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रफाल सौदे से कुछ महीने पहले ऑफसेट संबंधी नीति बदले जाने पर कैग ने उठाए सवाल

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने पिछले हफ्ते संसद में रखी गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अप्रैल 2016 में रक्षा ख़रीद नीति में बदलाव किया गया था, जिसके तहत रफाल विमानों का निर्माण करने वाली कंपनी को सितंबर 2016 में अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के समय एक ऑफसेट पार्टनर घोषित करने की आवश्यकता नहीं थी.

Bengaluru: French aircraft Rafale manoeuvres during the inauguration of the 12th edition of AERO India 2019 air show at Yelahanka airbase in Bengaluru, Wednesday, Feb 20, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI2_20_2019_000069B)

रफाल लड़ाकू विमान. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस के बीच 36 रफाल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर हुए समझौते के कुछ महीने पहले अप्रैल में रक्षा खरीद नीति (डीपीपी) में किए गए बदलाव इन विमानों के आपूर्तिकर्ताओं को किसी ऑफसेट पार्टनर की घोषणा न करने की छूट देते हैं.

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने पिछले हफ्ते संसद में रखी गई 2019 की अपनी रिपोर्ट संख्या 20 में कहा है कि 2015 में सरकार द्वारा शुरू की गई ऑफसेट नीति में परिवर्तन 1 अप्रैल, 2016 से पूरी तरफ से शामिल हो गए थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रफाल सौदे के मामले में इस नीति का मतलब है कि विदेशी विमान विक्रेता को सितंबर 2016 में अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के समय एक ऑफसेट पार्टनर घोषित करने की आवश्यकता नहीं थी.

रफाल सौदे पर कैग ने कहा कि ऑफसेट दायित्वों को सितंबर 2019 से शुरू करना था. पहली वार्षिक प्रतिबद्धता इस महीने पूरी हो जानी चाहिए थी और रक्षा मंत्रालय को जानकारी हासिल करनी चाहिए.

2013 की रक्षा खरीद नीति में कहा गया था कि एक तकनीकी ऑफसेट मूल्यांकन समिति (टीओईसी) ऑफसेट दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी ऑफसेट प्रस्तावों की जांच करेगी और ऑफसेट दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए विदेशी विक्रेता को अपने ऑफसेट प्रस्तावों में बदलाव करने की सलाह दी जा सकती है.

नीति में कहा गया है कि टीओईसी से उसके गठन के 4-8 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की उम्मीद की जानी चाहिए.

वाणिज्यिक मूल्यांकन के तहत 2013 की रक्षा खरीद नीति में कहा गया था, ‘वाणिज्यिक ऑफसेट प्रस्ताव में ऑफसेट घटकों के मूल्य को निर्दिष्ट करने वाला विस्तृत प्रस्ताव होगा, जिसमें भारतीय ऑफसेट पार्टनर्स और इस्तेमाल किए जाने वाले ऑफसेट क्रेडिट के प्रस्ताव की विस्तृत जानकारी होगी. टीओईसी की रिपोर्ट को महानिदेशक (अधिग्रहण) द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद मुख्य व्यावसायिक प्रस्ताव के साथ वाणिज्यिक ऑफसेट प्रस्ताव खोला जाएगा. वाणिज्यिक ऑफसेट प्रस्ताव का एल-1 विक्रेता के निर्धारण पर कोई असर नहीं पड़ेगा.’

 

2015 में बदली गई नीति जो 1 अप्रैल 2016 से प्रभाव में आई उसमें वाणिज्यिक मूल्यांकन के हिस्से को नहीं बदला गया. लेकिन उसमें रक्षा ऑफसेट दिशानिर्देश के तहत पैरा 8.2 को बदल दिया गया.

कैग की रिपोर्ट के अनुसार उसमें यह जोड़ दिया गया, ‘यदि विक्रेता टीओईसी के समय इन विवरणों को प्रदान करने में असमर्थ है, तो डीओएफडब्ल्यू (रक्षा ऑफसेट प्रबंधन विंग) को ऑफसेट क्रेडिट मांगने के समय या ऑफसेट दायित्वों के निर्वहन से एक वर्ष पहले उपलब्ध कराया जा सकता है.’

