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विपक्ष ने पूछा, संघ के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीर क्यों नहीं लगी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दो अगस्त को आज़ादी के 75वें वर्षगांठ समारोह के हिस्से के रूप में लोगों से अपने सोशल मीडिया अकाउंट की डिस्प्ले तस्वीर के रूप में तिरंगा लगाने का आह्वान किया था. आरएसएस और इसके प्रमुख मोहन भागवत द्वारा अब तक अपने एकाउंट पर राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीर नहीं लगाने पर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है.

आरएसएस और इसके प्रमुख मोहन भागवत के ट्विटर अकाउंट का स्क्रीनशॉट.

नई दिल्ली/नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर तिरंगे की तस्वीर नहीं लगाने के लिए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता सवाल उठा रहे हैं.

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दो अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर लोगों से अपने सोशल मीडिया अकाउंट की डिस्प्ले तस्वीर (Display Picture – डीपी) के रूप में तिरंगा लगाने का आह्वान किया था.

मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था कि ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ जन आंदोलन में बदल रहा है. उन्होंने लोगों से दो अगस्त से 15 अगस्त के बीच अपने सोशल मीडिया खातों पर प्रोफाइल तस्वीर के रूप में ‘तिरंगा’ लगाने का अनुरोध किया था.

प्रधानमंत्री के अलावा गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के अन्य नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट की डिस्प्ले तस्वीर पर ‘तिरंगा’ लगाकर लोगों से भी ऐसा करने का आग्रह किया था.

इसके बाद बीते तीन अगस्त को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा समेत पार्टी के कई नेताओं ने बीते बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की हाथ में तिरंगा लिए तस्वीर को अपना डिस्प्ले पिक्चर या ‘डीपी’ बना लिया है.

मुख्य विपक्षी दल ने आरएसएस पर निशाना साधते हुए यह सवाल भी किया कि जिन्होंने अपने मुख्यालय पर आजादी के बाद 52 साल तक तिरंगा नहीं फहराया, क्या वे प्रधानमंत्री की बात मानेंगे?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाथ में तिरंगा लिए नेहरू की तस्वीर वाली डीपी लगाने के बाद ट्वीट किया, ‘देश की शान है हमारा तिरंगा, हर हिंदुस्तानी के दिल में है, हमारा तिरंगा.’

पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने इसी तस्वीर की डीपी लगाई और कहा, ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा.’

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी डीपी के तौर पर यही तस्वीर लगाई गई है.

पार्टी ने कहा, ‘तिरंगा हमारे दिल में है, लहू बनकर हमारी रगों में है. 31 दिसंबर, 1929 को पंडित नेहरू ने रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराते हुए कहा था, ‘अब तिरंगा फहरा दिया है, ये झुकना नहीं चाहिए. आइए हम सब देश की अखंड एकता का संदेश देने वाले इस तिरंगे को अपनी पहचान बनाएं.जय हिंद.’

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इसी तस्वीर को बतौर डीपी लगाया है.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘वर्ष 1929 के लाहौर अधिवेशन में रावी नदी के तट पर झंडा फहराते हुए पंडित नेहरू ने कहा था, ‘एक बार फिर आपको याद रखना है कि अब यह झंडा फहरा दिया गया है. जब तक एक भी हिंदुस्तानी मर्द, औरत, बच्चा जिंदा है, यह तिरंगा झुकना नहीं चाहिए.’ देशवासियों ने ऐसा ही किया.’

उन्होंने कहा, ‘हम हाथ में तिरंगा लिए अपने नेता नेहरू की तस्वीर डीपी के तौर पर लगा रहे हैं. लेकिन लगता है, प्रधानमंत्री का संदेश उनके परिवार तक ही नहीं पहुंचा. जिन्होंने 52 वर्षों तक नागपुर में अपने मुख्यालय में झंडा नहीं फहराया, वे क्या प्रधानमंत्री की बात मानेंगे?’

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने आरएसएस और इसके प्रमुख मोहन भागवत के ट्विटर प्रोफाइल के स्क्रीन शॉट साझा करते हुए कहा, ‘संघ वालों, अब तो तिरंगे को अपना लो.’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘आरएसएस ने तिरंगे का हमेशा अपमान किया है. अब तिरंगा लगाने का गुप्त एजेंडा क्या है, वे ही बता सकते हैं. राष्ट्रीय ध्वज देश के स्वाभिमान का प्रतीक है, इसीलिए ध्वज की गरिमा बनाए रखना भी हमारा कर्तव्य है. तिरंगा खादी भंडार से ही खरीदें और नियमों का पालन करके ही फहराएं.’

इन बीच आरएसएस ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर तिरंगे की तस्वीर नहीं लगाने के लिए हो रही आलोचना का बुधवार को जवाब दिया.

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेडकर ने समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा से कहा, ‘ऐसी चीजों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. आरएसएस पहले ही ‘हर घर तिरंगा’ और ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ कार्यक्रमों को समर्थन दे चुका है. संघ ने जुलाई में सरकारी व निजी निकायों और संघ से जुड़े संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में लोगों तथा स्वयंसेवकों के पूर्ण समर्थन और भागीदारी की अपील की थी.’

आंबेडकर ने कहा कि इस तरह के मामलों और कार्यक्रमों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए. आंबेडकर ने किसी का नाम लिए बगैर आरोप लगाया कि जो पार्टी ऐसे सवाल उठा रही है वह देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार है.

सोशल मीडिया पर उठाए जा रहे सवालों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने सीधे कोई जवाब नहीं दिया और कहा, ‘यह एक प्रक्रिया है. इसे हमें देख लेने दीजिए. हम विचार कर रहे हैं कि इसे कैसे मनाया जाए. संघ पहले ही अपना रुख साफ कर चुका है और अमृत ​​महोत्सव के संबंध में केंद्र द्वारा शुरू किए गए सभी कार्यक्रमों का समर्थन करता है.’

देश की आजादी (आजादी का अमृत महोत्सव) के 75वें वर्षगांठ समारोह के हिस्से के रूप में शुरू किया गया ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का उद्देश्य नागरिकों को 13 अगस्त से 15 अगस्त तक तीन दिनों तक अपने घरों में तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित करना है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)