Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश के मेवला गोपालगढ़ गांव में नीम के पेड़ के नीचे 'इलाज' कराते लोग. (फोटो: इस्मत आरा/द वायर)

कोविड-19: मीडिया से ख़राब स्वास्थ्य सुविधाओं की शिकायत करने पर यूपी के गांववालों पर एफ़आईआर

द वायर ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि गौतमबुद्धनगर ज़िले के मेवला गोपालगढ़ के लोगों का एक नीम के पेड़ के नीचे ‘इलाज’ हो रहा है. ज़िला प्रशासन ने गांव के पूर्व प्रधान समेत दो लोगों पर अफ़वाह फैलाने का आरोप लगाया है. आरोप के अनुसार, दोनों प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और ज़िला प्रशासन की छवि को ख़राब करने के इरादे से अफ़वाह फैलाकर गांववालों को गुमराह कर रहे हैं.

Lucknow: UP Chief Minister Yogi Adityanath talks to the media at Central Hall of Assembly in Lucknow, Wednesday, Dec. 19, 2018. (PTI Photo/Nand Kumar) (PTI12_19_2018_000091)

उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों और गांवों में चिकित्सा व्यवस्था ‘राम भरोसे’: इलाहाबाद हाईकोर्ट

मेरठ ज़िला अस्पताल में भर्ती एक मरीज़ की मौत के बाद शव का निस्तारण ‘अज्ञात’ में कर देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की. अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य में स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं है और अगर महामारी की तीसरी लहर आती है तो उत्तर प्रदेश इसके लिए तैयार है.

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योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कोविड की दूसरी लहर नियंत्रण में है, लेकिन हक़ीक़त कुछ और है

वीडियो: उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस की स्थिति इतनी बुरी है कि भाजपा के एक विधायक ने अपनी ही पार्टी की सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि वह बहुत अधिक कहने से डरते हैं, क्योंकि इससे उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का आरोप लग सकता है. वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि महामारी की दूसरी लहर नियंत्रण में है.

भाजपा विधायक राकेश राठौर. (फोटो: ट्विटर)

यूपी: भाजपा विधायक बोले- राज्य सरकार के ख़िलाफ बोलने पर लगता है राजद्रोह के मुक़दमे का डर

उत्तर प्रदेश के सीतापुर से भाजपा विधायक राकेश राठौर ने यह भी आरोप लगाया कि यूपी सरकार के कामकाज में विधायकों की कोई भूमिका नहीं है और उनके सुझावों पर ध्यान नहीं दिया जाता है.

सोशल मीडिया पर वायरल रामनगर सीट से भाजपा विधायक शरद अवस्थी का पोस्टर.

यूपी: कोविड संकट के बीच क्षेत्र में लगे भाजपा विधायक के लापता होने के पोस्टर

मामला बाराबंकी ज़िले का है, जहां रामनगर विधानसभा क्षेत्र के एक गांव अद्रा में यहां के भाजपा विधायक शरद अवस्थी के लापता होने के पोस्टर लगे हैं. पोस्टर पर पता बताने वाले को हज़ार रुपये देने की बात कहते हुए लिखा है कि अवस्थी चुनाव के बाद से एक बार भी गांव नहीं आए. गांव की समस्याएं लेकर लोग उनके आवास पर जाते हैं तो वे नहीं मिलते.

बक्सर के चौसा गांव में गंगा के घाट पर शव. (फोटो: पीटीआई)

केंद्र का यूपी-बिहार को निर्देश, शवों को गंगा और सहायक नदियों में फेंकने पर रोक लगे

केंद्र ने कहा कि हाल ही में गंगा और इसकी सहायक नदियों में शवों, आंशिक रूप से जले और क्षत-विक्षत शव प्रवाहित करने के कई मामले सामने आए हैं. यह अनुचित और बेहद चिंताजनक है. नमामि गंगे मिशन राज्यों को इस पर रोक लगाने और शवों का सुरक्षित और सम्मानजनक निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश देता है.

पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान एक कर्मचारी. (फोटो: पीटीआई)

यूपी: पंचायत चुनाव ड्यूटी में हुए कोविड संक्रमण से 1600 से ज़्यादा शिक्षकों-कर्मचारियों की जान गई

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने बताया कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी में कोविड संक्रमित होने के बाद 75 ज़िलों के 1,621 शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षा मित्रों व कर्मचारियों ने जान गंवाई है. संघ ने इनके नामों की सूची मुख्यमंत्री को भेजते हुए परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद व आश्रितों को नौकरी देने की मांग की है.

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच गंगा किनारे रेत में दफन शव. (फोटो: पीटीआई)

कोविड-19 के कहर के बीच उत्तर प्रदेश में गंगा किनारे बड़ी संख्या में दफ़न मिले शव: रिपोर्ट

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 900 से अधिक शवों को नदी के किनारे दफनाया गया था. इसी तरह कन्नौज में यह संख्या 350, कानपुर में 400 और गाजीपुर में 280 है.

