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मैन बुकर सम्मान की सूची में अरुंधति की ‘द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ शामिल

1997 में ‘गॉड आॅफ स्मॉल थिंग्स’ के लिए अरुंधति रॉय को मिल चुका है बुकर पुरस्कार.

Ministry of Utmost Happiness Arundhati Roy

अपनी किताब के साथ अरुंधति रॉय. (फोटो साभार: पेंग्विन इंडिया/फेसबुक)

नई दिल्ली: अरुंधति रॉय की नई किताब द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस ने इस साल के मैन बुकर पुरस्कार की सूची में जगह बना ली है.

अपने पहले उपन्यास गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स के बाद 19 साल के लंबे अंतराल पर अरुंधति की यह नई गल्प आधारित किताब आई है. उनकी द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स को वर्ष 1997 में बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

अरुंधति के अलावा इस पुरस्कार के लिए शॉटलिस्ट होने वाले दूसरे लेखकों में मोहसीन हामिद भी शामिल हैं. उन्हें उनकी किताब एक्ज़िट वेस्ट के लिए इसमें शामिल किया गया है. यह किताब शरणार्थियों पर आधारित एक प्रेम कहानी है.

अन्य लेखकों में अमेरिका से एमिली फ्रीडलंड अपनी किताब हिस्ट्री ऑफ वूल्व्स, आयरलैंड से माइक मैककॉरमैक अपनी किताब सोलर बोन्स, पॉल आॅस्टर अपनी किताब 4321, ब्रिटेन से जॉन मैकग्रेगर रिजव्यॉर 13, ब्रिटेन से फिओना मोज़ली एलमेट, अमेरिका से जॉर्ज सांडर्स अपनी पहली किताब लिंकन इन द बार्डो, ब्रिटेन-पाकिस्तान से कामिला शम्सी होम फायर और अमेरिका से कॉलसन ह्वाइटहेड अपनी किताब द अंडरग्राउंड रेलरोड के साथ शामिल हैं.

वर्ष 1969 में शुरू हुए मैन बुकर प्राइस फॉर फिक्शन पुरस्कार किसी भी देश के लेखक की अंग्रेज़ी में लिखी और ब्रिटेन में प्रकाशित किताब को दिया जाता है, जिसमें पुरस्कार पाने वाले को पुरस्कार स्वरूप किताब की एक विशेष प्रति के साथ 50,000 पाउंड की नकद राशि दी जाती है.

अंतिम सूची में सूचीबद्ध छह किताबों की घोषणा 13 सितबंर को होगी और वर्ष 2017 के विजेता की घोषणा 17 अक्टूबर को होगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)