबी अनुवाद ‘पंजाब: जिनां राहां दी मैं सार न जाणां’ में वो पंजाब नहीं दिखता है जो फिल्मों, गीतों में दिखाया जाता रहा है. यहां इस सूबे की तल्ख़, खुरदरी और ज़मीनी हक़ीक़त से सामना होता है.