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उत्तराखंडः परिजनों का आरोप, समय पर इलाज न मिलने से गर्भवती की मौत

यह घटना अल्मोड़ा ज़िले की है. परिजनों ने बताया कि पांच महीने की गर्भवती आशा देवी टायफायड के चलते अस्पताल में भर्ती थीं, जब सांस लेने में परेशानी के चलते उनके कोरोना टेस्ट की बात कही गई. लेकिन एंटीजन टेस्ट में हुई देरी और ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी के चलते उनकी मौत हो गई.

Almora

नई दिल्लीः उत्तराखंड के अल्मोड़ा में इलाज मिलने में देरी की वजह से पांच महीने की एक गर्भवती महिला की मौत हो गई.

महिला का परिवार का कहना है कि उनके इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर काटे थे पर कोई मदद नहीं मिली.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गर्भवती महिला आशा देवी (24) का शुरुआत में अल्मोड़ा के जिला अस्पताल में टायफाइड का इलाज चल रहा था.

इसके बाद उन्हें सांस लेने में कुछ दिक्कतें आनी लगीं, जिसके बाद उन्हें बेस अस्पताल रेफर किया गया क्योंकि जिला अस्पताल में एंटीजेन टेस्ट किट नहीं थीं.

जिला अस्पताल में आशा देवी के इलाज के लिए पहले ही मना कर दिया गया था क्योंकि अस्पताल को महिला के कोरोना संक्रमित होने का संदेह था.

इसके बाद बेस अस्पताल में महिला की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन तब तक उनकी हालत बहुत खराब हो चुकी थी.

इसके बावजूद अल्मोड़ा के बेस अस्पताल ने उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर तो उपलब्ध कराया लेकिन उन्हें भर्ती करने से इनकार करते हुए कहा कि वहां सिर्फ कोरोना मरीजों का ही इलाज किया जाता है.

इससे हताश और परेशान परिवार वापस जिला अस्पताल लौटा.

आशा देवी के संबंधी सुंदर सिंह बिष्ट का कहना है, ‘बेस अस्पताल ने जो ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया था, वह 20 मिनट के भीतर ही खत्म हो गया था. हमने जिला अस्पताल और उससे सटे जिला महिला अस्पताल से एक और ऑक्सीजन सिलेंडर मांगा लेकिन प्रशासन ने इनकार करते हुए कहा कि उनके पास नहीं है.’

पीड़ित परिवार के सदस्यों का कहना है कि विभिन्न अस्पतालों का चक्कर काटने से महिला की सेहत और बिगड़ गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई.

आशा देवी को 20 अगस्त शाम 7.30 बजे जिला अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था. अल्मोड़ा जिला अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि एक महीने पहले ही एंटीजन टेस्ट किट का ऑर्डर दिया गया था लेकिन अभी तक उसकी डिलीवरी नहीं हुई थी.

वहीं, जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक आरसी पंत का कहना है कि मरीज के परिवार ने ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क नहीं किया था जबकि एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मरीज के परिवार ने कभी उनसे इसके बारे में पूछा ही नहीं था.

अल्मोड़ा जिला अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी कमला सिंह ने कहा, ‘हमारे अस्पताल में सांस की तकलीफ का इलाज नहीं होता क्योंकि हम सिर्फ स्त्री रोग संबंधी समस्याओं का इलाज करते हैं. मृतक के परिजनों ने हमसे ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भी नहीं पूछा था.’

अल्मोड़ा जिले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी सविता ह्यांकि का कहना है कि उन्होंने इन सभी जिला अस्पतालों से ऑडिट रिपोर्ट मंगाई है.

उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों को सलाह दी गई है कि वे यह सुनिश्चित करें कि आपात स्थिति में आए मरीजों का अस्पताल में ही रैपिड एंटीजन टेस्ट किया जाना चाहिए.