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सुशांत केस में रिपब्लिक और टाइम्स नाउ पर दिखाई गई कुछ ख़बरें ‘मानहानिकारक’ थीं: हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि मीडिया चैनल्स आत्महत्या के मामलों में ख़बरें दिखाते वक्त संयम बरतें क्योंकि मीडिया ट्रायल के कारण न्याय देने में हस्तक्षेप तथा अवरोध उत्पन्न होता है.

पाकिस्तानियों के ख़िलाफ़ हेट स्पीच को लेकर ब्रिटिश नियामक ने रिपब्लिक भारत पर जुर्माना लगाया

ब्रिटिश टीवी नियामक प्राधिकरण ऑफकॉम के अनुसार सितंबर 2019 में रिपब्लिक भारत पर अर्णब गोस्वामी के शो ‘पूछता है भारत’ में पैनलिस्ट द्वारा की गईं टिप्पणियां पाकिस्तानी लोगों के ख़िलाफ़ अपमानजनक और हेट स्पीच से भरी हुई थीं, जिसके चलते चैनल पर क़रीब 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

रिपब्लिक, टाइम्स नाउ सुनिश्चित करें कि बॉलीवुड के ख़िलाफ़ अपमानजनक कंटेट प्रसारित न हो: कोर्ट

सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में फिल्म इंडस्ट्री को बुरा भला कहने को लेकर समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी, उसके प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी, टाइम्स नाउ, उसके प्रधान संपादक राहुल शिवशंकर और समूह संपादक नविका कुमार और अज्ञात प्रतिवादियों के ख़िलाफ़ चार फिल्म एसोसिएशनों और 34 निर्माता संगठनों ने याचिका दाख़िल की है.

सुशांत मामला: हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा- क्या ‘ज़्यादा रिपोर्टिंग’ न्याय के शासन में दखलअंदाज़ी है

सुशांत आत्महत्या मामले में ‘मीडिया ट्रायल’ के आरोपों को लेकर सुनवाई कर रहे बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि यदि अत्यधिक रिपोर्टिंग होती है तो यह आरोपी को लोगों की नज़र में ला सकती है, जिसके चलते वह साक्ष्य मिटा सकता है या भाग सकता है.

सुशांत मामले में रिपब्लिक टीवी को कोर्ट की फटकार, कहा- यदि आप ही जज बन जाएंगे तो हम किसलिए हैं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की, जिनमें सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में टीवी चैनलों को मीडिया ट्रायल करने से रोकने का आग्रह किया गया है.

प्रिंट की तरह टीवी मीडिया को नियमित करने के लिए नियामक संस्था क्यों नहीं है: बॉम्बे हाईकोर्ट

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में मीडिया कवरेज को लेकर दायर हुई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जिस तरीके से प्रिंट मीडिया के लिए भारतीय प्रेस परिषद है, केंद्र सरकार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए इसी तरह की परिषद के बारे में क्यों नहीं सोचती है.

सुशांत सिंह मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछा, जांच पर सलाह देना क्या मीडिया का काम है?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ‘मीडिया ट्रायल’ के ख़िलाफ़ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यर टिप्पणी की. साथ इस मामले पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है.

मीडिया बोल: दलितों से नकली सहानुभूति के बाद ‘षड्यंत्र’ दिखाने लगे!

वीडियो: हाथरस में दलित युवती से कथित गैंगरेप और उसकी मौत के मामले को कुछ टीवी चैनलों ने दो-तीन दिन तक प्रमुखता से उठाया. अब सारे चैनल सत्ताधारियों की भाषा बोलने लगे हैं. घटना को लेकर विपक्ष की सक्रियता को वे किसी कथित षड्यंत्र का हिस्सा बता रहे हैं. इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकारों- शीतला पी. सिंह, बिराज स्वैन, अशोक दास के साथ उर्मिलेश की बातचीत.

‘राष्ट्रविरोधी’ व्यवहार बढ़ाने वाली सामग्री को लेकर टीवी चैनलों को सरकार की दूसरी चेतावनी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 11 दिसंबर को जारी पहले परामर्श की निंदा करते हुए एडिटर्स गिल्ड ने सरकार से इसे वापस लेने का अनुरोध किया था. दूसरा परामर्श जारी होने बाद तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि यह सूचना पहुंचाने वाले को ही सजा देना है.

चैनलों को ‘राष्ट्रविरोधी’ सामग्री के प्रसारण संबंधी दिया परामर्श वापस ले सरकार: एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड का कहना है कि देश में हो रही घटनाओं की ज़िम्मेदार कवरेज के लिए मीडिया की प्रतिबद्धता पर इस तरह के परामर्श से सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए. सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी टीवी चैनलों से कहा था कि वे ऐसी सामग्री दिखाने से परहेज करें जो ‘राष्ट्र विरोधी रवैये’ को बढ़ावा दे सकती है.

पूर्वोत्तर में प्रदर्शन के बीच सरकार ने ‘राष्ट्रविरोधी’ सामग्री को लेकर चैनलों को आगाह किया

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देश में कहा गया है कि सभी टीवी चैनलों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी सामग्री के प्रति खासतौर पर सावधानी बरतें, जिनसे हिंसा को प्रोत्साहन मिलता हो या उससे हिंसा भड़कती हो या कानून-व्यवस्था बनाए रखने में समस्या पैदा होने की आशंका हो या फिर ऐसी घटनाएं, जो राष्ट्रविरोधी व्यवहार को बढ़ावा दे रही हों.

मीडिया बोल, एपिसोड 96: लोकसभा चुनाव में मोदी, मीडिया और मुद्दे

मीडिया बोल की 96वीं कड़ी में उर्मिलेश लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विभिन्न चैनलों को दिए गए साक्षात्कारों पर वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन और स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव से चर्चा कर रहे हैं.

पुण्य प्रसून वाजपेयी को मिला नोटिस जनता के जानने के अधिकार पर एक और गहरा वार है

आखिर क्या बात है कि खेती-किसानी हो, अर्थव्यवस्था के दूसरे हिस्से हों, विश्वविद्यालय हों या स्कूल, हिंदी अख़बारों या चैनलों से हमें न तो सही जानकारी मिलती है, न आलोचनात्मक विश्लेषण? क्यों सारे हिंदी जनसंचार माध्यम सरकार की जय-जयकार में जुट गए हैं?

मैं एंटी-मोदी नहीं हूं, मैं बस उनसे सवाल पूछता हूं: रवीश कुमार

द वायर हिंदी के दो साल पूरे होने पर आयोजित द वायर डायलॉग्स में पत्रकार रवीश कुमार से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.