एशियन गेम्स ट्रायल: विनेश ने हार के बाद ‘पक्षपात’ का आरोप लगाया, बोलीं- और मेहनत करूंगी

भारतीय कुश्ती महासंघ ने विनेश फोगाट को 50 किलोग्राम वर्ग तक ही सीमित रखने के अपने शुरुआती फैसले को खिलाड़ी के विरोध के बाद बदल दिया. डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह ने मामले में हस्तक्षेप किया, जिसके बाद विनेश को 53 किलो वर्ग के ट्रायल्स में उतरने की अनुमति दी गई. हार के बाद विनेश ने कहा कि ज़ाहिर तौर पर पक्षपात हुआ है. उन्होंने जोड़ा, 'मैं इतनी ट्रेनिंग करूं कि ये जो बेईमानी कर रहे हैं, उनकी चीटिंग भी पीछे रह जाए; और ये चाहकर भी मुझे न हरा पाएं.'

पहलवान विनेश फोगाट. (फोटो साभार: फेसबुक/@phogat.vinesh)

नई दिल्ली: भारत की दो बार की विश्व पदक विजेता पहलवान विनेश फोगाट ने तमाम विवादों के बाद अखिरकार शनिवार (30 मई) को एशियन गेम्स ट्रायल्स के पहले राउंड में 7-1 की शानदार जीत के साथ अपने सफ़र की शुरुआत की. हालांकि, वे अपने तीसरे मुकाबले में हार के बाद बाहर हो गई हैं.

इस संबंध में समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में विनेश ने कहा, ‘ज़ाहिर तौर पर पक्षपात हुआ है, लेकिन मैं चाहती हूं कि मैं इतनी ट्रेनिंग करूं कि ये जो चीटिंग कर रहे हैं, उनकी चीटिंग भी पीछे रह जाए. और ये चाहकर भी मुझे न हरा पाएं.’

विनेश ने कहा, ‘मैं कोशिश करूंगी कि ट्रेनिंग बढ़ाऊं, और अच्छा करूं.’

विनेश ने बातचीत के दौरान सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट को धन्यवाद कहा, जिनकी मंजूरी के बाद विनेश इस प्रतियोगिता में भाग ले पाई थीं.

ट्रायल्स के संबंध में  उन्होंने कहा, ‘मुझे कुछ बोलने की ज़रूरत नहीं है, सबने देखा है कितने फ़ेयर तरीक़े से (ट्रायल्स) हुए हैं. पूरा देश जानता है.’

मालूम हो कि पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद विनेश पहली बार किसी प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिता में भाग ले रही थीं. हालांकि, इसे लेकर भी उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा था. पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से चयन में भाग लेने की मिली मंजूरी के बाद शनिवार को ट्रायल मैच के शुरू होने के ठीक पहले भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) द्वारा उनकी भागीदारी को सिर्फ 50 किलोग्राम वर्ग तक ही सीमित कर दिया गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, शनिवार सुबह आधिकारिक वेट-इन (किसी मुकाबले या मैच से पहले खिलाड़ियों का आधिकारिक तौर पर वजन करना) के दौरान उन्हें बताया गया कि उन्हें केवल 50 किलोग्राम वर्ग में ही हिस्सा लेने की अनुमति दी जाएगी, क्योंकि पेरिस ओलंपिक सहित अपने पिछले चार अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में उन्होंने इसी भार वर्ग में हिस्सा लिया था.

विनेश ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया और कुश्ती महासंघ पर भेदभाव का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी पसंद के वज़न वर्ग में खेलने का मौका नहीं दिया जा रहा है.

इसके बाद डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह ने हस्तक्षेप किया और बाद में फैसले को बदलते हुए विनेश को 53 किलो वर्ग के ट्रायल्स में उतरने की अनुमति दी गई.

संजय सिंह ने कहा, ‘हमने उन्हें (विनेश) इजाज़त दी क्योंकि उन्होंने आरोप लगाए और अधिकारियों से उनका वज़न मापने के लिए कहा. हम किसी के साथ भेदभाव नहीं करना चाहते. उन्होंने यह नहीं बताया कि किस वर्ग में खेलना चाहती है, फिर भी हमने उन्हें मौका दिया.’

इस दौरान संजय सिंह के अलावा भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अदिति चौहान और भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के एमएम सोमैया ट्रायल के दौरान इंदिरा गांधी स्टेडियम में पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद थे.

शुक्रवार को इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने विनेश को राहत देते हुए एशियन गेम्स ट्रायल में भाग लेने की मंज़ूरी दे दी थी. फैसले के दौरान अदालत ने कहा था कि विनेश एक शानदार एथलीट हैं और उन्‍होंने देश को गौरवान्वित किया है.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इसमें दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें विनेश फोगाट को ट्रायल में शामिल होने को लेकर मंजूरी दी गई थी.

मालूम हो कि 22 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने डब्ल्यूएफआई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि ऐसा लगता है कि महासंघ का रवैया बदले की भावना से प्रेरित है.

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि विनेश के ट्रायल्स की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की देखरेख में प्रतियोगिता आयोजित की जाए.

गौरतलब है कि विनेश फोगाट इस साल डब्ल्यूएफआई द्वारा तय किए गए नए पात्रता मानदंडों के कारण चयन प्रक्रिया से बाहर हो गई थीं. यह नीति महासंघ की पूर्व व्यवस्था से अलग थी.

इसके अलावा 9 मई को डब्ल्यूएफआई ने उन्हें एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था, जिसके तहत 26 जून तक उन्हें डब्ल्यूएफआई के किसी भी आयोजन में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था.

उल्लेखनीय है कि 3 मई को विनेश फोगाट ने कहा था कि वह उन छह महिला पहलवानों में शामिल थीं जिन्होंने डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे.