भारत

अदालत का दिल्ली पुलिस को निर्देश, दरियागंज में हिरासत में लिए गए लोगों से वकीलों को मिलने दें

अदालत के आदेश के बाद हिरासत में लिए गए आठ नाबालिगों को शनिवार सुबह रिहा किया गया. दरियागंज में शुक्रवार को नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ हुए हिंसक प्रदर्शन के संबंध में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर समेत अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जामिया मिलिया इस्लामिया के बाहर हुआ प्रदर्शन.

New Delhi: Family members of the people arrested for violence during a rally against the Citizenship Amendment Act (CAA), last evening, wait for their release outside Daryaganj police station, in New Delhi, Saturday, Dec. 21, 2019. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI12_21_2019_000012B)

नई दिल्ली के दरियागंज इलाके में शुक्रवार को हुई हिंसा के संबंध में गिरफ्तार किए गए लोगों के परिजन दरियागंज थाने के बाहर जुटे रहे. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के दरियागंज इलाके में बीते शुक्रवार को हुए हिंसक प्रदर्शन के संबंध में हिरासत में लिए गए 40 लोगों से उनके वकीलों से मिलने के आदेश दिल्ली की एक अदालत ने दिया है.

अदालत ने दिल्ली पुलिस को हिरासत में लिए गए लोगों से वकीलों को मिलने देने और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अरुल वर्मा ने दरियागंज पुलिस थाने के प्रभारी को शुक्रवार रात ये निर्देश तब जारी किए जब वकील हिरासत में लिए लोगों से मिलने की अनुमति मांगने के लिए उनके आवास पर पहुंच गए.

अधिवक्ता कृति अवस्थी और आदित्य पुजारी ने मुख्य मेट्रोपोलिन मजिस्ट्रेट को बताया कि थाने में नाबालिगों समेत कुछ अन्य लोगों को हिरासत में रखा गया है और वे इलाके के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट या ड्यूटी मजिस्ट्रेट से नहीं मिल सके.

वर्मा ने थाना प्रभारी को हिरासत में मौजूद घायलों को जरूरी इलाज उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया.

न्यायाधीश ने नाबालिगों को हिरासत में लेने को लेकर दिल्ली पुलिस की यह कहते हुए खिंचाई भी की कि अगर कोई नाबालिग कानून विरोधी गतिविधि में कथित तौर पर लिप्त है, तो भी उसे पहली बार में हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उनके साथ कानून के प्रावधानों के मुताबिक सुलूक किया जाना चाहिए.

न्यायाधीश ने कहा, ‘पुलिस थाने में नाबालिग को हिरासत में लिया जाना कानून का घोर उल्लंघन है.’

बाद में पुलिस ने कहा कि शुक्रवार को हिरासत में लिए गए आठ नाबालिगों को रिहा कर दिया गया.

वकील पुजारी ने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि वकील नए कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने दरियागंज नहीं गए थे.

उन्होंने कहा, ‘हम वहां बस कानूनी मदद उपलब्ध कराने गए थे. नाबालिगों को उनके दस्तावेज जांचने के बाद कल रात छोड़ा गया.’

उन्होंने कहा कि वकील सुबह तक वहां थे और हिरासत में लिए गए लोगों को हर संभव कानूनी मदद उपलब्ध कराई गई.

दरियागंज हिंसा के संबंध में भीम आर्मी प्रमुख समेत 16 लोग गिरफ्तार

पुरानी दिल्ली के दरियागंज में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ एक प्रदर्शन के दौरान हिंसा के संबंध में 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस ने शनिवार को बताया कि शुरुआत में 10 लोगों को पकड़ा गया था लेकिन बाद में छह और लोगों को गिरफ्तार किया गया.

इन 16 लोगों में से भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद भी हैं, जिन्हें दरियागंज इलाके में हुई हिंसा के मामले में शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया. भीम आर्मी ने ही शुक्रवार को जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक मार्च निकालने का आह्वान किया था.

पुलिस ने बताया कि इन पर दंगा करने और पुलिसकर्मियों को ड्यूटी निभाने से रोकने के लिए बल प्रयोग करने का आरोप लगाया गया है.

पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार शाम को सुभाष मार्ग इलाके में खड़ी एक निजी कार को आग लगा दी थी. आग पर फौरन काबू पा लिया गया था.

प्रदर्शन और हिंसा के संबंध में 40 लोगों को हिरासत में लिया गया. इनमें से आठ नाबालिगों को शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया.

पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिए गए इन लोगों में से 10 को गिरफ्तार किया गया है. मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

चंद्रशेखर ने कहा, ‘हमें बलिदान देना होगा ताकि कानून वापस लिया जाए. हम हिंसा का समर्थन नहीं करते. हम शुक्रवार सुबह से मस्जिद के अंदर बैठे थे और हमारे लोग हिंसा में शामिल नहीं थे.’

आजाद ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफा देने तक प्रदर्शन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि वह जल्द ही जामिया मिलिया इस्लामिया में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करेंगे.
आजाद ने कहा कि उन्होंने अपने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की है.

