अब सीयूईटी-यूजी में ‘तकनीकी दिक़्क़त’ के चलते परीक्षा में देरी, छात्र-अभिभावक परेशान; विपक्ष ने उठाए सवाल

नीट पेपर लीक विवाद के बाद अब सीयूईटी-यूजी 2026 परीक्षा शनिवार को कुछ सेंटर्स पर देर से शुरू हुई, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं. इस दौरान सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों के कई वीडियो भी सामने आए, जिसमें बताया गया कि परीक्षा की पहली पाली के दौरान विभिन्न राज्यों के कुछ केंद्रों पर 2 घंटे से अधिक की देरी हुई, जिससे छात्र परेशान हुए. कई केंद्रों पर छात्रों ने नारेबाजी भी की.

नीट परीक्षा रद्द होने के बाद एनटीए के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक का विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि शनिवार (30 मई) को स्नातक कॉलेज में दाख़िले के लिए होने वाली कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट-अंडरग्रेजुएट (सीयूईटी-यूजी) 2026 परीक्षा में देरी का नया मामला सामने आया गया, जिसके बाद एक बार फिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और केंद्र सरकार सवालों के घेरे में है.

शनिवार को कई अभिभावकों में सोशल मीडिया पर परीक्षा में हुई देरी के बारे में लिखा था, जिसके बाद इस संबंध में एनटीए ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से परीक्षा में देरी हुई, जिसका समाधान कर दिया गया है.

एनटीए ने छात्रों और अभिभावकों को हुई परेशानी के लिए खेद व्यक्त करते हुए लिखा, ‘टीसीएस ने बताया कि उनकी तरफ़ से तकनीकी दिक़्क़त आई थी, जिसकी वजह से सीयूईटी-यूजी 2026 के कुछ सेंटरों पर शनिवार को देर से शुरू हुई. अब समस्या का समाधान हो गया है और परीक्षा में जितनी देर हुई है, उतना ही अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, ताकि सभी छात्रों को बराबर मौक़ा मिले.’

उल्लेखनीय है कि शनिवार को कुछ सेंटर्स पर ‘तकनीकी दिक़्क़त’ की वजह से हुई देर के चलते छात्रों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कई जगह अव्यवस्था भी देखी गई.

इस दौरान सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों के कई वीडियो भी सामने आए, जिसमें बताया गया कि परीक्षा की पहली पाली के दौरान विभिन्न राज्यों के कुछ केंद्रों पर 2 घंटे से अधिक की देरी हुई, जिससे छात्र परेशान हो गए. वहीं, दूसरी पाली का समय भी बदला गया. कई जगह छात्रों ने परेशान होकर शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की.

इस ताजा घटनाक्रम के बाद परीक्षाओं में  लगातार हो रही गड़बड़ियों को लेकर राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल समेत कई विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है.

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि जिस पीढ़ी का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है, वह हिसाब करेगी.

राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘नीट, सीबीएसई, एसएससी और आज सीयूईटी… चार परीक्षाएं, एक करोड़ बच्चे और एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘दावे विश्वगुरु के, मगर देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते. मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है. जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं, वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी.’

परीक्षा देरी से शुरू होने पर दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक कथित सेंटर का वीडियो पोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा, ‘देश को एक शिक्षित प्रधानमंत्री की ज़रूरत है.’

इस मामले पर दिल्ली की पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी कहा, ‘पहले नीट, फिर सीबीएसई, अब सीयूईटी… आज सीयूईटी ‘तकनीकी समस्या’ की वजह से देरी से शुरू हुई.’

उन्होंने परीक्षा में देरी के लिए जारी किया गया नोटिस साझा करते हुए लिखा, ‘लाखों छात्रों को पूरे भारत में आज परीक्षा देनी थी और घंटों इंतज़ार करने के बाद सभी सेंटरों के बाहर ऐसे नोटिस लगाए गए हैं.’

राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने एक्स पर लिखा, ‘नीट के बाद सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं और अब सीयूईटी परीक्षा. ये शासन व्यवस्था में कमी की वजह से है. नरेंद्र मोदी की सरकार शासन नहीं चला सकती.’

उन्होंने आगे कहा कि चुनावों और मोदी व्यक्तित्व के महिमामंडन में बहुत अधिक व्यस्त रहने के कारण सिस्टम के भीतर एक ढांचागत अक्षमता समा गई है. आरएसएस की संस्थागत औसत दर्जे की कार्यप्रणाली 21वीं सदी की जटिल प्रशासनिक ज़रूरतों का सामना करने में सक्षम नहीं है.

इस संबंध में एक पोस्ट साझा करते हुए राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने लिखा कि किसी भी लोकतंत्र में एकमात्र वैध प्रश्न यह नहीं है कि अगला दोष किसे दिया जाए, बल्कि यह है कि यह सब कहां ख़त्म होना चाहिए?

वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लिखा, ‘भाजपाई भ्रष्टाचार के रूप अनेक, भ्रष्ट परीक्षा प्रणाली उनमें से एक. परीक्षार्थी कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!’

गौरतलब है कि इससे पहले तीन मई को हुई नीट की परीक्षा को पेपर लीक की शिकायतों के बाद रद्द कर दिया गया था. अब दोबारा नीट परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी.

इसे लेकर विपक्षी दलों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की काफ़ी आलोचना की और उनके इस्तीफ़े की मांग की है.