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अगर बाबरी मस्जिद का ढांचा नहीं हटाया जाता, तो सच लोगों के सामने न आता: उमा भारती

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनने के ऐलान के बाद भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने कहा कि 9 नवंबर 2019 के फ़ैसले का श्रेय माननीय सुप्रीम कोर्ट को जाता है, लेकिन जिन साक्ष्यों ने वास्तव में इस निर्णय का आधार बनाया, वे अयोध्या में 6 दिसंबर, 1992 को अपनी जान गंवाने वालों के परिणाम थे.

Bhopal: Former Union minister and senior BJP leader Uma Bharti reacts as she addresses a press conference in connection with the formation of a Ram Janmabhoomi trust, in Bhopal, Wednesday, Feb. 5, 2020. (PTI Photo)

उमा भारती. (फोटो: पीटीआई)

भोपाल: केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठित करने के फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने बुधवार को कहा कि अगर बाबरी मस्जिद का ढांचा नहीं गिराया गया होता, तो (मंदिर की) सच्चाई लोगों के सामने नहीं आती.

बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में बताया था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई और यह ट्रस्ट अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के निर्माण और उससे संबंधित विषयों पर निर्णय के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगा.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री पत्रकारों से बात कर रही थीं, जब उनसे बाबरी विध्वंस के बारे में एक सवाल किया गया.

इसके उत्तर में भारती ने कहा, ‘अगर संरचना नहीं हटाई गई होती, तो पुरातत्वविदों की टीम महत्वपूर्ण सबूतों का पता नहीं लगा पाती.’ जब उनसे राम मंदिर निर्माण का श्रेय देने के बारे में सवाल किया गया तब उन्होंने कहा, ‘9 नवंबर 2019 के फैसले का श्रेय माननीय सर्वोच्च न्यायालय को जाता है, लेकिन जिन साक्ष्यों ने वास्तव में निर्णय का आधार बनाया, वे अयोध्या में (6 दिसंबर, 1992 को) अपनी जान गंवाने वालों के परिणाम थे.’

ज्ञात हो कि बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद के दौरान इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) ने करीब 15 साल पहले अयोध्या में विवादित स्थल पर खुदाई की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 को दिए फैसले में कहा था, ‘अयोध्या में विवादित स्थल के नीचे की अंतर्निहित संरचना इस्लामिक संरचना नहीं थी, लेकिन एएसआई ने यह स्थापित नहीं किया है कि क्या मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को ध्वस्त किया गया था.’

भारती कहा, ‘उच्चतम न्यायालय का फैसला था तो सरकार को तीन माह में ट्रस्ट की घोषणा करनी थी. अब मंदिर के निर्माण का रोड मैप और टाइम प्लान ट्रस्ट बनाएगा.’ ट्रस्ट की घोषणा के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट में 15 न्यासी होंगे जिनमें से एक दलित समाज से होगा.

मालूम हो कि नौ नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि जमीन विवाद पर अपना फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा ख़ारिज करते हुए हिंदू पक्ष को जमीन देने को कहा. कोर्ट ने यह भी कहा था कि रामजन्मभूमि न्यास को 2.77 एकड़ ज़मीन का मालिकाना हक़ मिलेगा. वहीं, सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को अयोध्या में ही पांच एकड़ ज़मीन दी जाएगी.

प्रधानमंत्री द्वारा मंदिर ट्रस्ट को मंजूरी मिलने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को दी जाने वाली पांच एकड़ जमीन आवंटित कर दी है. यह जमीन अयोध्‍या से करीब 22 क‍िमी दूर रौनाही में है. यह एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जो अयोध्‍या के मुख्‍य मंदिर क्षेत्र के दायरे में नहीं आता.

‘सक्रिय राजनीति में हूं, 2024 का चुनाव तो लडूंगी’

उमा भारती ने यह भी कहा कि वह राजनीति में सक्रिय हैं और अगला लोकसभा चुनाव लड़ेंगी. वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने वाली भारती ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘मैं सक्रिय राजनीति में हूं. चुनाव तो लडूंगी 2024 का.’

देश में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसका विरोध करने वाले लोगों को यह भी नहीं पता कि यह है क्या. वे बिना पढ़े इसका विरोध कर रहे हैं.

भारती ने सीएए के विरोध के मुद्दे पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का नाम लिए बगैर कहा, ‘टीआरपी में बने रहने के लिए दोनों भाई बहन बोलते रहते हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)