भारत

किसान आंदोलन: किसान नेता के बाद कार्यकर्ता और टीवी पत्रकार को मिला एनआईए का समन

पिछले कुछ दिनों में एनआईए द्वारा कम से कम 13 लोगों को नोटिस भेजा गया है. इनमें किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा, पंजाबी अभिनेता और कार्यकर्ता दीप सिंधू, पंजाब के एक टीवी पत्रकार जसबीर सिंह और कार्यकर्ता गुरप्रीत सिंह शामिल हैं.

दिल्ली के सिंघू बॉर्डर में प्रदर्शन कर रहे किसान. (फोटो: पीटीआई)

दिल्ली के सिंघु बॉर्डर में प्रदर्शन कर रहे किसान. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे देशव्यापी किसान आंदोलन के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने प्रदर्शनों में शामिल एवं इसका समर्थन कर रहे लोगों को नोटिस भेजा है.

एनआईए से नोटिस प्राप्त करने वालों में किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा, पंजाबी अभिनेता एवं कार्यकर्ता दीप सिंधू, पंजाब स्थित टीवी चैनल के पत्रकार जसबीर सिंह और कार्यकर्ता गुरप्रीत सिंह शामिल हैं.

जांच एजेंसी ने प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के खिलाफ हाल ही में दायर की गई एफआईआर के संबंध में ये नोटिस भेजा है.

कृषि कानूनों पर सरकार के साथ बातचीत में शामिल लोक भलाई इंसाफ वेल्फेयर सोसायटी के अध्यक्ष बलदेव सिंह सिरसा को 17 जनवरी को एनआईआए हेडक्वार्टर बुलाया गया है.

ऐसा करके किसानों के आंदोलन को प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए सिरसा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जरिये किसानों के आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की, अब वे एनआईए का इस्तेमाल कर रहे हैं.’

‘सिख फॉर जस्टिस’ एक अमेरिकी-आधारित खालिस्तानी समूह है, जो पंजाब को भारत से अलग करने का समर्थन करता है. साल 2019 में इसे गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था. समूह का गठन 2007 में गुरपतवंत सिंह पन्नून द्वारा किया गया था.


Farmer union leaders receiv… by The Wire

एनआईए ने आरोप लगाया है कि सिख फॉर जस्टिस, बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान टाइगर फोर्स और खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स सहित अन्य खालिस्तानी संगठनों ने लोगों में असंतोष पैदा करने के लिए भय और अराजकता का माहौल बनाने की साजिश रची और उन्हें भारत सरकार के खिलाफ विद्रोह करने के लिए उकसाया.

एनआईए की एफआईआर में यह भी दावा किया गया है कि नामित आतंकवादियों द्वारा ऐसे अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें अमेरिका स्थित गुरपतवंत सिंह पन्नून, यूके स्थित परमजीत सिंह पम्मा और कनाडा के हरदीप सिंह निज्जर शामिल हैं.

इस बीच पंजाबी अभिनेता और गायक दीप सिंधू को भी रविवार को एनआईए के सामने पेश होने के लिए कहा गया है. इससे पहले, उनके भाई और कम से कम एक दर्जन अन्य लोगों ने इसी मामले में एनआईए से नोटिस प्राप्त किए थे.

ब्रिटेन स्थित पंजाब टाइम्स के एक पत्रकार बलविंदर पाल सिंह को भी 17 जनवरी को एनआईए मुख्यालय में पेश होने के लिए इसी तरह का नोटिस दिया गया है.

हालांकि द वायर  से बात करते हुए सिंह ने दावा किया कि अक्टूबर में कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद से वह बिस्तर पर हैं और किसी भी संगठन या प्रतिबंधित संगठन के समर्थन को खारिज किया.

मुक्तसर के पत्रकार जसवीर सिंह, जो केटीवी यूके से जुड़े हैं, को भी 18 जनवरी को एनआईए के सामने पेश होने के लिए कहा गया है.

जसवीर ने द वायर  को बताया, ‘मैं किसी भी तरह से एसएफजे (सिख फॉर जस्टिस) से जुड़ा नहीं हूं. मुझे इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि एसएफजे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. मैं सिंघु बॉर्डर छोड़ कर अपने परिवार के पास आ गया था.’

उन्होंने कहा, ‘कुछ दिन पहले ही मेरी पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया है. मैं अभी अस्पताल में हूं.’

पिछले कुछ दिनों में एनआईए द्वारा कम से कम 13 लोगों को नोटिस भेजा गया है. किसान नेताओं द्वारा बीते शुक्रवार को सरकार के साथ बातचीत के दौरान भी यह मामला उठाया गया था.

एनआईए की ओर से नोटिस प्राप्त करने वाले अन्य लोगों में होशियारपुर के करनैल सिंह और नोबेलजीत सिंह, बरनाला के सुरिंदर सिंह ठीकरीवाल, इंद्रपाल सिंह जज और लुधियाना के परदीप सिंह, मोगा के पलविंदर सिंह, परमजीत सिंह और अमृतसर के रणजीत सिंह शामिल हैं.

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने आरोप लगाया है कि एनआईए जैसी एजेंसियों के मार्फत नोटिस भिजवाकर किसान नेताओं को डराने का प्रयास किया जा रहा है.

उन्होंने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह नये कृषि कानूनों को लेकर वार्ता में गंभीर नहीं रही है और कहा कि सरकार केवल ‘किसानों को थकाने का प्रयास कर रही है.’

बादल ने कहा, ‘साथ ही वह (केंद्र सरकार) एनआईए जैसी विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से नोटिस भिजवाकर किसानों को डराने का प्रयास कर रही है. किसान देश विरोधी नहीं हैं. हम इसकी (नोटिस भेजे जाने की) निंदा करते हैं.’’

अकाली दल के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह किसानों को ‘नक्सली और खालिस्तानी’ बताकर उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रही है.

उन्होंने कहा कि शिअद हमेशा किसानों के साथ खड़ा रहा है और जब सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी, तो उसने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) छोड़ दिया.

बादल ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह लोगों से किए गए वादों को पूरा करने में विफल रहे हैं.