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हैदराबाद एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट ने जांच पूरी करने के लिए छह महीने का और समय दिया

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न हुई अपरिहार्य परिस्थितियों की वजह से जांच का काम पूरा नहीं कर सका है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद मुठभेड़ मामले की जांच के लिए गठित जस्टिस सिरपुरकर आयोग का कार्यकाल शुक्रवार को छह महीने के लिये बढ़ा दिया.

हैदराबाद की डॉक्टर के साथ सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार चार आरोपियों की पुलिस मुठभेड़ में मौत की जांच के लिये सुप्रीम कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस वीएस सिरपुरकर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच आयोग का गठन पिछले साल दिसंबर में किया था.

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जांच आयोग के आवेदन पर विचार के बाद उसका कार्यकाल छह महीने बढ़ाने का आदेश पारित किया ताकि वह अपना काम पूरा करके अंतिम रिपोर्ट पेश कर सके.

शीर्ष अदालत द्वारा पिछले साल 12 दिसंबर को गठित इस जांच आयोग के अन्य सदस्यों में बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रेखा सोन्दूरबाल्दोता और सीबीआई के पूर्व निदेशक डीआर कार्तिकेयन शामिल हैं.

इस आयोग को छह महीने में अपनी रिपोर्ट न्यायालय को सौंपनी थी. न्यायालय को शुक्रवार को सूचित किया गया कि कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न हुईं अपरिहार्य परिस्थितियों की वजह से आयोग जांच का काम पूरा नहीं कर सका.

आयोग के प्रतिनिधि ने कहा कि ऑनलाइन सुनवाई और बैठक के विकल्प को तलाशा जा रहा था, लेकिन इस विचार को आयोग द्वारा खारिज कर दिया क्योंकि सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं.

लाइव लॉ के मुताबिक, उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा जांच के दौरान घटनास्थल एवं अन्य संबंधित स्थानों पर जाने की जरूरत होती है, जो वर्चुअल सुनवाई से संभव नहीं है. बिना ऐसी जगहों का दौरान किए और सुनवाई के जांच संभव नहीं है.’

पुलिस ने चारों आरोपियों- मोहम्मद आरिफ, चिंताकुंता चेन्नाकेशवुलु, जोलू शिवा और जोलू नवीन- को पिछले साल नवंबर में पशु चिकित्सक महिला से सामूहक बलात्कार करने और उसकी हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

पिछले साल छह दिसंबर को हैदराबाद में तेलंगाना पुलिस ने एक मुठभेड़ में इन चारों आरोपियों को मार गिराया था.

पुलिस के अनुसार यह घटना सवेरे करीब साढ़े छह बजे उस समय हुई जब वह पशु चिकित्सक के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या की जांच के सिलसिले में इन आरोपियों को घटनास्थल पर ले गयी थी.

ये आरोपी हैदराबाद के निकट उसी राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर पुलिस की गोलियों से मारे गए, जहां 25 वर्षीय पशु चिकित्सक का जला हुआ शव मिला था.

आयोग के सचिव के माध्यम से न्यायालय में दायर आवेदन में कहा गया था कि अपरिहार्य कारणों से जांच आयोग शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित कार्य शर्तो के अनुरूप काम पूरा नहीं कर सका है. इसलिए जांच आयोग का कार्यकाल छह महीने बढ़ाने का अनुरोध किया जा रहा है.

आयोग ने कहा कि उसकी पहली बैठक हैदराबाद में इस साल तीन फरवरी को हुई थी. आयोग को अभी तक इस घटना में शामिल पुलिसकर्मियों और तीन मृतकों के परिजनों सहित विभिन्न व्यक्तियों से 1,365 हलफनामे मिले हैं.

आवेदन में कहा गया है कि इस घटना में शामिल पुलिसकर्मियों के हलफनामे 15 जून को ही मिले हैं. आवेदन में कहा गया है कि उसे मिले 1365 हलफनामों में से लगभग सारे ही तेलुगू भाषा में है और सारे रिकॉर्ड का अंग्रेजी में अनुवाद कराने के बाद उसका सत्यापन कराया गया है.

आयोग के अनुसार उसकी अगली बैठक 23 और 24 मार्च को हैदराबाद में होनी थी लेकिन कोविड-19 की वजह से इन्हें स्थगित कर दिया गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)