भारत

केरल की तरह हिंसा भाजपा शासित राज्यों में होती तो क्या होता: अरुण जेटली

केरल में हिंसा का हल खोजने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई गई. जेटली मारे गए आरएसएस कार्यकर्ता के परिजनों से मिले.

DGiBhviVYAA5Bt-

(फोटो: अरुण जेटली/ट्विटर)

नई दिल्ली: केरल में लगातार हो रही राजनीतिक हिंसा के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली रविवार को मारे गए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यकर्ता के परिजनों से मिलने केरल पहुंचे. इस बीच, इस हिंसा का हल खोजने के लिए राज्य में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है.

केरल पहुंचे जेटली ने कहा, कल्पना कीजिए कि जिस तरह राजनीतिक हिंसा केरल में हो रही है, वैसी भाजपा शासित राज्यों में होती तो क्या होता? यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाएं रोकी जाएं और सख्त कार्रवाई की जाए.

29 जुलाई को आरएसएस कार्यकर्ता राजेश की हत्या कर दी गई थी. भाजपा और संघ का आरोप है कि यह हत्याएं वामदलों के कार्यकर्ताओं ने की है. अरुण जेटली राजेश के परिवार से मिलने रविवार को तिरुअनंतपुरम पहुंचे. जेटली राजेश के परिजनों के अलावा कुछ और कार्यकर्ताओं के परिजनों से मिलेंगे, जिनकी राजनीतिक हिंसा में हत्या की जा चुकी है.

तिरुवनंपुरम में समाचार एजेंसी भाषा ने खबर दी है कि केरल में पिछले कुछ समय में राजनीतिक हिंसा में मारे गए 21 लोगों के रिश्तेदारों ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के केरल दौरे से पहले सुबह राजभवन के बाहर सत्याग्रह आरंभ किया है.

प्रदर्शन में शामिल लोगों के किसी न किसी परिजन की राज्य के किसी न किसी हिस्से में हत्या की गई. वे मांग कर रहे हैं कि जेटली उनके घरों का भी दौरा करें और उनके दुख भी सुनें.

गौरतलब है कि जेटली आरएसएस के उस स्वयंसेवक के घर जा रहे हैं जिसकी हाल ही में हत्या कर दी गई थी. प्रदर्शन का आयोजन करने वाले माकपा की तिरुवनंतपुरम की जिला इकाई के सचिव अन्नावूर नागप्पन ने कहा कि भाजपा एवं आरएसएस दुष्प्रचार कर रहे हैं कि माकपा हिंसा में शामिल है.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि बीते 29 जुलाई को हुई आरएसएस पदाधिकारी राजेश की हत्या में माकपा का हाथ नहीं है. नागप्पन ने कहा, उनकी हत्या से हमें बहुत दुख हुआ है. उन्होंने कहा कि जेटली को उन माकपा कार्यकर्ताओं के घर भी जाना चाहिए जिनकी हत्या की गई है.

एनडीटीवी की एक खबर के मुताबिक, ‘केरल के कन्नूर में लगातार जारी राजनैतिक हिंसा के हल ढूंढने की एक पहल की गई है. इस मुद्दे पर रविवार को एक ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई है जिसमें सीपीएम स्टेट सचिव कोडियारी बालाकृष्णन और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष कुमानाम राजशेखरन भी शामिल होंगे.’

इस ख़बर में लिखा गया है कि क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर नज़र डालें तो 1991 से लेकर अब तक सिर्फ़ कन्नूर में 45 सीपीएम और 44 आरएसएस-बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी हैं.’

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले ने आरोप लगाया था कि केरल में आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या के लिए सीपीएम ज़िम्मेदार है. उनका कहना था कि पिछले 13 महीने में 14 आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्याएं की गई हैं, जिसके पीछे सीपीएम का हाथ है.

लोकसभा में भी उठा था हत्याओं का मुद्दा

लोकसभा में दो अगस्त को भाजपा सदस्यों ने केरल में वाममोर्चा के शासन के दौरान आरएसएस, भाजपा सदस्यों पर हमले और कथित राजनीतिक हत्याओं का मुद्दा उठाया था. भाजपा सदस्यों ने कहा था कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन किसी पार्टी के कार्यकर्ता को मारना अत्यंत निंदनीय है और इसकी एनआईए या सीबीआई से जांच करायी जानी चाहिए.

भाजपा के प्रह्लाद जोशी और मीनाक्षी लेखी ने सदन में यह विषय उठाया तो माकपा समेत वामदलों के सदस्यों ने इसका विरोध किया था.

