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असम में सीएबी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन राज्य सरकार के ख़िलाफ़ राजनीतिक साज़िश: सर्बानंद सोनोवाल

नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर असम में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के बीच इंटरनेट पर पाबंदी 16 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है. वहीं मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का कहना है कि हिंसा के पीछे कांग्रेस और कुछ सांप्रदायिक ताकतें हैं.

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल. (फोटो साभार: फेसबुक/Sarbananda Sonowal)

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल. (फोटो साभार: फेसबुक/Sarbananda Sonowal)

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गत दो दिनों से राज्य में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के पीछे विपक्षी कांग्रेस और ‘सांप्रदायिक ताकतों’ का हाथ होने का आरोप लगाते हुए कहा कि संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

सोनोवाल ने कहा कि हिंसा भाजपा नीत असम सरकार के खिलाफ राजनीतिक साजिश का हिस्सा है. इसके साथ ही उन्होंने राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई.

सोनोवाल नेसमाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘कांग्रेस और कुछ सांप्रदायिक ताकतें हिंसा के पीछे है. यहां तक कि कुछ उग्र वामपंथी भी भीड़ में शामिल हैं. यह राजनीतिक साजिश है.’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हिंसा बर्दाश्त नहीं करेगी और जो भी तोड़फोड़ में शामिल होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. नागरिकता (संशोधन) कानून 2019 के खिलाफ राज्य में बीते तीन दिन से जारी हिंसा के संबंध में मुख्यमंत्री ने यह बात कही.

लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने और राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद अब यह विधेयक कानून का स्वरूप ले चुका है. सोनोवाल ने कहा, ‘मैं मूल लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हूं और भरोसा देना चाहता हूं कि उनके हितों को नुकसान नहीं पहुंचेगा.’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को अहिंसक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन प्रदर्शन की आड़ में तोड़फोड़ की घटना करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग गलत सूचना पहुंचा कर लोगों को भ्रमित करने और स्थिति को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. मैं सभी से अपील करता हूं कि वे ऐसा कुछ नहीं करें जिससे शांति भंग हो.’

सोनोवाल ने राज्य के लोगों से कहा कि वे संशोधित नागरिकता कानून से चिंतित नहीं हों क्योंकि लोगों की पारंपरिक संस्कृति, भाषा, राजनीतिक और भूमि अधिकार की रक्षा असम समझौते के खंड-छह के जरिये की जाएगी.

उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश बिपल्व सरमा के नेतृत्व में समिति बनाई गई है जिसे असम के लोगों को संवैधानिक सुरक्षा मुहैया कराने के लिए अनुशंसा करने की जिम्मेदारी दी गई है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि खंड-छह पर गठित समिति की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू किया जाएगा.

संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के मद्देनजर गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, तेजपुर और धेकियाजुली सहित असम के कई शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया है. अब तक प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में दो लोग मारे गए हैं.

राज्य में 16 दिसंबर तक बंद रहेंगी इंटरनेट सेवाएं

असम में सोशल मीडिया के कथित दुरुपयोग को रोकने और शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 16 दिसंबर तक इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहेंगी.

अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं राजनीतिक विभाग) संजय कृष्ण ने बताया कि राज्य में मौजूदा स्थिति के मद्देनजर कानून- व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाओं को निलंबित रखा जाना और 48 घंटे के लिए बढ़ा दिया गया है.

उन्होंने कहा कि इन सेवाओं को निलंबित किया गया है क्योंकि ‘फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर और यू-ट्यूब आदि जैसे सोशल मीडिया मंच का इस्तेमाल अफवाहों को फैलाने और तस्वीरों, वीडियो आदि को प्रसारित करने के लिए किया जा सकता है, जो लोगों उकासाने के साथ ही कानून-व्यवस्था को खराब कर सकती है.’

इंटरनेट सेवाओं को शुरुआत में राज्य के 10 जिलों में बुधवार को 24 घंटे के लिए निलंबित किया गया था तथा फिर इसे समूचे राज्य में और 48 घंटे के लिए बढ़ा दिया गया, यह निलंबन शनिवार दोपहर समाप्त होनी थी.

नागरिकता (संशोधन) कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. असम में हिंसक प्रदर्शन हुए, जिस कारण प्रशासन को कई स्थानों पर कर्फ्यू लगाना पड़ा. इस कानून के चलते पूर्वोत्तर में काफी रोष है क्योंकि लोगों को आशंका है कि यह घुसपैठ की समस्या को बढ़ा सकता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)