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देश की महिला क़ैदियों के बच्चे: वो दोषी नहीं हैं, लेकिन निरपराध ही सज़ा भुगत रहे हैं

विशेष रिपोर्ट: जेल में सज़ा काट रही महिला क़ैदियों के साथ रहने वाले बच्चों को तो तमाम परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है, लेकिन वो जिन्हें मां से अलग कर बाहर अपने बलबूते जीने के लिए छोड़ दिया जाता है, उनके लिए भी परेशानियों का अंत नहीं होता.

विचाराधीन क़ैदियों की सर्वाधिक संख्या उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में: सरकार

उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद कुल क़ैदियों की संख्या 1,07,395 है, जबकि बिहार की जेलों में कुल 51,934 क़ैदी और मध्य प्रदेश की जेलों में कुल 45,484 क़ैदी बंद हैं. राज्यसभा को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी.

दिल्ली: तीन कारागारों में 66 क़ैदी और 48 कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए

जेल प्राधिकारियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सोमवार तक संक्रमित पाए गए 66 क़ैदियों में से 42 तिहाड़ और 24 मंडोली जेल में हैं. संक्रमित पाए गए 48 कर्मचारियों में से तिहाड़ के 34, मंडोली जेल के आठ और रोहिणी जेल के छह कर्मचारी हैं. 

राजस्थान: क़ैदियों के विरोध के बीच ठिठुरती ठंड में काट दी गई हाई सिक्योरिटी जेल की बिजली

23 नवंबर को अजमेर ज़िले की हाई सिक्योरिटी जेल में अधिकारियों द्वारा बिना किसी सूचना के बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई. इस क़दम के विरोध में क़ैदी भूख हड़ताल पर चले गए, लेकिन कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर उन्होंने हार मान ली.

छत्तीसगढ़: बस्तर में कथित नक्सलियों के ‘आत्मसमर्पण’ के बाद क्या होता है?

दंतेवाड़ा में ‘लोन वर्राटू’ के तहत पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले कथित पूर्व नक्सलियों के लिए बनाए गए डिटेंशन कैंप ‘शांति कुंज’ का अस्तित्व क़ानूनी दायरों से परे है.

महाराष्ट्र: 26 क़ैदियों ने पैरोल लेने से किया इनकार, कहा- परिवार पर नहीं बन सकते बोझ

महाराष्ट्र की विभिन्न जेलों में कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राज्य के गृह विभाग ने जेलों में क़ैदियों की संख्या को कम करने के अलावा कई अन्य फ़ैसले लिए थे. हालांकि जेल के अधिकारियों ने बताया कि जिन कैदियों को पैरोल दी गई है, उनका मानना है कि बाहर जाकर रोज़गार ढूंढने में अगर वे नाकाम रहे तो आर्थिक परेशानियों के इस दौर में अपने परिवार पर ही बोझ बन जाएंगे.

कोरोना के चलते तिहाड़ जेल से पैरोल पर रिहा 3,468 क़ैदियों का कुछ पता नहीं: रिपोर्ट

जेल प्रशासन ने इन्हें खोजने में मदद करने के लिए दिल्ली पुलिस से मदद मांगी है. दिल्ली की तिहाड़, मंडोली, रोहिणी जेल से दोषी क़रार दिए गए क़ैदियों में 1072 ने समर्पण कर दिया और 112 क़ैदियों ने अब तक समर्पण नहीं किया है. वहीं अंतरिम ज़मानत पर रिहा किए गए 5,556 विचाराधीन क़ैदियों में से क़रीब 2200 ही वापस लौटे हैं.

गलत जेंडर पहचान, यौन हिंसा और उत्पीड़न: भारतीय जेलों में ट्रांसजेंडर होने की नियति

जहां देश में एक तरफ ट्रांसजेंडर पहचान रखने वाले लोगों के लिए क़ानूनी अधिकारों की बात होना शुरू हो रहा है, वहीं दूसरी ओर देश की जेलों में बंद ऐसे लोग ज़रूरी हक़ों और सुविधाओं से भी महरूम हैं.

भारत की जेलों में महिला क़ैदियों की ज़िंदगी केवल शोक के लिए अभिशप्त है…

जेलें क़ैदियों को उनके अपराध के आधार पर वर्गीकृत कर सकती हैं, लेकिन जेलों, ख़ासतौर पर महिला जेलों में वर्गीकरण सिर्फ अपराधों से तय नहीं होता है. यह सदियों की परंपराओं और अक्सर धर्म द्वारा स्थापित नैतिक लक्ष्मण रेखा लांघने से जुड़ा है. ऐसे में भारतीय महिलाएं जब जेल जाती हैं, तब वे अक्सर जेल के भीतर एक और जेल में दाख़िल होती हैं.

पुलिस के लिए किसी व्यक्ति की गिरफ़्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निजी स्वतंत्रता एक बहुमूल्य मौलिक अधिकार है और बहुत अपरिहार्य होने पर ही इसमें कटौती होनी चाहिए. तर्कहीन और अंधाधुंध गिरफ़्तारी मानवाधिकारों का उल्लंघन है.

जेलों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए आइसोलेशन वार्ड बने, रैपिड टेस्टिंग हो: समिति

कोरोना वायरस के मद्देनज़र जेलों में क़ैदियों की संख्या कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ये समिति बनाई गई थी. समिति ने क़ैदियों को ज़मानत या पैरोल देने के मानदंडों में भी ढील दी है.

देश की जेलें महिला क़ैदियों के लिए कितनी अनुकूल हैं?

दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में गिरफ़्तार गर्भवती सफूरा ज़रगर तिहाड़ जेल में हैं और अदालत में जेल अधीक्षक का कहना था कि उन्हें सभी ज़रूरी सुविधाएं दी जा रही हैं. हालांकि देश की जेलों की स्थिति पर आए आंकड़े और सूचनाएं बताते हैं कि भारतीय जेलें गर्भवती महिला क़ैदियों के लिहाज़ से मुफ़ीद नहीं हैं.

नगालैंड: कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र सौ से अधिक विचाराधीन क़ैदियों को रिहा किया गया

कोरोनावायरस के चलते सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से जेल में बंद क़ैदियों की रिहाई के लिए एक पैनल गठित करने को कहा है. यह पैनल सात साल तक की सज़ा से संबंधित अपराधों के सज़ायाफ़्ता या इतने ही समय की सज़ा होने के अपराध के आरोपी विचाराधीन क़ैदियों की अंतरिम ज़मानत या पैरोल पर रिहाई के बारे में निर्णय देगा.

कोरोना: मानवाधिकार संस्था ने कहा, राजनीतिक बंदियों समेत अन्य क़ैदियों को रिहा करना चाहिए

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त के प्रवक्ता रूपर्ट कोलविले ने ख़ासकर उन लोगों को जिन्हें ज़्यादा ख़तरा है, जैसे- गर्भवती महिलाएं, मधुमेह पीड़ित, बुजुर्ग कैदी, छोटे-मोटे अपराध में बंद कैदी और ऐसे लोग जो अपनी सज़ा करीब-करीब पूरी कर चुके हैं, उन्हें भी रिहा करने की सिफ़ारिश की है.

कोरोना वायरस: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, कैदियों की रिहाई के लिए पैनल गठित करें सभी राज्य

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनज़र देशभर की जेलों में बंद कैदियों की चिकित्सा सहायता के लिए स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की और कहा कि क्या हम इस हालात को देखते हुए जेलों में कैदियों की भीड़ कम करने और जेलों की क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं?