भारत

राज्यसभा में सांसद बोले, डॉक्टर्स और केमिस्ट मिलकर ग़रीबों को लूट रहे हैं

सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा, अमेरिकी कंपनियों के दबाव में सरकार ने 127 दवाओं को नॉन-जेनेरिक कर दिया और उनको देश को लूटने की आज़ादी दे दी.

indian-parliament

संसद में गुरुवार को जेनेरिक और नॉन जेनरिक दवाओं का मुद्दा उठा. संसद सदस्यों ने महंगे इलाज तक जनता की पहुंच न होने को लेकर चिंता जताई और कहा कि डॉक्टर और केमिस्ट मिलकर ग़रीबों को लूट रहे हैं.

सपा के सांसद नरेश अग्रवाल ने राज्यसभा में कहा, दवाओं को दो श्रेणियों, जेनेरिक और नॉन-जेनेरिक में बांट दिया गया है. नॉन-जेनेरिक दवाओं और जेनेरिक दवाओं के दाम में इतना बड़ा अंतर है कि आम गरीब उसमें पिसता चला जा रहा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि अभी सरकार ने अमेरिका के दबाव में 127 दवाओं को जेनेरिक से नॉन-जेनेरिक कर दिया. मेरा आरोप है कि अमेरिका की बड़ी-बड़ी दवा कंपनियों के दबाव में सरकार ने 127 दवाओं को नॉन-जेनेरिक कर दिया और उनको देश को लूटने की आज़ादी दे दी. आज लूटने की आज़ादी है. आम आदमी को पता नहीं होता कि यह जेनेरिक क्या है और नॉन जेनेरिक क्या है. सरकार जेनेरिक औषधालयों की मदद नहीं कर रही है, इसके कारण जेनिरक दवाएं नहीं बनतीं और किसी भी अस्पताल में जेनेरिक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं. यह एक तरीके से लूट है.

उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुस्तान में स्वास्थ्य के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है, हमारे बजट का सिर्फ दो परसेंट हेल्थ पर खर्च हो रहा है, जबकि विश्व के और देश स्वास्थ्य बजट का सारा खर्च वहन करते हैं. हमारे देश में अगर गरीब बीमार पड़ जाए तो उसका घर बिक जाएगा, खेत बिक जाएगा, गरीब बिल्कुल गरीब हो जाएगा.

उन्होंने कहा, मुझे खुशी है कि सरकार ने एक सकुर्लर जारी किया, जिसमें कहा गया कि गया कि डॉक्टर्स को जेनेरिक दवाएं लिखनी पड़ेंगी. अगर हम जेनेरिक और नॉन-जेनेरिक के मूल्यों के बीच अंतर को देखें, तो जेनेरिक एक रुपया प्रति टेबलेट है, तो नॉन-जेनेरिक 70-75 रुपये प्रति टेबलेट है. डॉक्टर्स और केमिस्ट, ये दोनों मिलकर गरीबों को लूट रहे हैं.

उन्होंने कहा, आप किसी नर्सिंग होम में जाइए, किसी डॉक्टर को दिखाइए तो वह इतनी जांच लिख देगा कि आपका घर बिकने भर का पैसा जांच में चला जाएगा. इस देश में नामी हॉस्पिटल हैं. आप वहां चले जाएं तो न्यूनतम एक लाख बिल बनेगा.

सरकार पर कुछ न करने का आरोप लगाते हुए नरेश अग्रवाल ने कहा, जेनेरिक और नॉन जेनेरिक दवाई में वही कम्पोजीशन और वही साल्ट है लेकिन उनके दाम में इतना बड़ा अंतर है लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही है. एम्स के बाहर जाइए तो डॉक्टर जेनेरिक दवा देता है लेकिन केमिस्ट कह देगा कि इस नाम की दवा नहीं है, फिर वह आपको जेनेरिक दवा दे देगा.

संसद में उठाए गए इस विषय का सांसद रामगोपाल यादव, अली अनवर अंसारी, आलोक तिवारी आदि ने समर्थन किया.

लेकिन स्वास्थ्य मंत्री इस दौरान सदन में उपस्थित नहीं थे. इस मुद्दे पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, सारा देश इस बात से सहमत है कि जो गरीब और जरूरतमंद हैं उन्हें सस्ती दवाएं मिलनी चाहिए. जो आपकी चिंता है, वह हमारी भी चिंता है. हमारी सरकार ने गांवों में जन औषधि केंद्र खोले हैं, उन्हें और आगे बढ़ाया जाएगा और संबंधित मंत्री को इस विषय से अवगत कराया जाएगा.