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सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव की जेल में तबियत बिगड़ी, जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ़्तार राजनीतिक कार्यकर्ता और कवि वरवरा राव अगस्त, 2018 से जेल में बंद हैं. राव के परिवार का कहना है कि जेल विभाग उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी मुहैया नहीं करा रहा है.

तेलुगू कवि वरवरा राव. (फोटो: पीटीआई)

तेलुगू कवि वरवरा राव. (फोटो: पीटीआई)

मुंबईः भीमा-कोरेगांव हिंसा के संबंध में मुंबई की एक जेल में बंद 81 वर्षीय राजनीतिक कार्यकर्ता और कवि वरवरा राव की तबियत बिगड़ गई है.

उनके परिवार का कहना है कि जेल विभाग उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी मुहैया नहीं करा रहा है.

वरवरा राव लगभग दो सालों से जेल में बंद हैं.

बीती 28 मई को जेल में बेहोश हो जाने के बाद से उनका स्वास्थ्य लगातार खराब है. उन्हें बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया था लेकिन आनन-फानन में वापस जेल भेज दिया.

वरवरा राव की तबियत बिगड़ने के तुरंत बाद उनके परिवार ने उन्हें जल्द जमानत दिए जाने को लेकर अदालत में याचिका दायर की थी.

परिवार का कहना है कि उनकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उन्हें वापस जेल भेज दिया और उनकी दवाइयां रोक दी गईं.

उनकी बेटी पावना ने द वायर   को बताया कि राव की जेल में पर्याप्त देखभाल नहीं की जा रही.

बीते शनिवार को पावना ने कहा, ‘आज हमें उनका फोन आया था, वह मुश्किल से एक मिनट बोल पाए. उनकी तबियत ठीक नहीं लग रही थी. उनके एक सह-आरोपी, जिन्हें उनकी देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्होंने हमें बताया कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए जल्द से जल्द अस्पताल ले जाने की जरूरत है.’

उन्होंने बताया कि वह (वरवरा) मुश्किल से ही चल पा रहे हैं और अपने बचपन की घटनाओं के बारे में अनायास बात करते रहते हैं.

पावना ने कहा, ‘हमने यहां विशेषज्ञों से बात की है और पता लगाया है कि उनका सोडियम और किएटिनिन स्तर सामान्य से नीचे है और उनके स्वास्थ्य की उचित जांच की जरूरत है.’

उनके परिवार का कहना है कि राव को आयु संबंधी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं.

राव के परिवार और उनके वकीलों का कहना है कि जेल विभाग उनके स्वास्थ्य के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहा है.

मालूम हो कि वरवरा राव के स्वास्थ्य को लेकर पहली सूचना इस महीने की शुरुआत में उस वक्त सामने आई थी, जब वकील सुजैन अब्राहम ने अपने पति और मामले में आरोपी वर्नोन गोंसाल्विस से बात की थी.

उन्होंने कहना था, ‘वर्नोन ने मुझे बताया था कि उन्हें वरवरा राव की देखरेख के लिए उनके साथ अस्पताल ले जाया गया था. राव की तबियत लगातार बिगड़ रही है और एक सह-आरोपी को जेल अस्पताल में उनकी देखरेख के लिए रखा गया है.’

राव की बेटी ने कहा, ‘जब वह मई में बीमार हुई थे, पुलिस जल्दबाजी में उन्हें अस्पताल से वापस ले आई थी और तब से वह जेल अस्पताल में हैं. परिवार को उनके स्वास्थ्य की गंभीरता के बारे में आज ही पता चला है.’

वरवरा राव के वकील निहालसिंह राठौड़ ने राव की ताजा मेडिकल रिपोर्ट के लिए जल्द मुहैया कराने के लिए जेल प्रशासन को ईमेल भेजा है.

राठौड़ ने ईमेल में कहा है, ‘हमें उनकी (राव) स्वास्थ्य स्थिति का सटीक विवरण दें. उन्होंने राव और उनके परिवार के बीच वीडियो कॉल का इंतजाम कराने की भी मांग की है.’

बता दें कि महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव-एलगार परिषद मामले में कथित भूमिका के लिए राव को जून 2018 में गिरफ्तार किया गया था और वह तब से जेल में हैं.

उन्हें एक अन्य आरोपी के साथ पुणे की यरवदा जेल से तलोजा जेल ले जाया गया था. बता दें कि मुंबई की जेलों में लगभग 500 लोग कोरोना संक्रमित हैं जबकि चार की मौत हो चुकी है.

राव को स्वास्थ्य आधार पर जमानत दिए जाने की उनकी याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष लंबित पड़ी है.