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हैदराबाद एनकाउंटर की एसआईटी जांच के लिए शीर्ष न्यायालय में दो जनहित याचिकाएं दायर

याचिकाओं में महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के चारों आरोपियों के एनकाउंटर में मारे जाने का ग़ैर-न्यायिक हत्या क़रार दिया गया है. साथ ही पुलिस को उकसाने के लिए सपा सांसद जया बच्चन तथा दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग गई है.

हैदराबाद स्थित शादनगर में तैनात पुलिस. ये वही जगह है, जहां महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के चारों आरोपी पुलिस एनकाउंटर में मारे गए. (फोटो: पीटीआई)

हैदराबाद स्थित शादनगर में तैनात पुलिस. ये वही जगह है, जहां महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के चारों आरोपी पुलिस एनकाउंटर में मारे गए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में महिला वेटनरी डॉक्टर के सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए चार लोगों के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के मामले में उच्चतम न्यायालय में शनिवार को दो जनहित याचिकाएं दायर कर एसआईटी जांच और मुआवजे की मांग की गई है.

अधिवक्ता एमएल शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका में मांग की गई कि शीर्ष न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) से मुठभेड़ की जांच करायी जाए.

वहीं वकील जीएस मणि और प्रदीप कुमार यादव द्वारा दायर एक अलग जनहित याचिका में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई.

एमएल शर्मा ने याचिका में इस मुठभेड़ को ‘गैर न्यायिक हत्या’ करार दिया है और इस घटना में संलिप्त पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चलाने का अनुरोध किया है.

वहीं मणि और यादव द्वारा दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि कथित मुठभेड़ ‘फर्जी’ थी और मांग की गई कि इस मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए.

शर्मा ने अपनी याचिका में कहा, ‘यह घटना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार एवं निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार) का स्पष्ट उल्लंघन करती है. दोषी साबित होने तक कोई भी व्यक्ति निर्दोष होता है.’

याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है. शर्मा ने अपनी याचिका में शुक्रवार की मुठभेड़ में मारे गए प्रत्येक आरोपियों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की है.

मणि और यादव ने अपनी याचिका में कहा कि कोई भी निर्दोष महिला से बलात्कार और हत्या में शामिल आरोपियों का समर्थन नहीं करता.

याचिका में कहा गया, ‘हालांकि जांच एजेंसी और अधिकारी यहां तक कि पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी भी कानून को अपने हाथ में ले रहे हैं और फर्जी मुठभेड़ कर बलात्कार के कथित आरोपियों को बिना अदालत के सामने सजा के लिए पेश किए मार रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.’

वहीं शर्मा ने अपनी याचिका में गिरफ्तार आरोपियों की पुलिस हिरासत में गैर न्यायिक हत्या के लिए कथित तौर उकसाने और पुलिस पर दबाव बनाने को लेकर सपा सांसद जया बच्चन तथा दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है.

शर्मा ने याचिका में कहा है कि यह पुलिस हिरासत में की गई हत्या है और इसलिए इसमें संलिप्त सभी पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए तथा सीबीआई द्वारा एसआईटी जांच के बाद कानून के मुताबिक मुकदमा चलाना चाहिए.

बीते 27 नवंबर की रात में हैदराबाद शहर के बाहरी इलाके में सरकारी अस्पताल में कार्यरत 25 वर्षीय पशु चिकित्सक से चार युवकों ने बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी थी. ये चारों युवक लॉरी मजदूर हैं.

इस जघन्य अपराध के सिलसिले में चारों आरोपी युवकों को 29 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था. अगले दिन 30 नवंबर को इन सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

महिला डॉक्टर के लापता होने की एफआईआर दर्ज करने में लापरवाही बरतने के मामले में तीन पुलिसकर्मियों को बर्खास्त भी किया जा चुका है. 27 नवंबर की रात महिला डॉक्टर लापता हो गई थीं और अगली सुबह उनका जला हुआ शव हैदराबाद के शादनगर में एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे मिला था.

आरोप है कि 27 नवंबर की शाम चारों आरोपियों ने जान-बूझकर महिला डॉक्टर की स्कूटी पंक्चर की थी और फिर मदद के बहाने उन्हें सूनसान जगह पर ले जाकर उनके साथ बलात्कार किया और हत्या कर दी. फिर शव को जला दिया.

इसके बाद तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने बीते छह दिसंबर को कहा था कि आरोपी सुबह में पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए.

पुलिस का दावा है कि छह दिसंबर की सुबह आरोपियों को घटनाक्रम की पुनर्रचना के लिए घटनास्थल पर ले जाया गया था. इस दौरान आरोपियों ने पुलिस से हथियार छीने और पुलिस पर गोलियां चलाकर भागने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने जवाब में गोलियां चलाईं और चारों आरोपी मारे गए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)