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दिल्ली सरकार ने एमसीडी से कहा, कर्मचारियों को वेतन नहीं दे सकते तो सरकार को सौंप दें अस्पताल

दिल्ली नगर निगम के कई अस्पतालों में कई महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किए जाने को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. नगर निगम का कहना है कि सरकार उन्हें फंड जारी नहीं कर रही है जबकि राज्य सरकार का कहना है कि वह बकाया दे चुकी है.

हिंदू राव अस्पताल. (फोटो साभार: फेसबुक)

हिंदू राव अस्पताल. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्लीः दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग के अधिकारियों ने तीनों नगरपालिकाओं को पत्र लिखकर कहा है कि अगर वे अपने स्टाफ को वेतन का भुगतान करने में असमर्थ हैं तो वे अपने अस्पतालों को दिल्ली सरकार को सौंपने पर विचार करें.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्र में यह भी कहा गया कि मेडिकल, पैरामेडिकल और अन्य स्टाफ को पीड़ा से बचाने के लिए इस पर विचार करे.

बीते कुछ महीनों से कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं किए जाने को लेकर सरकार और नगरपालिकाओं में टकराव रहा है.

उत्तरी दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल का स्टाफ लंबित वेतन के भुगतान के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहा है. एमसीडी का आरोप है कि दिल्ली सरकार ने अभी तक उन्हें भुगतान नहीं किया है जबकि सरकार ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि वह पहले नगर निगमों को बकाया दे चुका है.

शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त निदेशक द्वारा नगर निगमों के आयुक्तों को लिखे गए पत्र में कहा गया, ‘हिंदू राव अस्पताल, कस्तूरबा अस्पताल और एमसीडी के अन्य अस्पतालों के मेडिकल, पैरामेडिकल और अन्य कामकाजी स्टाफ के बकाया वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान न किए जाने के संबंध में गंभीर चिंताएं उठाई गई हैं. यह भी उल्लेख किया गया कि समय पर वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान करने में असमर्थता से ऐसी स्थिति बनी है, जहां कोरोना मरीजों को उचित इलाज नहीं दिया जा रहा और इलाज के लिए कोरोना मरीजों को हिंदू राव अस्पताल से लोकनारायण अस्पताल शिफ्ट किया जा रहा है.’

अतिरिक्त निदेशक ने पत्र में यह भी लिखा कि बेसिक टैक्स असाइनमेंट की दो किश्तें पहले ही एमसीडी को दी जा चुकी हैं और नगर निगमों के आय के अपने स्रोत होने की वजह से उन्हें वेतन का भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन का इंतजाम सुनिश्चित करना चाहिए.

नॉर्थ एमसीडी के मेयर जयप्रकाश का कहना है कि सरकार फंड जारी नहीं कर दिल्ली में अराजकता का माहौल बनाना चाहती है ताकि आगामी नगर निगम चुनाव में वे इसका लाभ उठा सकें. हालांकि सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है.