Judiciary

इस समय न्यायपालिका विश्वसनीयता के संकट से जूझ रही है: जस्टिस ओका

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में हाल में नियुक्त किए गए जस्टिस अभय एस. ओका  ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि क़ानूनी पेशे के सदस्यों को न्यायपालिका में देश के नागरिकों का भरोसा बहाल करने की दिशा में काम करना चाहिए. देश में इस समय न्यायाधीशों और जनसंख्या का अनुपात प्रति 10 लाख लोगों के लिए 17 या 18 न्यायाधीश हैं. न्यायाधीशों की कमी की समस्या से निपटा जाना चाहिए और इस अनुपात में सुधार किया जाना चाहिए.

राम-कृष्ण के बिना भारत की संस्कृति अधूरी, उनके सम्मान के लिए क़ानून बने: इलाहाबाद हाईकोर्ट

भगवान राम और कृष्ण के ख़िलाफ़ अश्लील टिप्पणी करने के आरोपी एक को ज़मानत देते हुए जज जस्टिस शेखर कुमार यादव ने ये बात कही. उन्होंने कहा कि राम इस देश के हर नागरिक के दिल में बसते हैं, वह भारत की आत्मा हैं. बीते सितंबर महीने में एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस यादव ने कहा था कि संसद को गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने वाला क़ानून बनाना चाहिए और गायों को मौलिक अधिकारों के दायरे में शामिल करना चाहिए.

हमारा संविधान: अनुच्छेद-21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अर्थ

वीडियो: अनुच्छेद-21 में जिन शब्दों का उपयोग हुआ है, उनकी सुप्रीम कोर्ट ने कैसे व्याख्या की है? अपराधियों के अधिकार से लेकर महिलाओं के अधिकारों तक- फेयर ट्रायल, स्पीड ट्रायल और पर्यावरण की सुरक्षा को भी कोर्ट ने अनुच्छेद-21 में बताया है. इस विषय में विस्तार से बता रही हैं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अवनि बंसल.

केंद्र ने उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के लिए अनुशंसित 106 नामों में से सात मंज़ूर किए: सीजेआई

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा कि इन नियुक्तियों से कुछ हद तक लंबित पड़े मामलों पर भी ध्यान दिया जाएगा. कानून मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा उन्हें नामों की शीघ्र मंजूरी का आश्वासन दिया गया है. उन्होंने कहा कि वह न्याय तक पहुंच और लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए सरकार से सहयोग और समर्थन चाहते हैं.

विधायिका को क़ानून पर फिर से विचार कर समय के अनुसार बनाने की ज़रूरत: मुख्य न्यायाधीश

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा कि आज़ादी के 74 साल बाद भी परंपरागत जीवन शैली का पालन कर रहे लोग और कृषि प्रधान समाज अदालतों का दरवाज़ा खटखटाने में झिझक महसूस करते हैं. हमारे न्यायालयों की परंपराएं, प्रक्रियाएं, भाषा उन्हें विदेशी लगती हैं. क़ानूनों की जटिल भाषा और न्याय प्रदायगी की प्रक्रिया के बीच ऐसा लगता है कि आम आदमी अपनी शिकायत को लेकर बहुत आशांवित नहीं होता है.

हमारी न्याय व्यवस्था का भारतीयकरण करने की ज़रूरत: सीजेआई एनवी रमना

दिवंगत न्यायाधीश जस्टिस मोहन शांतानागौदर को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा कि हमारी न्याय व्यवस्था कई बार आम आदमी के लिए कई अवरोध खड़े कर देती है. अदालतों के कामकाज और कार्यशैली भारत की जटिलताओं से मेल नहीं खाते. हमारी प्रणालियां, प्रक्रियाएं और नियम मूल रूप से औपनिवेशिक हैं और ये भारतीय आबादी की ज़रूरतों से पूरी तरह मेल नहीं खाते.

सुप्रीम कोर्ट पर ‘अपमानजनक’ टिप्पणी को लेकर यूट्यूबर अजीत भारती पर होगी अवमानना कार्यवाही

‘डू पॉलिटिक्स’ नाम का यूट्यूब चैनल चलाने वाले अजीत भारती के एक वीडियो में शीर्ष अदालत और इसके न्यायाधीशों को लेकर ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणियों को लेकर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने आपराधिक अवमानना ​​​​कार्यवाही शुरू करने की सहमति दी है. उन्होंने कहा कि यह न्यायपालिका के लिए बेहद अपमानजनक है और इसका मक़सद स्पष्ट रूप से अदालतों को बदनाम करना है.