कैग ने कहा, ‘तत्कालीन रक्षा खरीद नीति लागू होने के बावजूद संशोधित रक्षा खरीद नीति सभी ऑफसेट अनुबंधों और चल रहे खरीद मामलों पर तत्काल प्रभाव से लागू थी और रक्षा खरीद नीति 2016 में विधिवत शामिल किया गया था.’

रफाल सौदे पर कैग ने उल्लेख किया कि भारत सरकार ने 23 सितंबर, 2016 को फ्रांस सरकार के साथ 36 रफाल मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) खरीदने के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते (आईजीए) पर हस्ताक्षर किए थे और ऑफसेट दायित्वों पर आपूर्तिकर्ताओं- दासो एविएशन और यूरोप की मिसाइल निर्माता कंपनी एमबीडीए द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे.

ऑफसेट नीति की अपनी रिपोर्ट में कैग ने कहा कि आईजीए के अनुच्छेद 12 में कहा गया था कि फ्रांसीसी पक्ष आपूर्ति प्रोटोकॉल, सिमुलेटर और प्रशिक्षण सहायक रखरखाव के 50 प्रतिशत मूल्य के लिए ऑफसेट के माध्यम से मेक इन इंडिया पहल के कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करेगा.

12 मई 2015 को हुए प्रारंभिक समझौता वार्ता में कहा गया था कि भारत में डिपो स्तर के रखरखाव की सुविधा स्थापित करने और अपनी आवश्यकताओं की आपूर्ति करने और मूल उपकरण निर्माताओं के वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करने के लिए पुर्जों के निर्माण की दिशा में ऑफसेट की शर्तों को निर्देशित किया जाना है.

सीएजी ने कहा कि संबंधित खंडों और मॉडल प्रारूपों में संशोधनों के अनुरूप परिवर्तन नहीं किए गए थे.

रक्षा मंत्रालय ने उसे मई 2019 में इसकी सूचना दी कि ऑफसेट दायित्वों को सितंबर 2019 से शुरू किया जाना था.

कैग ने कहा, ‘चूंकि निर्धारित अवधि खत्म होने वाली है इसलिए ऑफसेट उद्देश्यों का हासिल सुनिश्चित करने और उनकी निगरानी के लिए रक्षा मंत्रालय को ऑफसेट प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए उन उत्पादों या सेवाओं की जानकारी लेने की आवश्यकता है.’

कैग ने कहा कि हालांकि ऑफसेट नीति के लिए रक्षा खरीद नीति में संशोधन किया गया था लेकिन तकनीकी और वाणिज्यिक ऑफर्स की पेशकश करने के लिए मॉडल प्रारूप में अगस्त 2015 में संशोधन नहीं किया गया था, जिसमें भारतीय ऑफसेट पार्टनर की जानकारी, योग्य ऑफसेट उत्पादों और सेवाओं का नाम शामिल होते हैं, को रक्षा ऑफसेट प्रबंधन विंग को अनुबंध की तारीख से 90 दिन के भीतर देना होता है.

कैग ने कहा, ‘लेखा परीक्षा ने कहा कि इस अस्पष्टता ने मंत्रालय को प्रस्तुत किए जाने वाले सटीक विवरणों पर विक्रेताओं के मन में अनिश्चितता पैदा कर दी.’

मई और अक्टूबर 2019 में कैग के पूछने पर रक्षा मंत्रालय ने कहा था अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) विक्रेताओं द्वारा प्रदान किए जाने वाले विवरणों का वर्णन करते हैं और इसलिए प्रारूपों में संशोधन करने की कोई आवश्यकता महसूस नहीं की गई थी.

हालांकि, रक्षा मंत्रालय के जवाब से असंतुष्ट कैग ने कहा कि एफएक्यू एक दस्तावेज है जो ऑफसेट दिशानिर्देशों के लिए सहायक है और इसलिए एफएक्यू इसके परे नहीं जा सकता है.

इससे पहले कैग ने अपनी एक अन्य रिपोर्ट में कहा था कि रफाल विमान बनाने वाली फ्रांस की कंपनी दासो एविएशन और यूरोप की मिसाइल निर्माता कंपनी एमबीडीए ने 36 रफाल जेट की खरीद से संबंधित सौदे के हिस्से के रूप में भारत को उच्च प्रौद्योगिकी की पेशकश के अपने ऑफसेट दायित्वों को अब तक पूरा नहीं किया है.