Sexual Misconduct

यौन शोषण के दोषी प्रोफेसर को बहाल करने पर बीएचयू में विरोध प्रदर्शन

जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एसके चौबे को छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें, अभद्रता और भद्दी टिप्पणियों का दोषी पाए जाने और जांच कमेटी द्वारा कठोरतम कार्रवाई के आग्रह के बावजूद बहाल कर दिया गया है.

बीएचयू: विद्यार्थियों का आरोप, यौन शोषण के दोषी प्रोफेसर को बिना कार्रवाई बहाल किया गया

विशेष रिपोर्ट: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के एक प्रोफेसर पर छात्र-छात्राओं ने छेड़खानी और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया था. विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति ने इन्हें जांच में सही पाया और आरोपी प्रोफेसर पर कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की थी.

सीजेआई के ख़िलाफ़ शिकायत से निपटने में आंतरिक कमेटी की प्रक्रिया सवाल खड़े करती है: पूर्व जज

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह ने यह टिप्पणी अप्रैल में सीजेआई रंजन गोगोई पर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और प्रताड़ना के आरोपों के संदर्भ में की है. उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया को न्यायिक स्वतंत्रता की सुरक्षा के नाम पर गोपनीयता में बदल दिया गया.

सीजेआई यौन उत्पीड़न: शिकायतकर्ता महिला पर रिश्वत लेने का आरोप लगाने वाला शख़्स लापता

अप्रैल में सीजेआई रंजन गोगोई पर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न और प्रताड़ना के आरोप लगाए थे. तब शिकायतकर्ता महिला पर नवीन कुमार नाम के व्यक्ति ने नौकरी के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया है कि नवीन बीते अप्रैल से ही लापता हैं.

एनआईएफटी हैदराबाद यौन उत्पीड़न मामला: नौकरी से निकाले गए सभी 56 कर्मचारी बहाल

हैदराबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के एक स्टेनोग्राफर के ख़िलाफ़ 56 कर्मचारियों ने पिछले साल अक्टूबर में यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद इन लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया था जबकि आरोपी अभी भी कैंपस में ही काम कर रहे हैं.

सीजेआई गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला के पति की नौकरी बहाल

सीजेआई के ख़िलाफ़ उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिला ने एक हलफनामे में आरोप लगाया था कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट कर्मचारी के रूप में बर्ख़ास्त किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस में कार्यरत उनके पति और पति के भाई को निलंबित कर दिया गया था.

हैदराबादः एनआईएफटी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली 56 महिला कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

हैदराबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के एक स्टेनोग्राफर के ख़िलाफ़ 56 महिला कर्मचारियों ने पिछले साल अक्टूबर में यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद इन महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया गया जबकि आरोपी स्टेनोग्राफर अभी भी कैंपस में ही काम कर रहा है.

सीजेआई यौन उत्पीड़न: जस्टिस लोकुर ने कहा- संस्थागत भेदभाव हुआ, शिकायतकर्ता को मिले जांच रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला को मामले की सुनवाई करने वाली आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट निश्चित तौर पर मिलनी चाहिए ताकि शिकायतकर्ता महिला को उन सवालों का जवाब मिल सके, जो उसने उठाए हैं.

सीजेआई यौन उत्पीड़न: नौकरी से निकालने के ख़िलाफ़ शिकायतकर्ता करेंगी सीजेआई से अपील

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि सीजेआई रंजन गोगोई द्वारा किए गए आपत्तिजनक व्यवहार का विरोध करने के कारण उन्हें कोर्ट से बर्ख़ास्त कर दिया गया था.

सीजेआई यौन उत्पीड़न मामले पर केंद्र सरकार से मतभेद के चलते इस्तीफ़ा दे सकते हैं अटॉर्नी जनरल

एक्सक्लूसिव: सीजेआई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच कर रही समिति में एक बाहरी सदस्य शामिल करने की मांग करते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को पत्र लिखा था. इस पर केंद्र सरकार द्वारा उन्हें स्पष्टीकरण देने को कहा गया कि ये उनकी ‘निजी राय’ है न कि केंद्र की.

सीजेआई यौन उत्पीड़न मामला: शिकायतकर्ता ने कहा- ‘हम सब खो चुके हैं, अब कुछ नहीं बचा’

एक्सक्लूसिव: यौन उत्पीड़न के आरोपों पर सीजेआई रंजन गोगोई को सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक समिति द्वारा क्लीनचिट मिलने के बाद शिकायतकर्ता महिला से विशेष बातचीत.

आरफ़ा का इंडिया: इंसाफ़ के मंदिर में इंसाफ़ नहीं?

वीडियो: सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच समिति द्वारा यौन उत्पीड़न मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को क्लीनचिट देने पर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का नज़रिया.

सीजेआई गोगोई को क्लीनचिट देने वाली रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए: पूर्व सूचना आयुक्त

पूर्व सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु कहा, ‘जनहित का मामला लोगों को जानने का अधिकार देता है. इसलिए यौन उत्पीड़न के मामले में जो जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए, उसे छिपाते हुए आंतरिक समिति द्वारा दिए गए फैसले की रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए.’

सीजेआई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला ने मांगी जांच रिपोर्ट की कॉपी

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी ने जस्टिस एसए बोबडे की जांच समिति को पत्र लिखकर कहा कि मुझे रिपोर्ट पाने का अधिकार है. जिस तरह से सीजेआई को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में रिपोर्ट की एक कॉपी दी गई उसी तरह से मुझे भी एक कॉपी पाने का अधिकार है.

अदालत ने अपने मुखिया की रक्षा में न्याय व्यवस्था पर जनता के विश्वास की हत्या कर डाली

यौन उत्पीड़न के मामलों में सबसे आवश्यक माना जाता है कि अगर आरोपी किसी संस्था में निर्णयकारी स्थिति में है, तो वहां से उसे हटाया जाए. पिछले दिनों ऐसे कितने ही प्रसंग हमारे सामने आए जिनमें संस्था के प्रमुखों को कार्य से मुक्त किया गया. निष्पक्षता की यह पहली शर्त मानी जाती है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट से जुड़े इस विशेष मामले में ऐसा नहीं हुआ.