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कोरोना: नर्स की मौत के बाद सहयोगियों का आरोप- इस्तेमाल किए पीपीई किट दोबारा पहनने को मजबूर

दिल्ली में कालरा अस्पताल का मामला. नर्सों का आरोप है कि अगर हम इस्तेमाल किए गए पीपीई किट के दोबारा उपयोग पर आपत्ति जताते हैं तो कहा जाता है कि यहां कोरोना संक्रमित मरीज़ों का इलाज नहीं किया जाता इसलिए यहां संक्रमण का ख़तरा कम है.

(फोटोः रॉयटर्स)

(फोटोः रॉयटर्स)

नई दिल्लीः दिल्ली के एक निजी अस्पताल में कार्यरत एक नर्स की मौत वायरस से संक्रमण के कारण हो गई है. इनकी पहचान 46 वर्षीय अंबिका पीके के रूप में हुई. वह कालरा अस्पताल में कार्यरत थीं.

उनका इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था, जहां उन्होंने 24 मई को दम तोड़ दिया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक नर्स के सहयोगियों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन इस्तेमाल किए हुए पीपीई किट, ग्ल्व्ज और मास्क को दोबारा इस्तेमाल करने का नर्सों पर दबाव बनाता था.

दिल्ली में कोरोना वायरस से किसी नर्स की मौत का यह पहला मामला है.

समाचार पत्र ने अस्पताल के 10 नर्सिंग स्टाफ और अंबिका के बेटे से बात की, जिन्होंने बताया कि ड्यूटी के दौरान नर्स इस्तेमाल किए गए पीपीई किट का दोबारा इस्तेमाल करते हैं.

कालरा अस्पताल की एक वरिष्ठ नर्स कहती हैं, ‘डॉक्टरों को नए पीपीई किट इस्तेमाल के लिए दिए जाते हैं बल्कि नर्सों को इस्तेमाल किए हुए पीपीई किट दोबारा इस्तेमाल के लिए दिए जाते हैं. अगर हम आपत्ति जताते हैं तो हमें बताया जाता है कि यहां कोरोना मरीजों का इलाज नहीं किया जाता इसलिए यहां संक्रमण का खतरा कम है, इसलिए इस्तेमाल की हुई पीपीई किट दोबारा इस्तेमाल की जा सकती है.’

कालरा अस्पताल के मालिक डॉ. आरएन कालरा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अस्पताल के सभी कर्मचारियों को पर्याप्त पीपीई किट और सैनिटाइजर उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

डॉ. कालरा ने कहा, ‘मुझे किसी भी कर्मचारी से एक भी शिकायत नहीं मिली है. अगर एक भी लापरवाही हुई है तो मैं जांच करूंगा और कड़े कदम उठाऊंगा.’

अस्पताल में नर्स प्रभारी एस. विल्सन और अनीता सोनी ने भी इन आरोपों को खारिज किया.

सोनी ने कहा, ‘पीपीई, ग्ल्व्ज और सैनिटाइजर पर्याप्त संख्या में हैं.’

अंबिका की करीबी एक वरिष्ठ नर्स ने कहा कि एक हफ्ते पहले कालरा अस्पताल में अपने आखिरी दिन अंबिका की नए पीपीई किट और मास्क नहीं देने की वजह से नर्सिंग प्रभारी से बहस भी हुई थी.

अंबिका के साथ आईसीयू में काम करने वाली एक और नर्स ने इस बात की पुष्टि की है.

अंबिका के दोस्त और सहयोगी का कहना है, ‘वह 18 मई तक काम कर रही थीं. उन्होंने सुबह की शिफ्ट की और रात की शिफ्ट में काम करने से मना कर दिया, क्योंकि उसकी तबीयत खराब हो रही थी.’

नर्स ने बताया, ‘रात में उन्हें बुखार आया, शरीर में दर्द था और गला भी खराब हो रहा था, इसलिए हमने उन्हें आराम करने की सलाह दी. 19 मई को भी वह बीमार थीं और फिर 21 मई को उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिसके बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. 24 मई की दोपहर को उनकी मौत हो गई.’

अंबिका दिल्ली में अपनी 16 साल की बेटी के साथ रहती थीं. उनके पति मलेशिया में जबकि बेटा केरल में रहता है.

अंबिका कालरा अस्पताल में बीते लगभग दस साल से काम कर रही थीं. उनकी ड्यूटी अस्पताल के नियोनेटल विंग में थी लेकिन हाल ही में उन्हें आईसीयू में तैनात किया गया था.

अंबिका की मौत के बाद सोमवार शाम को केरल से दिल्ली पहुंचे उनके बेटे अखिल (22) ने बताया, ‘मां की तबियत बहुत तेजी से खराब हो रही थी. एक हफ्ते पहले उन्होंने बताया था कि अस्पताल प्रशासन उन्हें इस्तेमाल किए जा चुके पीपीई इस्तेमाल करने को कहता है और मास्क के लिए अलग से पैसे चार्ज करता है. मुझे गुस्सा आया था और मैंने उन्हें घर पर ही रहने को कहा था, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी. वह काम करती रहीं और अब उनकी मौत हो गई.’

केरल के पतनमतिट्टा से सांसद एंटो एंटनी ने नर्स की मौत को लेकर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा था.

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में एंटनी ने अंबिका के परिवार के लिए पचास लाख रुपये के बीमा कवर जारी करने का आग्रह करते हुए कहा था कि निजी अस्पताल एन-95 मास्क सहित किसी भी तरह के निजी सुरक्षात्मक सामान अपने कर्मचारियों को मुहैया नहीं करा रहे हैं.

उन्होंने मुख्यमंत्री केजरीवाल को लिखे पत्र में अंबिका के परिवार के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने का आग्रह करते हुए कहा कि उनकी (अंबिका) असामयिक मौत ने अस्पतालों में काम कर रहीं नर्सों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं.

राज्यसभा सांसद केके रागेश ने भी केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा, ‘ऐसी कई रिपोर्ट हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि दिल्ली के कई अस्पतालों में नर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को बिना पीपीई किट के काम करने को मजबूर किया जा रहा है. अनुरोध है कि इस संबंध में त्वरित कदम उठाकर सुनिश्चित करें.’

कालरा अस्पताल की एक वरिष्ठ नर्स ने कहा कि कई नर्सों ने प्रबंधन द्वारा सभी तरह के सुरक्षात्मक इंतजाम किए जाने तक काम पर नहीं जाने का फैसला किया है.

उन्होंने कहा, ‘आज अंबिका की मौत हुई है कल मैं भी हो सकती हूं. मैं अंबिका की मौत के बाद से अस्पताल नहीं गई हूं. हमारे पड़ोसी भी खुश नहीं हैं कि उनके पड़ोस में कोई नर्स रह रही है.’