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एल्गार परिषद: वरवरा राव के वकील ने कहा- जेल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी

तेलुगू कवि एवं कार्यकर्ता वरवरा राव के वकील का कहना है कि राव को किडनी समेत कई बीमारियां हैं. उन्हें एल्गार परिषद मामले में 28 अगस्त 2018 को गिरफ़्तार किया गया था.

तेलुगू कवि वरवरा राव. (फोटो: पीटीआई)

तेलुगू कवि वरवरा राव. (फोटो: पीटीआई)

मुंबईः एल्गार परिषद मामले में आरोपी 81 वर्षीय कवि एवं कार्यकर्ता वरवरा राव के वकील ने मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट से उनके मुवक्किल को चिकित्सकीय आधार पर जमानत देने का अनुरोध किया है.

उनके वकील ने कहा कि तलोजा जेल के अस्पताल में उनके इलाज के लिहाज से बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं.

वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस मनीष पिताले की पीठ को बताया कि तलोजा जेल में राव की उचित चिकित्सकीय देखभाल के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं हैं, जहां वह विचाराधीन कैदी के रूप में बंद हैं.

राव इस समय मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती हैं.

ग्रोवर ने अदालत से कहा कि अस्पताल से प्राप्त राव की ताजा मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका रक्तचाप और धड़कन स्थिर हैं और वह छुट्टी देने के लिहाज से ठीक हैं.

ग्रोवर ने कहा, ‘हालांकि छुट्टी देने और तलोजा जेल भेजे जाने के बाद राव को लगातार निगरानी और चिकित्सा देखभाल की जरूरत होगी, जिसके लिए तलोजा जेल अस्पताल में सुविधाएं अपर्याप्त होंगी.’

उन्होंने कहा कि राव को किडनी समेत कई बीमारियां हैं, जिसके लिए उन्हें तलोजा जेल अस्पताल में भर्ती किए जाते समय एक दिन में करीब 20 अलग-अलग दवाइयां दी जा रही थीं.

उन्होंने कहा कि ये दवाएं हृदय रोगों, रक्तचाप और स्मृतिक्षय जैसे लक्षणों वाली बीमारी के लिए हैं.

ग्रोवर ने अदालत से अनुरोध किया कि राव को उनके परिवार के साथ रहने दिया जाए, ताकि वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएं और मामले में मुकदमे का सामना करने में समर्थ हों.

उन्होंने कहा कि राव को जब पिछले साल मुंबई में सरकारी जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था तो उनकी उचित देखभाल नहीं की गई और इसलिए उन्हें नानावती अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.

हालांकि पीठ ने टोकते हुए कहा कि सरकारी जेजे अस्पताल और सेंट जॉर्ज अस्पताल सबसे अच्छे अस्पतालों में गिने जाते हैं, जिनमें सक्षम चिकित्सक हैं.

पीठ ने कहा, ‘हालांकि कोविड-19 महामारी के बीच रोगियों की अधिक तादाद की वजह से अस्पताल में काम का बोझ अधिक हो गया होगा.’

वहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पेश वकील अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल अनिल सिंह ने पीठ से कहा कि राव इतने स्वस्थ हो गए हैं कि उन्हें निजी अस्पताल से छुट्टी दी जा सके और तलोजा जेल भेजा जा सके.

बीते जुलाई महीने में वरवरा राव के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी. तब उन्हें सेंट जॉर्ज अस्पताल शिफ्ट किया गया है. हालांकि उनमें कोई लक्षण नहीं थे.

साल 2018 में एल्गार परिषद मामले में पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए कई कार्यकर्ताओं और वकीलों में राव भी शामिल हैं. इस मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को स्थानांतरित कर दिया गया है, जिसने बाद में और अधिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को गिरफ्तार किया था.

यह मामला 1 जनवरी, 2018 को पुणे के निकट भीमा कोरेगांव की जंग की 200वीं वर्षगांठ के जश्न के बाद हिंसा भड़कने से संबंधित है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे.

उसके एक दिन पहले 31 दिसंबर 2017 को पुणे के ऐतिहासिक शनिवारवाड़ा में एल्गार परिषद का सम्मेलन आयोजित किया गया था. आरोप है कि 31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद समूह के सदस्यों ने भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके अगले दिन हिंसा भड़क गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)