Prison

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

महाराष्ट्र: 26 क़ैदियों ने पैरोल लेने से किया इनकार, कहा- परिवार पर नहीं बन सकते बोझ

महाराष्ट्र की विभिन्न जेलों में कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राज्य के गृह विभाग ने जेलों में क़ैदियों की संख्या को कम करने के अलावा कई अन्य फ़ैसले लिए थे. हालांकि जेल के अधिकारियों ने बताया कि जिन कैदियों को पैरोल दी गई है, उनका मानना है कि बाहर जाकर रोज़गार ढूंढने में अगर वे नाकाम रहे तो आर्थिक परेशानियों के इस दौर में अपने परिवार पर ही बोझ बन जाएंगे.

तिहाड़ जेल दिल्ली. (फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना के चलते तिहाड़ जेल से पैरोल पर रिहा 3,468 क़ैदियों का कुछ पता नहीं: रिपोर्ट

जेल प्रशासन ने इन्हें खोजने में मदद करने के लिए दिल्ली पुलिस से मदद मांगी है. दिल्ली की तिहाड़, मंडोली, रोहिणी जेल से दोषी क़रार दिए गए क़ैदियों में 1072 ने समर्पण कर दिया और 112 क़ैदियों ने अब तक समर्पण नहीं किया है. वहीं अंतरिम ज़मानत पर रिहा किए गए 5,556 विचाराधीन क़ैदियों में से क़रीब 2200 ही वापस लौटे हैं.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

गलत जेंडर पहचान, यौन हिंसा और उत्पीड़न: भारतीय जेलों में ट्रांसजेंडर होने की नियति

जहां देश में एक तरफ ट्रांसजेंडर पहचान रखने वाले लोगों के लिए क़ानूनी अधिकारों की बात होना शुरू हो रहा है, वहीं दूसरी ओर देश की जेलों में बंद ऐसे लोग ज़रूरी हक़ों और सुविधाओं से भी महरूम हैं.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

भारत की जेलों में महिला क़ैदियों की ज़िंदगी केवल शोक के लिए अभिशप्त है…

जेलें क़ैदियों को उनके अपराध के आधार पर वर्गीकृत कर सकती हैं, लेकिन जेलों, ख़ासतौर पर महिला जेलों में वर्गीकरण सिर्फ अपराधों से तय नहीं होता है. यह सदियों की परंपराओं और अक्सर धर्म द्वारा स्थापित नैतिक लक्ष्मण रेखा लांघने से जुड़ा है. ऐसे में भारतीय महिलाएं जब जेल जाती हैं, तब वे अक्सर जेल के भीतर एक और जेल में दाख़िल होती हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट. (फोटो: पीटीआई)

पुलिस के लिए किसी व्यक्ति की गिरफ़्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निजी स्वतंत्रता एक बहुमूल्य मौलिक अधिकार है और बहुत अपरिहार्य होने पर ही इसमें कटौती होनी चाहिए. तर्कहीन और अंधाधुंध गिरफ़्तारी मानवाधिकारों का उल्लंघन है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

जेलों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए आइसोलेशन वार्ड बने, रैपिड टेस्टिंग हो: समिति

कोरोना वायरस के मद्देनज़र जेलों में क़ैदियों की संख्या कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ये समिति बनाई गई थी. समिति ने क़ैदियों को ज़मानत या पैरोल देने के मानदंडों में भी ढील दी है.

Female prisoners sit inside their cell in the eastern Indian city of Kolkata. Credit: Reuters

देश की जेलें महिला क़ैदियों के लिए कितनी अनुकूल हैं?

दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में गिरफ़्तार गर्भवती सफूरा ज़रगर तिहाड़ जेल में हैं और अदालत में जेल अधीक्षक का कहना था कि उन्हें सभी ज़रूरी सुविधाएं दी जा रही हैं. हालांकि देश की जेलों की स्थिति पर आए आंकड़े और सूचनाएं बताते हैं कि भारतीय जेलें गर्भवती महिला क़ैदियों के लिहाज़ से मुफ़ीद नहीं हैं.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

नगालैंड: कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र सौ से अधिक विचाराधीन क़ैदियों को रिहा किया गया

कोरोनावायरस के चलते सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से जेल में बंद क़ैदियों की रिहाई के लिए एक पैनल गठित करने को कहा है. यह पैनल सात साल तक की सज़ा से संबंधित अपराधों के सज़ायाफ़्ता या इतने ही समय की सज़ा होने के अपराध के आरोपी विचाराधीन क़ैदियों की अंतरिम ज़मानत या पैरोल पर रिहाई के बारे में निर्णय देगा.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना: मानवाधिकार संस्था ने कहा, राजनीतिक बंदियों समेत अन्य क़ैदियों को रिहा करना चाहिए

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त के प्रवक्ता रूपर्ट कोलविले ने ख़ासकर उन लोगों को जिन्हें ज़्यादा ख़तरा है, जैसे- गर्भवती महिलाएं, मधुमेह पीड़ित, बुजुर्ग कैदी, छोटे-मोटे अपराध में बंद कैदी और ऐसे लोग जो अपनी सज़ा करीब-करीब पूरी कर चुके हैं, उन्हें भी रिहा करने की सिफ़ारिश की है.

(फोटो: पीटीआई)

कोरोना वायरस: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, कैदियों की रिहाई के लिए पैनल गठित करें सभी राज्य

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनज़र देशभर की जेलों में बंद कैदियों की चिकित्सा सहायता के लिए स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की और कहा कि क्या हम इस हालात को देखते हुए जेलों में कैदियों की भीड़ कम करने और जेलों की क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं?

तिहाड़ जेल, दिल्ली (फोटो: रायटर्स)

कोरोना वायरस: जेलों में भीड़ कम करेगी दिल्ली सरकार, कैदियों को देगी विशेष पैरोल और फर्लो

कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दो वकीलों ने जेलों में भीड़ कम करने की मांग की थी और कहा था कि 5200 कैदियों की क्षमता वाले तिहाड़ जेल में 12,100 से अधिक कैदियों को रखा गया है और देश में अधिकतर जेलों की ठीक ऐसी ही स्थिति है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

जेल में व्यवस्था बनाए रखने के लिए क़ैदियों से हिंसा करने की ज़रूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि हिरासत में हो रही हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. आरोपी और दोषी भी इंसान हैं. क़ानून सब के लिए बराबर है, चाहे वो वर्दी में हो या नहीं.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों से कहा, क़ैदियों की मौत का संज्ञान लें और मुआवज़ा दिलवाएं

पीठ ने कहा, उच्च न्यायालय राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 से 2015 के दौरान अस्वाभाविक मृत्यु के शिकार हुए कैदियों के परिजनों की पहचान करें.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

भारत की बदहाल जेलों पर कोई बात क्यों नहीं करता?

जेलों पर ज़रूरत से ज़्यादा बोझ और कर्मचारियों की कमी के चलते भारतीय जेलें राजनीतिक रसूख वाले अपराधियों के लिए एक आरामगाह और सामाजिक-आर्थिक तौर पर कमज़ोर विचाराधीन कैदियों के लिए नरक हैं.