क्या आज के सत्ताधारी राम राज्य बना सकते हैं?

राम राज्य अपने आप नहीं आएगा, इसके लिए बड़े पैमाने पर सामाजिक प्रयास करने होंगे. सभी के लिए न्याय चाहिए होगा. लिंग, जाति, समुदायों के बीच समता लानी होगी. सभी के लिए उचित कमाई वाले रोज़गार, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं और माहौल चाहिए होगा. लेकिन सिर्फ राम का आह्वान करने से ये नहीं होगा.

बार एसोसिएशन का सीजेआई से अनुरोध- 22 जनवरी को अनुपस्थिति रहने पर कोई प्रतिकूल आदेश न दें

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखते हुए कहा है कि आप निस्संदेह इस उत्सव के महत्व से अवगत हैं, हम विशेष रूप से अनुरोध कर रहे हैं कि किसी भी मामले में किसी भी वकील या वादी की अनुपस्थिति के कारण कोई प्रतिकूल आदेश पारित न किया जाए.

विदाई भाषण में जज का आरोप- पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा ने मेरा तबादला ग़लत इरादे से किया था

इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर ने अपने विदाई भाषण में आरोप लगाया कि अक्टूबर 2018 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से मेरा तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट में किया गया था. तब सीजेआई दीपक मिश्रा कॉलेजियम के अध्यक्ष थे. मुझे लगता है कि मेरा तबादला मुझे परेशान करने के लिए किया गया था.

संविधान का ढांचा तो औपचारिक रूप से बरक़रार है, पर उसकी आत्मा का हनन रोज़ हो रहा है

कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: जैसे अक्सर क्रांति को क्रांति की संतानें ही खा जाती हैं वैसे ही संविधान की संतानें, राजनीतिक दल, लोकतांत्रिक पद्धति से चुनी गई सरकारें संविधान को कुतर-काट रहे हैं.

मिसोजिनीज़: जोन स्मिथ की ये किताब समाज में पसरे स्त्रीद्वेष को उघाड़कर रख देती है

पुस्तक समीक्षा: 1989 में इंग्लैंड की पत्रकार जोन स्मिथ द्वारा लिखी गई 'मिसोजिनीज़' जीवन के हरेक क्षेत्र- अदालत से लेकर सिनेमा तक व्याप्त स्त्रीद्वेष की पड़ताल करती है. भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखें, तो स्त्रीद्वेष की व्याप्ति असीमित दिखने लगती है.

हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति और तबादलों से संबंधित 70 सिफ़ारिशें सरकार के पास लंबित: सुप्रीम कोर्ट

देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति में सरकार द्वारा की जा रही कथित देरी पर अवमानना की कार्यवाही की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1 नवंबर 2022 से कॉलेजियम द्वारा की गईं 70 सिफारिशें वर्तमान में सरकार के पास लंबित हैं. जब तक इनका समाधान नहीं हो जाता, हर 10 से 12 दिन में सुनवाई होगी.

जस्टिस चंद्रू जैसी शख़्सियतें भले ही किसी की रोल माॅडल न रह गई हों, लेकिन उन पर चर्चा ज़रूरी है

वकालत की अपनी पारी को विराम देकर जस्टिस के. चंद्रू 31 जुलाई, 2006 को जब मद्रास उच्च न्यायालय के जज बने तो मामलों की सुनवाई और फैसलों की गति ही नहीं तेज की, न्याय जगत की कई पुरानी औपनिवेशिक परंपराओं और दकियानूसी रूढ़ियों को भी तोड़ डाला. साथ ही कई नई और स्वस्थ परंपराओं का निर्माण भी किया.

‘जेंडर स्टीरियोटाइप’ पर सुप्रीम कोर्ट की हैंडबुक क्या कहती है

समाज में प्रचलित जेंडर स्टीरियोटाइप (लैंगिक रूढ़ियों), ख़ासतौर पर महिलाओं से संबंधित, को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 30 पन्नों की एक हैंडबुक निकाली है. इसमें अदालतों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली स्टीरियोटाइपिंग और इससे पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बात की गई है.

सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट जजों के लिए संपत्ति की घोषणा करना अनिवार्य हो: संसदीय समिति

भाजपा सांसद सुशील मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने संसद में पेश रिपोर्ट में सिफ़ारिश की है कि जिस तरह नेताओं और नौकरशाहों द्वारा उनकी संपत्ति की घोषणा की जाती है, उसी तरह सरकार उच्च न्यायपालिका के जजों के लिए उनकी संपत्ति की वार्षिक घोषणा अनिवार्य करने के लिए क़ानून बनाए.

बॉम्बे हाईकोर्ट के जज ने अदालत में इस्तीफ़ा दिया, कहा- आत्मसम्मान के ख़िलाफ़ काम नहीं कर सकता

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित देव ने शुक्रवार को नागपुर कोर्ट रूम में अचानक इस्तीफ़ा देने की घोषणा की. वहां मौजूद एक वकील के अनुसार, उन्होंने कहा कि वे अपने आत्मसम्मान विरुद्ध काम नहीं कर सकते.

न्यायपालिका के ख़िलाफ़ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के लिए नरसिंहानंद को नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक अवमानना याचिका में कहा गया है कि कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद ने जनवरी 2022 में एक साक्षात्कार के दौरान कहा था कि हमें सर्वोच्च न्यायालय और संविधान पर कोई भरोसा नहीं है. जो लोग भारत के सर्वोच्च न्यायालय में विश्वास करते हैं, वे कुत्ते की मौत मरेंगे.

जम्मू कश्मीर को अब केवल न्यायपालिका का ही सहारा है

महबूबा मुफ़्ती लिखती हैं, 'जम्मू कश्मीर के लोगों ने लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के साझा मूल्यों पर जिस देश से जुड़ने का फैसला किया, उसने हमें निराश कर दिया है. अब, केवल न्यायपालिका ही है जो हमारे साथ हुई ग़लतियों और नाइंसाफ़ी को सुधार सकती है.'

वकीलों की संस्था की मांग- राजनीतिक नियुक्ति स्वीकाने से पहले जजों के लिए कूलिंग पीरियड तय हो

बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर शीर्ष अदालत और हाईकोर्ट के जजों के लिए रिटायरमेंट के बाद कोई राजनीतिक पद स्वीकारने के लिए दो साल का 'कूलिंग पीरियड' तय करने की मांग की है. उनका कहना है कि ऐसा न होने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बारे में प्रतिकूल धारणा बन रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जज लंबित मामलों पर मीडिया में इंटरव्यू नहीं दे सकते हैं

सुप्रीम कोर्ट तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मीडिया को एक इं​टरव्यू देते हुए कहा था कि वे बनर्जी को नापसंद करते हैं. गौरतलब है कि जस्टिस गंगोपाध्याय उस मामले पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें बनर्जी आरोपी थे.

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