Justice

क़ानूनी पेशे की संरचना सामंती, पितृसत्तात्मक और महिलाओं के अनुकूल नहीं है: सीजेआई चंद्रचूड़

भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने एक आयोजन के दौरान कहा कि कभी-कभी क़ानून और न्याय एक ही रास्ते पर नहीं चलते हैं. क़ानून न्याय का ज़रिया हो सकता है, तो उत्पीड़न का औज़ार भी हो सकता है. क़ानून उत्पीड़न का औज़ार न बने, बल्कि न्याय का ज़रिया बने.

अब कोर्ट को संकोच छोड़कर कह देना चाहिए कि उमर का जुर्म सिर्फ़ उनका नाम उमर ख़ालिद होना है

भारत में अदालतों में न्याय अब अपवाद बनता जा रहा है. ख़ासकर जब न्याय मांगने वाले मुसलमान हों या मोदी सरकार के आलोचक या विरोधी हों.

बिहार: ट्रायल के 33 साल बाद आरोपी किसान को नाबालिग माना गया, बरी होने में 10 साल और लग गए

43 साल लंबे इस संघर्ष की पृष्ठभूमि में 7 सितंबर 1979 की एक घटना है, जिसमें बक्सर निवासी किसान मुन्ना सिंह के ख़िलाफ़ दंगे और हत्या के प्रयास में मामला दर्ज किया गया था. 2012 में उन्हें किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग माना. उसके 10 साल बाद 11 अक्टूबर 2022 को बक्सर की एक अदालत ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया.

मद्रास हाईकोर्ट ने ‘जय भीम’ के अभिनेता सूर्या, निर्देशक ज्ञानवेल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर रद्द की

तमिल फिल्म ‘जय भीम’ पर कथित तौर पर वन्नियार समुदाय को ग़लत तरीके से दिखाकर उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा था. फिल्म साल 1995 में तमिलनाडु में हिरासत में यातना और एक ‘कोरवार’ आदिवासी समुदाय के व्यक्ति की मौत की सच्ची घटना पर आधारित कहानी है.

दूसरों के विचार स्वीकारने और सहिष्णु होने का मतलब अंध सहमति जताना नहीं होता: जस्टिस चंद्रचूड़

गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ऐसे रास्ते निकाले जाएं, जिनमें क़ानूनों को बेहतर और न्यायसंगत बनाने के लिए उन पर पुनर्विचार और उन्हें पुनर्भाषित किया जा सके.

अदालत कम लोग पहुंचते हैं, अधिकतर आबादी मौन रहकर पीड़ा सहती है: प्रधान न्यायाधीश

भारत के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने न्याय तक पहुंच को ‘सामाजिक उद्धार का उपकरण’ बताते हुए कहा कि आधुनिक भारत का निर्माण समाज में असमानताओं को दूर करने के लक्ष्य के साथ किया गया था. लोकतंत्र का मतलब सभी की भागीदारी के लिए स्थान मुहैया कराना है. सामाजिक उद्धार के बिना यह भागीदारी संभव नहीं होगी. 

न्याय से इनकार करने से अंतत: अराजकता फैलेगी: सीजेआई रमना

श्रीनगर में हुए एक समारोह में सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह ज़रूरी है कि लोग महसूस करें कि उनके अधिकारों और सम्मान को मान्यता दी गई है और उन्हें संरक्षित किया गया है. उन्होंने जोड़ा कि हम अपनी अदालतों को समावेशी और सुलभ बनाने में बहुत पीछे हैं. अगर इस पर तत्काल ध्यान नहीं देते हैं, तो न्याय तक पहुंच का संवैधानिक आदर्श विफल हो जाएगा.

न्याय मिलना तभी संभव है जब पर्याप्त अदालतें और बुनियादी संरचना हो: सीजेआई रमना

देश के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने एक कार्यक्रम में कहा कि हमारी न्यायपालिका पर काम का बोझ है. देश के विभिन्न हिस्सों में न्यायिक अवसंरचना अपर्याप्त है. भारतीय न्यायपालिका और ख़ासकर निचली अदालतों को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा लंबित मामलों का है.

