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दिल्लीः आरोग्य सेतु ऐप इंस्टॉल करने की शर्त पर अदालत ने बढ़ाई ज़मानत अवधि

दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने एक महिला पर हमला करने के आरोपी की ज़मानत अवधि बढ़ाते हुए आरोग्य सेतु ऐप इंस्टॉल करने का निर्देश देते हुए कहा कि यह अवधि पूरी होने तक उसे लोकेशन, जीपीएस और ब्लूटूथ को हमेशा ऑन रखना है.

The Aarogya Setu app logo is seen on a mobile phone in this illustration picture taken May 3, 2020. REUTERS/Adnan Abidi/Illustration

(फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने एक विचाराधीन कैदी को इस शर्त पर अंतरिम जमानत दी है कि वह अपने फोन में आरोग्य सेतु ऐप इंस्टॉल करें.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नवीन कुमार ने 16 मई को याचिकाकर्ता की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए 30,000 रुपये के निजी बॉन्ड और समान राशि के मुचलके पर जमानत अवधि को अगले 30 दिनों के लिए बढ़ा दिया. साथ ही आरोग्य सेतु ऐप इनस्टॉल करने का निर्देश दिया.

अदालत ने कहा, ‘याचिकाकर्ता को अपने मोबाइल फोन में आरोग्य सेतु ऐप इंस्टॉल करने का भी निर्देश दिया जाता है और जमानत की अवधि तक लोकेशन, जीपीएस और ब्लूटूथ को हमेशा ऑन रखने को कहा जाता है.’

विचाराधीन कैदी मनीष कुमार पर आईपीसी की धारा 307 और 352 के तहत मामला दर्ज है. उनके वकील पुलकित जैन ने अदालत को बताया कि आरोपी को इससे पहले भी अंतरिम जमानत मिल चुकी है और उन्होंने जमानत अवधि समाप्त होने के बाद आत्मसमर्पण कर दिया था.

उन्होंने बताया कि कुमार के माता-पिता बुजुर्ग हैं और उनकी पत्नी मधुमेह और रक्तचाप से पीड़ित है. वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले व्यक्ति हैं.

2017 में पहाड़गंज पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक 30 साल की शिकायतकर्ता महिला ने कुमार पर चाकू से हमला करने का आरोप लगाया था. कुमार उस स्कूल में सफाई कर्मचारी थे, जहां महिला के दोनों बेटे पढ़ते थे.

महिला ने कथित तौर पर कुमार को लगातार उसके खिलाफ बोलने पर चेतावनी दी थी, जिसके बाद कुमार ने कथित तौर पर उसके बाल पकड़े और उस पर चाकू से कई बार हमला किया. एमएलसी रिपोर्ट के अनुसार महिला की गर्दन पर गहरे जख़्म और कई जगह तेज घाव पाए गए थे.

ज्ञात हो कि देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 ख़िलाफ़ लड़ाई में महत्वपूर्ण कदम बताया था, हालांकि इसको लेकर विशेषज्ञों ने डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं.

इससे पहले अप्रैल में झारखंड हाईकोर्ट ने एक पूर्व सांसद और पांच अन्य लोगों को इस शर्त पर जमानत दी थी कि वे आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करेंगे और पीएम-केयर्स फंड में 35,000 रुपये जमा कराएंगे.

संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लॉकडाउन के बीच सरकारी और दफ्तरों में काम करने वालों के लिए इस ऐप को डाउनलोड करना अनिवार्य किया गया है. साथ ही स्पेशल ट्रेनों में यात्रा करने वालों के लिए भी यह ऐप अनिवार्य है.

इस बीच नोएडा पुलिस ने इस ऐप को डाउनलोड न करने को दंडनीय अपराध बताने की बात कही है.

तीसरे चरण का लॉकडाउन बढ़ने के बाद जारी एक आदेश में पुलिस का कहना था सार्वजनिक स्‍थलाें पर आने वाले प्रत्‍येक नागरिक के लिए अपने स्‍मार्टफोन में आरोग्‍य सेतु ऐप डाउनलोड करना अनिवार्य है.

यदि स्‍मार्टफोन यूजर्स सार्वजनिक स्‍थानों पर जाते हैं और उनके फोन में आरोग्‍य सेतु ऐप डाउनलोड नहीं पाया जाता है तो इसे लॉकडाउन नियमों के उल्‍लंघन के तहत एक दंडनीय अपराध माना जाएगा, जिसके लिए आईपीसी की धारा 188 के तहत 1000 रुपये का जुर्माना या 6 माह तक की जेल हो सकती है.

हालांकि आदेश में यह स्‍पष्‍ट नहीं किया गया था कि जिनके पास स्‍मार्टफोन नहीं है, उनके खिलाफ क्‍या कार्रवाई होगी.