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भोपाल गैस त्रासदी में विधवा हुईं महिलाओं की पेंशन फ़िर से शुरू करने की मांग

गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष ने बताया कि केंद्र सरकार के 30 करोड़ रुपये की सहायता से 2011 में 4,998 विधवा महिलाओं के लिए पेंशन शुरू की थी, जो दिसंबर 2019 से नहीं मिल रही है. इस मांग को लेकर कुछ महिलाएं क्रमिक भूख हड़ताल पर हैं.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

भोपाल: भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के हित में काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन ने मध्य प्रदेश सरकार से इस आपदा के कारण विधवा हुईं महिलाओं की पेंशन फिर से शुरू करने की मांग की है. इनमें से कुछ महिलाएं पिछले दो दिन से क्रमिक भूख हड़ताल पर हैं.

गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘हम प्रदेश सरकार से दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदी के कारण विधवा हुईं, 4,998 महिलाओं के लिए एक हजार रुपये की मासिक पेंशन फिर से शुरू करने की मांग करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘इन विधवाओं को दिसंबर 2019 से पेंशन नहीं मिल रहा है. कोविड-19 के इस संकट काल में ये महिलाएं दरिद्रता की स्थिति में रह रही हैं.’

नामदेव ने कहा, ‘भोपाल गैस त्रासदी में अपने पतियों को खोने वालीं ये महिलाएं भोपाल की जीवन ज्योति कॉलोनी में क्रमिक भूख हड़ताल पर हैं. उनकी हड़ताल का आज (बृहस्पतिवार) तीसरा दिन है.’

उन्होंने बताया कि भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग की 2011-12 की रिपोर्ट में इन विधवाओं को आजीवन पेंशन दिए जाने की घोषणा की गई थी.

नामदेव ने बताया कि केंद्र सरकार के 30 करोड़ रुपये की सहायता से 2011 में 4,998 विधवाओं के लिए पेंशन शुरू की गई थी.

नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 सितंबर को गैस पीड़ित विधवा महिलाओं को पुलिस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने से रोक दिया था. वे मुख्यमंत्री से मिलने समन्वय भवन पहुंची थीं, जहां पर राशन पात्रता पर्ची पर कार्यशाला भी था. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आने वाले थे, हालांकि उनके पहुंचने से पहले ही गैस पीड़ितों को पुलिस ने वहां से हटा दिया.

बालकृष्ण नामदेव ने पुलिस पर आरोप लगाया कि वृद्ध महिलाओं के साथ जबर्दस्ती कर अभद्रता की है.

वहीं, टीटी नगर डीएसपी उमेश तिवारी ने उनके आरोपों को झूठा बताया और कहा कि संक्रमण के चलते कार्यशाला में पहुंचने वालों की संख्या पहले से तय थी, इसलिए कुछ लोगों को शांतिपूर्वक हटाया था. किसी के साथ अभद्रता नहीं की गई थी.

हालांकि, बाद में वे गैस राहत मंत्री विश्वास सारंग से मिलीं और गैस पीड़ित विधवा पेंशन फिर से शुरू करने की मांग की. जिस पर मंत्री ने बताया कि वे पेंशन चालू कराने का प्रयास कर रहे हैं.

गौरतलब है कि दिसंबर 1984 में भोपाल के एक कीटनाशक संयंत्र यूनियन कार्बाइड कारखाने से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था जिसमें हजारों लोगों की मौत हो गई थी. यह विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में से एक थी.

इस दुर्घटना के पीड़ित अब तक विभिन्न गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनमें दिल, फेफड़े, सांस संबंधी रोग और किडनी व कैंसर आदि मुख्य बीमारियां हैं.

तब लीक हुई मिथाइल आइसोसाइनाइट (एमआईसी) नामक जहरीली गैस के दुष्प्रभाव गैस पीड़ितों की तीसरी पीढ़ी तक में देखे जा रहे हैं. गैस कांड के कई वर्षों बाद जन्मे लोग भी गंभीर बीमारियों का शिकार हैं.

गैस पीड़ितों के बच्चे अब तक शारीरिक कमियों के साथ पैदा हो रहे हैं, लेकिन अब कोरोना संक्रमण के चलते गैस पीड़ितों के लिए हालात और भी अधिक भयावह हो गए हैं.

बीते जून महीने में एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भोपाल में कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों में 75 प्रतिशत गैस पीड़ित हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)