middle class

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लॉकडाउन धीरे-धीरे ही सही, मध्य वर्ग के सरोकारों को बदल रहा है…

कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन का असर समाज के सभी वर्गों और सभी उम्र के लोगों पर पड़ रहा है. ऐसे ही एक मध्यमवर्गीय युवक की कहानी…

Bengaluru: BJP workers wear masks of Prime Minister Narendra Modi as they arrive in support of Bengaluru Central candidate PC Mohan, as he filed his nomination papers ahead of Lok Sabha Election 2019, in Bengaluru, Friday, March 22, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI3_22_2019_000078B)

कोविड-19 के संकट काल में भारत का मध्यम वर्ग कहां है?

मध्यम वर्ग को पता है कि छह साल में उसकी कमाई घटी ही है, बिजनेस में गच्चा ही खाया है. उसके मकानों की कीमत गिर गई है, हर राज्य में सरकार नौकरी की प्रक्रिया की दुर्गति है, वह सब जानता है, लेकिन ये समस्याएं न तो नौजवानों की प्राथमिकता हैं और न ही उनके मध्यमवर्गीय माता-पिता की.

Kolkata: Mahadevi Birla World Academy students take pledge for environment, sustainability and recycling during a campaign in Kolkata, Thursday, Jan. 16, 2020. Around 2000  students from various schools of Kolkata participated in the event. (PTI Photo/Swapan Mahapatra)(PTI1_16_2020_000009B)

शिक्षा का अधिकार कानून: दस सालों के सफर में हमने क्या हासिल किया?

साल 2010 में शिक्षा का अधिकार कानून के लागू होने के बाद पहली बार सरकारों की कानूनी जवाबदेही बनी कि वे 6 से 14 साल सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था करें. लेकिन इसी के साथ ही इस कानून की सबसे बड़ी सीमा यह रही है कि इसने सावर्जनिक और निजी स्कूलों के अन्तर्विरोध से कोई छेड़-छाड़ नहीं की.

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सरकारी स्कूल फेल नहीं हुए, इन्हें चलाने वाली सरकारें फेल हुई हैं

सरकारी स्कूलों को बहुत ही प्रायोजित तरीके से निशाना बनाया गया है. प्राइवेट स्कूलों की समर्थक लॉबी की तरफ से बहुत ही आक्रामक ढंग से इस बात का दुष्प्रचार किया गया है कि सरकारी स्कूलों से बेहतर निजी स्कूल होते हैं और सरकारी स्कूलों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है.