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बिहार: कोविड-19 का पहला टीका लगने के कुछ दिन बाद मेडिकल छात्र की संक्रमण से मौत

पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल का मामला. 23 वर्षीय छात्र की मौत एक मार्च को हुई. उन्हें फरवरी के पहले हफ्ते में कोवैक्सीन टीका लगा था, इसके बाद 25 फरवरी को वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

पटना: बिहार की राजधानी पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के अंतिम वर्ष के एक मेडिकल छात्र की कोविड-19 टीका लेने के बावजूद कोरोना वायरस संक्रमण से मौत होने का मामला सामने आया है.

एनडीटीवी के मुताबिक, 23 साल के शुभेंदु सुमन की मौत बेगूसराय में हुई. 22 दिन पहले फरवरी के पहले हफ्ते में उन्हें भारत बायोटेक की कौवैक्सीन की पहली खुराक दी गई थी.

25 फरवरी को वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. इसके बाद वह अपने घर बेगूसराय चले गए, जहां 27 फरवरी को उन्हें एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन बीते एक मार्च की शाम उनका निधन हो गया.

बेगूसराय के सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार झा ने मौत की पुष्टि करते हुए कहा, ‘छात्र पटना में 25 फरवरी को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था. बेगूसराय में 27 फरवरी को उसे भरित जीवन नाम के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हुई. उन्हें कोई और बीमारी थी, इस बारे में मैं नहीं जानता क्योंकि अभी शव का पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया है.’

एनडीटीवी के मुताबिक इस अस्पताल में अब तक 15 छात्र पॉजिटिव पाए जा चुके हैं और इनमें से बहुत सारे छात्रों ने कुछ हफ्ते पहले ही वैक्सीन की पहली खुराक ली थी.

वहीं, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने छात्र की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि ऐसी किसी एक घटना से भी बहुत दुख होता है, खासकर किसी चिकित्सक की मौत पर.

पांडेय ने कहा, ‘यह समझना होगा कि टीका लगने के छह सप्ताह के बाद एंटीबॉडी बनती है. दूसरी खुराक के 14 दिन बाद से एंटीबॉडी बनती है. ऐसे में यह गलत है कि पहली खुराक के बाद से ही एंटीबॉडी बनने लगेगी.’

साथ ही उन्होंने कहा कि दूसरे पॉजिटिव छात्रों पर अस्पताल प्रशासन का नजर है और उनका ध्यान रखा जा रहा है.

लाइव हिंदुस्तान के मुताबिक, शुभेंद्रु सुमन नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के ओल्ड बॉयज हॉस्टल में रहते थे. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हीरा लाल महतो ने बताया कि कॉलेज में टर्मिनल परीक्षा चल रही है. ऐसे में विद्यार्थियों से कहा गया है कि जो घर जाना चाहते हैं, वह परीक्षा छोड़कर घर जा सकते हैं.

डॉ. महतो ने कहा, ‘हमारे कुछ छात्रों में कोविड-19 के लक्षण मिले हैं. मैंने तकरीबन 700 छात्र-छात्राओं से आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने को कहा है. जिनमें लक्षण मिले हैं, मैंने उन्हें अस्पताल में भर्ती होने को कहा है, लेकिन वे आरटी-पीसीआर टेस्ट की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं.’

उन्होंने बताया कि मामला सामने आने के बाद उन्होंने पूरे अस्पताल और हॉस्टल को सैनिटाइज करने का आदेश दिया है.