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केंद्र सरकार ने माइकल पात्रा को आरबीआई का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया

भारतीय रिजर्व बैंक के नए डिप्टी गवर्नर के रूप में माइकल देवव्रत पात्रा की नियुक्ति पिछले साल जुलाई में इस्तीफा देने वाले पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के जगह हुई है.

आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के साथ डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा. (फोटो: पीटीआई)

आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के साथ डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने माइकल देवव्रत पात्रा को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है. कार्मिक मंत्रालय ने इस बारे में आदेश जारी किया है.

पात्रा का कार्यकाल तीन साल का होगा. वह रिजर्व बैंक के चौथे डिप्टी गवर्नर होंगे.

गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाले रिजर्व बैंक में अधिकतम चार डिप्टी गवर्नर हो सकते हैं. केंद्रीय बैंक के अन्य तीन डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन, बीपी कानूनगो और एमके जैन हैं.

पात्रा अभी तक कार्यकारी निदेशक के रूप में मौद्रिक नीति विभाग का काम देख रहे थे. समझा जाता है कि पात्रा के पास भी आचार्य की तरह ही मौद्रिक नीति विभाग रहेगा. 59 वर्षीय पात्रा ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है.

विरल वी. आचार्य के इस्तीफे के बाद से यह पद रिक्त था. आचार्य ने पिछले साल जुलाई में इस्तीफा दिया था. दिसंबर 2018 में गवर्नर उर्जित पटेल के बाद आरबीआई से इस्तीफा देने वालों में आचार्य दूसरे बड़े अधिकारी थे.

ऐसा माना गया था कि आचार्य ने अपना इस्तीफा दास के साथ विचारों में मतभेद और कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाए जाने की आशंकाओं के कारण दिया था. जहां दास रेपो रेट में कटौती के साथ आर्थिक वृद्धि पर ध्यान देने की बात कर रहे थे तो वहीं डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने ने खाद्य और ईंधन को छोड़कर उच्च मुद्रास्फीति के मद्देनजर दर में एक और कटौती पर चेतावनी दी थी.

सितंबर 2016 में उर्जित पटेल को गवर्नर के तौर पर पदोन्नत किए जाने के बाद 23 जनवरी 2017 को विरल आचार्य भारतीय रिजर्व बैंक से जुड़े थे. आर्थिक उदारवाद को अपनाने के बाद आचार्य आरबीआई के सबसे युवा डिप्टी गवर्नर बने थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)