नीतीश कुमार. (फोटो: पीटीआई)

पटना हाईकोर्ट ने कहा, कोविड-19 से गांवों में हुईं मौतों का आंकड़ा दे बिहार सरकार

हाईकोर्ट ने बिहार की नीतीश कुमार सरकार से ज़िलावार मौतों का आंकड़ा पेश करने को कहा है. साथ ही सरकार से पहली लहर के दौरान गांवों में लौटे लगभग 40 लाख प्रवासियों की स्थिति रिपोर्ट के अलावा बक्सर में गंगा नदी में तैरती पाई गईं संदिग्ध कोरोना संक्रमित लाशों पर जवाब दाख़िल करने को कहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

यूपी: 14 स्वास्थ्य केंद्र प्रमुखों ने प्रशासन पर लगाया उत्पीड़न का आरोप, इस्तीफ़े की पेशकश

उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले का मामला. प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के जिला महासचिव ने कहा कि पिछले साल से चौबीसों घंटे काम करने के बावजूद हमें नियमित रूप से परेशान किया जा रहा है और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जेल भेजने की धमकी भी दी जा रही है. वे हम पर ज़िम्मेदारी से काम नहीं करने का झूठा आरोप लगाकर डांटते हैं.

गोरखपुर के कोविड कंट्रोल रूम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (साभार: सीएमओ)

उत्तर प्रदेश: कोविड की दूसरी लहर और स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझते पूर्वांचल के अस्पताल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह ज़िले गोरखपुर और आस-पास के तीन ज़िलों- देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर में कोरोना की दूसरी तीव्र लहर के बीच स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के बुरे हाल हैं. प्रदेश सरकार स्थिति नियंत्रण में होने की बात कह रही है, लेकिन ख़ुद सरकारी आंकड़े इसके उलट इशारा कर रहे हैं.

संजय सेठ (बाएं) और आईपी सेठ. (फोटो साभार: फेसबुक)

थाई महिला की मौत: भाजपा सांसद की छवि बिगाड़ने के आरोप में सपा नेता सहित तीन के ख़िलाफ़ केस

उत्तर प्रदेश में लखनऊ पुलिस एक थाई युवती की मौत की जांच कर रही है, जिसकी कोरोना संक्रमण से तीन मई को मौत हो गई. इसके बाद सपा नेता आईपी सिंह ने मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि महिला कॉलगर्ल थीं और उन्हें भाजपा सांसद संजय सेठ के बेटे ने लखनऊ बुलाया था.

बक्सर के चौसा गांव में गंगा के घाट पर शव. (फोटो: पीटीआई)

बिहार: विशेषज्ञों ने कहा- कोविड-19 संक्रमित शवों को नदी में बहाना ख़तरनाक

बक्सर ज़िले में चौसा के पास गंगा नदी से मिले दर्जनों संदिग्ध कोविड-19 संक्रमित अज्ञात शवों को पोस्टमार्टम व डीएनए टेस्ट के लिए नमूने लिए जाने के बाद प्रशासन द्वारा दफना दिया गया. कोविड संक्रमण की दूसरी लहर के बढ़ते प्रकोप के चलते विशेषज्ञ शवों को ऐसे नदी में बहाए जाने को बेहद चिंताजनक बता रहे हैं.

पंचायत चुनाव के दौरान लखनऊ के एक केंद्र पर बैलेट ले जाते कर्मचारी. (फोटो: पीटीआई)

कोविड से जान गंवाने वाले चुनाव अधिकारियों को न्यूनतम एक करोड़ रुपये मुआवज़ा मिले: हाईकोर्ट

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान चुनाव अधिकारियों की मौत के मसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की ओर से जानबूझकर उस व्यक्ति को आरटी-पीसीआर जांच के बिना ड्यूटी के लिए बाध्य करने के चलते मुआवज़ा राशि कम से कम एक करोड़ रुपये होनी चाहिए.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

यूपी: ग्रामीण क्षेत्रों में दिखने लगा कोविड का क़हर, कई गांवों में रोज़ उठ रहे हैं अर्थियां-जनाज़े

कोरोना की पहली लहर देश के ग्रामीण क्षेत्रों को बहुत प्रभावित नहीं कर पाई थी, लेकिन दूसरी लहर शोक का सागर लेकर आई है. बीते एक पखवाड़े में पूर्वांचल के गांवों में हर दिन कई लोग बुखार, खांसी व सांस की तकलीफ़ के बाद जान गंवा रहे हैं. जांच के अभाव में इन्हें कोरोना से हुई मौतों के तौर पर दर्ज नहीं किया गया है.