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दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालने की किसानों को दी अनुमति

यह अनुमति इस शर्त के साथ मिली है कि किसान गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी के राजपथ पर निकलने वाली आधिकारिक परेड के बाद ही वे ट्रैक्टर परेड निकालेंगे. परेड में दो लाख से अधिक ट्रैक्टरों के भाग लेने की उम्मीद है.

Farmers conduct tractor rally rehearsal ahead of Republic Day, in support of the farmers protests against the three farm laws, in Gurugram, Wednesday, January 20, 2021. Photo: PTI

(फाइल फोटोः पीटीआई)

नई दिल्ली/गाजियाबाद: कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर करीब दो महीनों से प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ लगातार चल रही बातचीत के बाद दिल्ली पुलिस ने शनिवार को आखिरकार राष्ट्रीय राजधानी में गणतंत्र दिवस पर प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड निकालने की मंजूरी दे दी है.

हालांकि किसानों को यह अनुमति इस शर्त के साथ मिली है कि किसान गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी के राजपथ पर निकलने वाली आधिकारिक परेड के बाद ही वे ट्रैक्टर परेड निकालेंगे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की सभी तीन सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसान मध्य दिल्ली की ओर नहीं बढ़ेंगे बल्कि इसके आसपास के क्षेत्रों में ही रहेंगे.

हजारों किसान 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. ज्यादातर किसान पंजाब और हरियाणा से हैं. किसानों की मांग है कि तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए.

प्रदर्शनकारी किसान यूनियनों के अनुसार, परेड में दो लाख से अधिक ट्रैक्टरों के भाग लेने की उम्मीद है और रैली के करीब पांच मार्ग होंगे. दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड समाप्त होने के बाद दोपहर 12 बजे ट्रैक्टर परेड निकाली जाएगी.

प्रदर्शनकारी किसान यूनियनों के मुख्य संगठन संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने किसानों को गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में ट्रैक्टर परेड निकालने की अनुमति दे दी है.

कोहाड़ ने यूनियनों और पुलिस के बीच हुई बैठक में शिरकत करने के बाद कहा कि ट्रैक्टर परेड दिल्ली के गाजीपुर, सिंघू और टिकरी बॉर्डरों से शुरू होंगी.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पंजाब जम्हूरी किसान सभा के महासचिव कुलवंत सिंह संधू ने कहा कि ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए पंजाब और हरियाणा से हजारों की संख्या में ट्रैक्टर लेकर किसान दिल्ली की तरफ बढ़ेंगे.

उन्होंने कहा, ‘तकरीबन 2.5 से तीन लाख ट्रैक्टर प्रदर्शन स्थलों से सड़क पर निकलेंगे. हमारी ओर से प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगा.’

भारतीय किसान मंच की पंजाब इकाई के अध्यक्ष बूटा सिंह शादीपुर ने कहा, ‘हम अभी भी परेड निकालने के मार्ग और स्थानों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं. 26 जनवरी को वाहन चुनिंदा स्थानों तक जाएंगे और वापस सीमा (प्रदर्शन स्थल) पर पहुंच जाएंगे.’

इससे पहले ट्रैक्टर परेड नहीं निकालने को लेकर दिल्ली पुलिस की किसानों के साथ कई दौर की बातचीत हुई थी. बाद में इसे दिल्ली के बाहर निकालने का भी प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई थी.

बीते 21 जनवरी को किसान संगठनों ने तीन कृषि कानूनों के क्रियान्वयन को डेढ़ साल तक स्थगित रखने और समाधान का रास्ता निकालने के लिए एक समिति के गठन संबंधी केंद्र सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शनिवार को चार घंटे तक बातचीत चली थी, जिसके बाद किसानों और दिल्ली, उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच 26 जनवरी को यह रैली निकालने को लेकर सहमति बन सकी.