उन्होंने कहा, ‘जो हिंसा कर रहे हैं वे उनके लोग नहीं हैं. ऐतिहासिक जामा मस्जिद पर हमारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा. आंबेडकरवादी हिंसा नहीं करते.’

मालूम हो कि दरियागंज में शुक्रवार को पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें करनी पड़ी. इनमें से कुछ प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे और उन्होंने एक कार को फूंक दिया था. सीमापुरी से भी पथराव की खबरें आई जिनमें अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त को मामूली चोटें आईं.

दरियागंज थाने के बाहर अपनों के इंतजार में परिवार के सदस्य

दरियागंज में हुए हिंसक प्रदर्शन के संबंध में गिरफ्तार किए गए 15 लोगों के परिवार के सदस्य अपने प्रियजनों की एक झलक पाने के लिए शनिवार को थाने के बाहर इंतजार में खड़े रहे.

गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक के परिवार सदस्य ने थाने के बाहर इंतजार करते हुए कहा, ‘मेरा दामाद अपनी पत्नी को यहां दरियागंज के पास छोड़ने आया था लेकिन उसे हिंसा में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया.’

गिरफ्तार किए गए इरफान के ससुर मोहम्मद सलीम ने कहा कि इरफान को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वह नमाज पढ़ने मस्जिद गया था और इसी दौरान नए नागरिकता कानून के खिलाफ शुक्रवार को हो रहा प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया था.

सलीम ने कहा, ‘उन्होंने (पुलिस ने) हमें उससे बात नहीं करने दी और हमें बताया गया कि गिरफ्तार किए गए लोगों को तीस हजारी अदालत ले जाया गया है.’

परिवार के सदस्यों का कहना है कि वह अपने प्रियजनों की खबर पाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. दरियागंज थाने के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कर्मचारियों की भारी तैनाती की गई जहां शनिवार को बाहरी लोगों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया.

मुकीर को अपने पिता को हिरासत में लिए जाने की जानकारी एक टीवी चैनल से मिली. उन्होंने बताया, ‘मेरे 60 वर्षीय पिता इलाके में वेल्डिंग की दुकान में काम करते हैं. हंगामे की खबर सुन कर वह बाहर आए थे. लेकिन मैंने टीवी चैनलों पर दो पुलिसकर्मियों को उन्हें ले जाते हुए देखा.’

हिरासत में लिए गए 40 लोगों में एक छात्र, मोहम्मद चांद भी शामिल हैं और उनके रिश्तेदार थाने के बाहर उसका इंतजार कर रहे थे.

चांद के रिश्तेदार ने कहा, ‘वह यहां नमाज पढ़ने आया था और जो हुआ उसका उससे कोई लेना-देना नहीं है.’

उत्तर-पूर्व दिल्ली में पथराव के आरोप में पांच लोग हिरासत में लिए

उत्तर-पूर्व दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ एक प्रदर्शन के दौरान पथराव करने के आरोप में पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है. इस घटना में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त घायल हो गए थे.

पुलिस ने शनिवार को बताया कि अतिरिक्त डीसीपी, शाहदरा जिला रोहित राजबीर सिंह को इस घटना में मामूली चोटें आईं. अब वह ठीक हैं.

पुलिस ने बताया कि पड़ोसी इलाकों से पांच ‘बाहरी’ लोगों को घटना के संबंध में हिरासत में लिया गया है. उन्होंने बताया कि उन्हें संदेह है कि वे उत्पात मचाने के इरादे से आए थे.

अधिकारियों ने बीते शुक्रवार को बताया था कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के 12 पुलिस थाना क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू है.

बीते 17 दिसंबर को संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान यहां व्यापक पैमाने पर हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं. सीलमपुर और जाफराबाद में हुई 17 दिसंबर को हुई हिंसा के सिलसिले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. इस सिलसिले में दो प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं. आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दंगा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के दो मामले दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा एक तीसरी एफआईआर ब्रजपुरी इलाके में पथराव करने के संबंध में दर्ज की गई है.

जामिया मिलिया इस्लामिया के बाहर प्रदर्शन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर के बाहर शनिवार को प्रदर्शन किया.

विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर छात्राओं ने प्रदर्शन किया और बाद में इसमें पुरुष भी शामिल हो गए. उन्होंने ‘लड़ के लेंगे आजादी’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए.

इस विश्वविद्यालय में बाहर बीते 15 दिसंबर को प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस कार्रवाई में 50 से अधिक छात्रों के घायल होने के बाद विरोध प्रदर्शन का यह छठा दिन है.

दिल्ली के कई इलाकों में भारी सुरक्षा बल तैनात

दिल्ली में नए नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा से प्रभावित हुए इलाकों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी और बताया कि पुरानी दिल्ली और सीमापुरी में सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है.

पुरानी दिल्ली के दरियागंज और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी में शुक्रवार को पथराव तथा हिंसा की घटनाएं देखी गई थी.

शाहदरा जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके में हालात नियंत्रण में हैं. उन्होंने कहा, ‘इलाके में दिल्ली पुलिसकर्मी बड़ी संख्या में मौजूद हैं और वे शुक्रवार शाम से फ्लैग मार्च कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई अप्रिय घटना न घटे.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)