विदेशी नागरिक होने का आरोपी 19 महीनों से हिरासत में, कोर्ट ने कहा- न्याय के सिद्धांत की अवहेलना

गुजरात हाईकोर्ट ने साल 2020 में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप द्वारा बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिए गए आमिर सिदिकभाई शेख़ की सशर्त रिहाई के निर्देश दिए हैं. आमिर की हिरासत के बाद उनकी मां ने मतदाता पहचान-पत्र, आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे पहचान और नागरिकता के कई साक्ष्य पेश किए थे, लेकिन इन पर ग़ौर नहीं किया गया.

Guwahati: Union Minister of State for Home Affairs Kiren Rijiju addressing a press conference in Guwahati on Saturday. Assam state BJP president Ranjit Das is also seen. PTI Photo (PTI4_7_2018_000050B)

राजद्रोह क़ानून को हटाने का कोई प्रस्ताव गृह मंत्रालय के पास विचाराधीन नहीं: केंद्र

लोकसभा में केंद्र सरकार से सवाल किया गया था कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह क़ानून को औपनिवेशिक क़रार दिया है और इसकी वैधता पर सरकार से जवाब मांगा है. इसके जवाब में केंद्रीय विधि मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के किसी फैसले या आदेश में ऐसी टिप्पणी नहीं है. हालांकि बीते जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह क़ानून पर चिंता जताते हुए सरकार से पूछा था कि आज़ादी के 75 साल बाद इसे बनाए रखना ज़रूरी क्यों है.

फ़र्ज़ी एनकाउंटर के लिए कोई जगह नहीं, सरकार अपने लोगों के प्रति जवाबदेह: एनएचआरसी प्रमुख

विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा ने न्याय मिलने में देरी पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसकी वजह से लोग क़ानून अपने हाथ में लेते हैं.

‘जय भीम’ के निर्देशक ने वन्नियार समुदाय को आहत करने पर खेद जताया

तमिल, तेलुगु सहित कई भाषाओं में आई फिल्म ‘जय भीम’ पर तमिलनाडु में विवाद खड़ा हो गया है. वन्नियार समुदाय का आरोप है कि फिल्म में उन्हें ग़लत तरीके से दिखाया गया है. निर्देशक टीजे ज्ञानवेल ने कहा कि विवाद की पूरी ज़िम्मेदारी उनकी है और इसके लिए अभिनेता सूर्या को निशाना बनाना अनुचित है.

जय भीम: आशा और निराशा दोनों के यथार्थ दिखाता न्याय का संघर्ष

टीजे ज्ञानवेल की जय भीम उम्मीद और नाउम्मीदी की फ़िल्म है. उम्मीद इसलिए कि यह दिखाती है कि इंसाफ़ के लिए लड़ा जा सकता है, जीता भी जा सकता है. नाउम्मीदी इसकी कि शायद हमारे इस वक़्त में यह सब कुछ एक सपना बनकर रह गया है.

इस समय न्यायपालिका विश्वसनीयता के संकट से जूझ रही है: जस्टिस ओका

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में हाल में नियुक्त किए गए जस्टिस अभय एस. ओका  ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि क़ानूनी पेशे के सदस्यों को न्यायपालिका में देश के नागरिकों का भरोसा बहाल करने की दिशा में काम करना चाहिए. देश में इस समय न्यायाधीशों और जनसंख्या का अनुपात प्रति 10 लाख लोगों के लिए 17 या 18 न्यायाधीश हैं. न्यायाधीशों की कमी की समस्या से निपटा जाना चाहिए और इस अनुपात में सुधार किया जाना चाहिए.

उत्तर प्रदेश: बाबरी मस्जिद पर टिप्पणी करने पर दर्ज रासुका को हाईकोर्ट ने ख़ारिज किया

यह मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी निवासी मोहम्मद फ़ैयाज़ मंसूरी से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अगस्त 2020 को फेसबुक पर बाबरी मस्जिद को लेकर एक पोस्ट लिखा था, जिसके बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत मामला दर्ज किया गया था.