पुलिस सूत्रों ने बताया, ‘किसानों से एक प्रार्थना पत्र लिखित में मांगा गया है, जिसमें परेड के रूट, ट्रैक्टर और किसानों की संख्या तथा समय की जानकारी देने को कहा गया है. लेकिन उन्होंने कहा है कि ट्रैक्टर परेड केवल सीमाओं के आसपास के क्षेत्रों में ही होगी, जहां किसान विरोध कर रहे हैं. उन्हें परेड के दौरान चिकित्सा सहायता और सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है.’

सूत्रों के अनुसार, सिंघू बॉर्डर की ओर से परेड करीब 100 किलोमीटर तक हो सकती है, जबकि ट्रैक्टर टिकरी सीमा के आसपास 125 किलोमीटर का सफर तय करेंगे.

पुलिस के अनुसार, गणतंत्र दिवस को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी और आसपास के इलाकों में पांच स्तरीय सुरक्षा तैनात की है. 40 हजार से अधिक पुलिस, आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान सिंघू, टिकरी और गाजीपुर सीमा पर तैनात रहेंगे.

समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार, किसान नेताओं ने कहा कि पांच मार्गों को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है और हर मार्ग पर किसान ट्रैक्टरों से 100 किलोमीटर तक का सफर तय करेंगे.

किसान नेता दर्शन पाल ने कहा दिल्ली की सीमाओं पर लगाए गए अवरोधकों को 26 जनवरी को हटा दिया जाएगा और किसान राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करके ट्रैक्टर रैलियां निकालेंगे.

एक और किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने पत्रकारों को बताया कि चूंकि हजारों किसान इस परेड में हिस्सा लेंगे, लिहाजा इसका कोई एक मार्ग नहीं रहेगा.

इस बीच, यूनियनों ने 26 जनवरी की परेड के मद्देजनर एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है.

एक किसान नेता ने कहा कि टैक्टरों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 2,500 स्वयंसेवक तैनात रहेंगे. भीड़ के अनुसार उनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है.

पंजाब के किसान यूनियनों की बैठक की अध्यक्षता करने वाले कीर्ति किसान यूनियन के अध्यक्ष निर्भयी सिंह धुडिके ने कहा कि राज्य से एक लाख से अधिक ट्रैक्टर आने की उम्मीद है.

किसान नेताओं के अनुसार, ट्रैक्टर परेड के बाद ही कृषि कानूनों के खिलाफ आगे की रणनीति बनाई जाएगी.

हरियाणा किसान यूनियन के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा, ‘आंदोलन शुरू होने के समय से ही हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है. हम इन तीन कृषि कानूनों को पूरी रद्द करने की मांग करते हैं. इससे कम पर कोई बात नहीं बनेगी.’

परेड में उत्तर प्रदेश और से लगभग 25,000 ट्रैक्टर हिस्सा लेंगे: राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने शनिवार को कहा कि 26 जनवरी को दिल्ली में होने वाली ट्रैक्टर परेड में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से लगभग 25,000 ट्रैक्टर हिस्सा लेंगे.

उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों प्रदेशों से निकलकर यूपी गेट की ओर बढ़ रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को विभिन्न जिलों में पुलिस द्वारा रोका गया, लेकिन किसान हर कीमत पर यहां पहुंचेंगे.

टिकैत ने एक बयान में कहा, ‘करीब 25,000 ट्रैक्टर यहां पहुंचेंगे और गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर परेड निकाली जाएगी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के साथ ही अन्य जिलों में भी किसान ट्रैक्टर रैली निकालेंगे.’

बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा, ‘किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को इसमें हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होगी.’

मालूम हो कि केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए कृषि से संबंधित तीन विधेयकों– किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020, किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 और आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020- के विरोध में पिछले डेढ़ महीने से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

केंद्र सरकार इन कानूनों को कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार के रूप में पेश कर रही है. हालांकि, प्रदर्शनकारी किसानों ने यह आशंका व्यक्त की है कि नए कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुरक्षा और मंडी प्रणाली को खत्म करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे तथा उन्हें बड़े कॉरपोरेट की दया पर छोड़ देंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)