प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि जब से वहां वाम सरकार आई है हर महीने राजनीतिक हत्याएं हो रही हैं. पिछले 17 महीने में 17 हत्यांए हुई हैं. इसमें आरएसएस, भाजपा कार्यकर्ताओं को मारा गया है, दो कांग्रेस के कार्यकर्ता भी मारे गए. केरल के वर्तमान मुख्यमंत्री के क्षेत्र में अधिकांश हमले हुए. तिरुवनंतपुरम में भाजपा मुख्यालय पर हमला किया गया.

माकपा का पलटवार

संसद में भाजपा द्वारा यह मसला उठाए जाने के अगले दिन माकपा ने पलटवार किया. इस विषय पर दोनों सदनों के सदस्यों के बीच नोंकझोंक होने पर स्पीकर ने सदन की बैठक कुछ देर के लिए स्थगित कर दी थी.

माकपा केपी करुणाकरण ने प्रह्लाद जोशी और मीनाक्षी लेखी के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा था कि भाजपा के सदस्यों ने केरल के मुख्यमंत्री और पार्टी के राज्य सचिव पर हिंसा के संबंध में आरोप लगाए. सदन में उन लोगों का नाम लेकर आरोप लगाना, जो अपना पक्ष रखने नहीं आ सकते, गलत है. उन्होंने कहा, केरल में मुख्यमंत्री ने भाजपा-आरएसएस और माकपा के नेताओं की बैठक बुलाकर बात की. हम हमेशा शांति चाहते हैं.

दोनों तरफ से खेला जा रहा हिंसा का खेल

केरल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता खूनी खेल में तब्दील हो गई है. एनडीटीवी पर रवीश कुमार लिखते हैं, ‘केरल की राजनीतिक हिंसा पर हिन्दी प्रदेशों में सूचना कम है, धारणा ज़्यादा है. केरल की हिंसा पर रिसर्च करते हुए लगा कि स्थिति वाकई भयावह है. हिंसा के इस खेल में दोनों ही पक्ष शिकार भी हैं और शिकारी भी यानी दोनों ही पक्षों के लोग मारे भी जा रहे हैं और एक दूसरे को मार भी रहे हैं. राजनीति तराजू लेकर नहीं की जाती है. इसलिए एक पक्ष खुद को ही पीड़ित के रूप में पेश करता है, अपने ख़िलाफ़ हुई हिंसा को उभारता है मगर आपको कभी नहीं बताता कि उसकी तरफ से भी हिंसा का यह खेल खेला गया है.’

उन्होंने यह भी लिखा, ‘1960 के दशक से कन्नूर ज़िला राजनीतिक हिंसा की गिरफ्त में हैं. अब यह हिंसा केरल के कई ज़िलों में फैल चुकी है. एक आंकड़े के अनुसार कन्नूर की हिंसा में अब तक 210 लोग मारे गए हैं. दोनों तरफ से. एक आंकड़े के अनुसार कन्नूर की हिंसा में अब तक 300 से अधिक लोग मारे गए हैं. दोनों तरफ से.’

केरल की हिंसा पर पत्रकार रुचि चतुर्वेदी के हवाले से रवीश ने लिखा है कि कन्नूर में 1983 से सितंबर 2009 के बीच 91 लोग मारे गए. संघ बीजेपी के 31 समर्थक मारे गए हैं. सीपीएम के 33 समर्थक मारे गए हैं. क्या सिर्फ सीपीएम और संघ के समर्थक ही मारे गए?

14 मामलों में कांग्रेस के कार्यकर्ता भी मारे गए. ज़्यादातर में आरोप सीपीएम पर लगा. बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी एक दूसरे की हत्या के आरोप में शामिल हैं.

इंडियन मुस्लिम लीग और सीपीएम कार्यकर्ताओं ने भी एक दूसरे को मारा है. आरोप सीपीएम और संघ पर लगा लेकिन मारे गए कार्यकर्ताओं में सीपीएम, संघ, बीजेपी, कांग्रेस और इंडियन मुस्लिम लीग के शामिल हैं. केरल पुलिस के अनुसार 2000 से 2006 के बीच कन्नूर में 69 राजनीतिक हत्याएं हुई हैं. 31 संघ परिवार के मारे गए हैं और 30 सीपीएम के. पांच इंडियन मुस्लिम लीग के और 3 नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट के.

  • amit singh

    Mr jetley needs to be reminded that he is not in opposition. Being defence minister it is his responsibility to prvent each and every murder in country. Why is he crying hoarse on the issue?? Do whatever is required instead of cribbing we need to see action not alleged victimhood.