Tricolour

विपक्ष ने पूछा, संघ के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीर क्यों नहीं लगी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दो अगस्त को आज़ादी के 75वें वर्षगांठ समारोह के हिस्से के रूप में लोगों से अपने सोशल मीडिया अकाउंट की डिस्प्ले तस्वीर के रूप में तिरंगा लगाने का आह्वान किया था. आरएसएस और इसके प्रमुख मोहन भागवत द्वारा अब तक अपने एकाउंट पर राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीर नहीं लगाने पर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है. 

New Delhi: Soldiers fold the Tricolour after full dress rehearsal for the Beating Retreat ceremony at Vijay Chowk, in New Delhi, Sunday, Jan 27, 2019. (PTI Photo/Shahbaz Khan) (PTI1_27_2019_000187B)

सरकार ने झंडा संहिता में बदलाव किया, अब दिन-रात फहराया जा सकता है तिरंगा

इससे पहले तिरंगे को केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराने की अनुमति थी. स्वतंत्र भारत के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य पर आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है. इसके तहत सरकार 13 से 15 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रही है, जिसके मद्देनज़र लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए यह क़दम उठाया गया है.

राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के मामले में रालोद विधायक के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने का निर्देश

आरोप के अनुसार, मुज़फ़्फ़रनगर के पुरकाज़ी सीट से राष्ट्रीय लोकदल विधायक अनिल कुमार ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज उल्टा फहरा दिया था. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने के बाद विधायक ने घटना पर दुख जताते हुए कहा था कि उनसे ग़लती हो गई.

क्या राष्ट्रध्वज का अपमान देश का सम्मान करने का नया तरीका है?

तिरंगे में लिपटे एक पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यपाल के पार्थिव शरीर के आधे हिस्से पर अपना झंडा प्रदर्शित करके भाजपा ने पूरी तरह साफ कर दिया कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के मामले में वह अब भी ‘ख़ुद मियां फजीहत दीगरे नसीहत’ की अपनी नियति से पीछा नहीं छुड़ा पाई है.

गोवा: विरोध के बाद नौसेना ने द्वीप पर ध्वजारोहण रद्द किया, मुख्यमंत्री ने कहा- यह देश विरोधी है

गोवा के साओ जैसिंटो द्वीप के लोग तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजना और प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण विधेयक, 2020 का विरोध कर रहे हैं. निवासियों ने कहा है कि उन्हें ध्वारोहण से कोई आपत्ति नहीं है, वे खुद झंडा फहराएंगे, लेकिन वे नहीं चाहते कि केंद्र या राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि उनके अधिकार क्षेत्र में दखल दे.

प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने जो झंडे गाड़े हैं, तिरंगा उनका रूप नहीं लगता

क्या भगवा झंडे के समर्थक संघ और संघ से जुड़े किसी भी व्यक्ति या दल की तिरंगे के प्रति ईमानदारी पर विश्वास किया जा सकता है?

अब तिरंगे से सुकून नहीं, जुनून पैदा किया जा रहा है

तिरंगा लेकर आप कांवर यात्रा में चल सकते हैं. गणेश विसर्जन में भी उसे लहरा सकते हैं. भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में विशाल डंडों में बांधकर मोटरसाइकिल पर दौड़ा सकते हैं. तिरंगे से आप मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा करने वालों के शव ढंक सकते हैं, लेकिन उससे आप अपनी बेपर्दगी ढंक नहीं सकते!

सब कुछ बदलने का वादा करके आए मोदी ने भ्रष्ट आर्थिक नीतियों को ही आगे बढ़ाया

आज जब दुनिया में नाना प्रकार के खोट उजागर होने के बाद भूमंडलीकरण की ख़राब ​नीतियों पर पुनर्विचार किया जा रहा है, हमारे यहां उन्हीं को गले लगाए रखकर सौ-सौ जूते खाने और तमाशा देखने पर ज़ोर है.

क्या तिरंगा यात्राएं शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनती जा रही हैं?

देश के झंडे को भी क्यों सांप्रदायिक आधार पर बांटा जा रहा है? क्या हम लड़ते-लड़ते इतने दूर आ गए हैं कि देश के झंडे का भी बंटवारा कर देंगे?