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नेपाल के प्रधानमंत्री ने भारत पर लगाया उन्हें हटाने की साज़िश रचने का आरोप

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारतीय मीडिया, बुद्धिजीवियों और सरकार पर उनकी सरकार गिराने की साज़िश का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि अगर आप दिल्ली के मीडिया को सुनेंगे तो आपको संकेत मिल जाएगा.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली. (फोटो: रॉयटर्स)

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली. (फोटो: रॉयटर्स)

काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रविवार को दावा किया कि उनकी सरकार द्वारा देश के राजनीतिक मानचित्र को बदले जाने के बाद उन्हें पद से हटाने की कोशिशें की जा रही हैं.

ओली ने दावा किया, ‘मुझे सत्ता से हटाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन वे कामयाब नहीं होंगी.’ उन्होंने कहा, ‘किसी ने भी खुले तौर पर उनसे इस्तीफा देने को नहीं कहा, लेकिन मैंने अव्यक्त भावों को महसूस किया है.’

ओली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के लोकप्रिय दिवंगत नेता मदन भंडारी की 69वीं जयंती पर प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

प्रधानमंत्री ने दावा किया, ‘दूतावासों और होटलों में अलग-अलग तरह की गतिविधियां हो रही हैं. अगर आप दिल्ली के मीडिया को सुनेंगे तो आपको संकेत मिल जाएगा.’ उन्होंने कहा कि नेपाल के कुछ नेता भी तत्काल उन्हें हटाने के खेल में शामिल हैं.

नेपाल के अखबार द रिपब्लिका ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नेपाल के प्रधानमंत्री ने भारतीय मीडिया, बुद्धिजीवियों और सरकार पर उनकी सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया है.

ओली के हवाले से अखबार ने लिखा, ‘दिल्ली में मीडिया को सुनिए. जो (यह) दिखाता है. यहां के विभिन्न होटलों में गतिविधियों को देखिए. (भारतीय) दूतावास की सक्रियता देखिए, जिससे इसका पता चलता है.’

बता दें कि बीते दिनों प्रधानमंत्री ओली और सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ समेत उनके प्रतिद्वंद्वियों के बीच स्थायी समिति की बैठक में मतभेद खुलकर सामने आ गए थे.

प्रचंड ने ओली पर बिना किसी सलाह के फैसला लेने और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया था. स्थायी समिति की बैठक 30 जून से दोबारा शुरू होगी.

एनसीपी की स्थायी समिति की हालिया बैठक छह महीने के बाद हो रही है. इससे पहले कई बार बैठक टल चुकी थी. मई की शुरुआत में जब स्थायी समिति की बैठक शुरू होने वाली थी, तब स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए ओली ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया था.

उस दौरान नेपाली मीडिया ने कहा था कि पार्टी में प्रचंड के धड़े को लग रहा है कि ओली बैठक में शामिल होने से बच रहे हैं, क्योंकि उनसे या तो प्रधानमंत्री या पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने के लिए कहा जाएगा.

ओली ने रविवार को कहा, ‘अतीत में जब मैंने बीजिंग के साथ व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए तो मेरी अल्पसंख्यक सरकार गिर गई थी, लेकिन इस बार हमारी सरकार के पास पूर्ण बहुमत है, इसलिए कोई भी मुझे हटा नहीं सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी भूमि पर दावा करके कोई गलती नहीं की है जो पिछले 58 वर्षों से हमसे छीन ली गई है. नेपाल का उन इलाकों पर 146 साल तक अधिकार रहा है.’

नेपाल ने संविधान संशोधन के जरिये इस महीने देश के राजनीतिक नक्शे को बदलने की प्रक्रिया पूरी कर ली. इसमें रणनीतिक रूप से अहम, भारत के तीन क्षेत्रों को शामिल किया गया है.

नेपाल संसद ने सर्वसम्मति से देश के नए राजनीतिक मानचित्र को मंजूरी दी है, जिसमें भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को शामिल किया गया है. इसके बाद भारत ने नेपाल द्वारा किए गए क्षेत्रीय दावों के ’कृत्रिम विस्तार’ को ’असमर्थनीय ’ करार दिया है.

नाम न बताने की शर्त पर सत्तारूढ़ एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ओली का संकेत सत्तारूढ़ पार्टी के अंदर उनके विरोधियों के लिए था न कि किसी बाहरी के लिए.

उन्होंने कहा, ‘सत्तारूढ़ पार्टी में मतभेद बढ़ रहे हैं और प्रधानमंत्री को उन्हीं की पार्टी में किनारे किया जा रहा है और उनके ही साथी सरकार के प्रदर्शन की आलोचना कर रहे हैं.’

एनसीपी के एक अन्य नेता ने कहा कि स्थायी समिति की बैठक से पहले दो दिन ओली की गैर हाजिरी उनके और प्रचंड के बीच बढ़ते मतभेद को दिखाती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)