हमारा संविधान; अनुच्छेद 21: एके गोपालन मामले से लेकर मेनका गांधी संबंधी फैसला

वीडियो: संविधान का अनुच्छेद 21 क्या कहता है और इसका क्या इतिहास है, क्यों इसे मूल अधिकारों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है? अनुच्छेद 21 में दिए गए अधिकार को अमेरिकी संविधान की तुलना में सुप्रीम कोर्ट ने कैसे देखा, बता रही हैं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अवनि बंसल.

कॉलेजियम ने हाईकोर्ट में 68 जजों की सिफ़ारिश की, इसमें से 12 पर केंद्र ने जताई थी आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने केंद्र की दलीलों को दरकिनार करते हुए 12 ऐसे नामों को दोहराया है, जिस पर मोदी सरकार ने पूर्व में आपत्ति जताई थी. नियम के मुताबिक यदि कॉलेजियम किसी सिफ़ारिश को दोहराती है तो केंद्र सरकार को हर हाल में उसकी नियुक्ति सुनिश्चित करनी होगी.

पेगासस जासूसीः जांच के लिए सरकार का विशेषज्ञ समिति का प्रस्ताव, याचिकाकर्ताओं ने जताई आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दाख़िल कर नरेंद्र मोदी सरकार ने कहा कि कुछ निहित स्वार्थों द्वारा दिए गए किसी भी ग़लत विमर्श को दूर करने और उठाए गए मुद्दों की जांच करने के उद्देश्य से विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया जाएगा. हालांकि, सरकार ने यह नहीं बताया कि वह ऐसा कब करेगी, समिति में कौन होगा या समिति जांच में कितना समय लेगी.

पेगासस: एफआईआर दर्ज करने की पुरानी याचिका खुलवाने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे गोविंदाचार्य

आरएसएस के पूर्व विचारक केएन गोविंदाचार्य ने अपनी ताज़ा याचिका में भारत में पेगासस के उपयोग का दायरा और इसके लिए ज़िम्मेदार संस्थाओं का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने जासूसी के कथित आरोपों पर फेसबुक, वॉट्सऐप और एनएसओ समूह के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराने और एनआईए जांच की भी मांग की हैं.

पेगासस जासूसी: संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने स्पायवेयर तकनीक की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक पैनल ने कहा कि यह रोक तब तक लगाई जानी चाहिए जब तक कि विभिन्न सरकारें ऐसे स्पायवेयर के इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के पालन की मज़बूत व्यवस्था न बना लें. विशेषज्ञों ने कहा कि वे चिंता में हैं कि मानवाधिकार रक्षकों, पत्रकारों और राजनीतिक विरोधियों पर नज़र रखने, ​​​​उन्हें डराने एवं चुप कराने के लिए निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

निगरानी सॉफ़्टवेयर ख़रीदने के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया: आईटी मंत्रालय

इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने संसद में कहा था कि उसने इज़राइल स्थित एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पायवेयर को ख़रीदने को लेकर कोई लेन-देन नहीं किया है. एनएसओ समूह पर भारत सहित कई देशों में पत्रकार, कार्यकर्ता और नेताओं के फोन पर नज़र रखने के लिए पेगासस स्पायवेयर का इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं.

पेगासस जासूसी विवाद: सरकार ने कहा, रक्षा मंत्रालय ने एनएसओ समूह के साथ कोई लेन-देन नहीं किया

इज़रायल के एनएसओ समूह ने सैन्य स्तरीय जासूसी स्पायवेयर पेगासस को विकसित किया है, जिस पर भारत सहित कई देशों में तमाम नेताओं, पत्रकार और कार्यकर्ताओं आदि के फोन पर नज़र रखने के आरोप लग रहे हैं. रक्षा मंत्रालय के एसएसओ समूह से लेन-देन के संबंध में इनकार पर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि रक्षा मंत्रालय सही है, तो एक मंत्रालय/विभाग को इससे अलग कर देते हैं, लेकिन शेष सभी मंत्रालयों/विभागों की ओर से केवल प्रधानमंत्री ही जवाब दे सकते हैं.

पेगासस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस पर बहस सोशल मीडिया या वेबसाइट पर नहीं होनी चाहिए

इज़रायल स्थित एनएसओ ग्रुप के स्पायवेयर पेगासस से कथित तौर पर जासूसी कराए जाने के मामले की स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध करने वाले कुछ याचिकाकर्ताओं के सोशल मीडिया और वेबसाइटों पर समानांतर वाद-विवाद करने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी ज़ाहिर की है.  मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत वाद-विवाद की विरोधी नहीं है, लेकिन जब मामला अदालत में लंबित है तो इस पर चर्चा यहीं होनी चाहिए.