दुनिया

विश्व में कुल बाल वधुओं में से आधी भारत सहित पांच देशों में: यूनिसेफ

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी यूनिसेफ के रिपोर्ट के मुताबिक, दशक के अंत से पहले एक करोड़ अतिरिक्त बाल विवाह हो सकते हैं. इससे इस प्रथा को कम करने की वर्षों की प्रगति को ख़तरा उत्पन्न हो सकता है. दुनिया में आज अनुमानित 65 करोड़ लड़कियों और महिलाओं का विवाह बचपन में हुआ है. इनमें से आधी संख्या बांग्लादेश, ब्राज़ील, इथियोपिया, भारत और नाइज़ीरिया में है.

(इलस्ट्रेशन: एलीज़ा बख़्त/द वायर)

(इलस्ट्रेशन: एलीज़ा बख़्त/द वायर)

नई दिल्ली: दुनिया की कुल बाल वधुओं में से लगभग आधी भारत सहित पांच देशों में हैं. यह जानकारी यूनिसेफ द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जारी एक नए विश्लेषण से सामने आई है.

‘कोविड-19: अ थ्रेट टू प्रोग्रेस अगेंस्ट चाइल्ड मैरिज’ विषयक विश्लेषण के अनुसार, दशक के अंत से पहले एक करोड़ अतिरिक्त बाल विवाह हो सकते हैं. इससे इस प्रथा को कम करने की वर्षों की प्रगति को खतरा उत्पन्न हो सकता है.

विश्लेषण के अनुसार, दुनिया भर में आज अनुमानित 65 करोड़ लड़कियों और महिलाओं का विवाह बचपन में हुआ है. इनमें से आधी संख्या बांग्लादेश, ब्राजील, इथियोपिया, भारत और नाइजीरिया में है.

इसमें कहा गया है कि कोविड-19 के प्रभावों को समाप्त करने और सतत विकास लक्ष्यों में निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक 2030 तक इस प्रथा को समाप्त करने के लिए प्रगति में काफी तेजी होनी चाहिए.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कहा कि बाल विवाह का स्तर उप-सहारा अफ्रीका में सबसे अधिक था, जहां 35 प्रतिशत किशोरियों का विवाह 18 से कम आयु में किया गया. उसके बाद दक्षिण एशिया है, जहां लगभग 30 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 से कम उम्र में हुई.

लातिन अमेरिका और कैरेबियन देशों में लगभग 24 प्रतिशत बाल विवाह हुए और मध्य पूर्व तथा उत्तरी अफ्रीका में 17 प्रतिशत बाल विवाह हुए. रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में लगभग 12 प्रतिशत बाल विवाह हुए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से स्कूलें बंद हैं, आर्थिक तनाव, माता-पिता की मृत्यु और गर्भधारण के कारण बाल विवाह का खतरा बढ़ सकता है.

यूनिसेफ कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोर ने कहा, ‘कोविड -19 ने लाखों लड़कियों के लिए पहले से ही स्थिति और कठिन बना दिया है. बंद किए गए स्कूल, दोस्तोंऔर सहायता नेटवर्क से अलगाव और बढ़ती गरीबी ने घी डालने का काम किया है.’

हेनरीटा ने कहा, ‘इस महामारी को एक वर्ष हो गया है, लड़कियों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है. स्कूलों को फिर से खोलकर, प्रभावी कानून और नीतियां लागू करके, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवाओं तक पहुंच तथा परिवारों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा उपाय प्रदान करके हम बाल विवाह के जरिये एक लड़की से उसका बचपन छीने जाने के जोखिम को काफी कम कर सकते हैं.’

पिछले दशक में औसतन 2.5 करोड़ बाल विवाह होने से रोके गए और यूनिसेफ ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर चेतावनी दी कि ये लाभ अब गंभीर खतरे में हैं.

यूनिसेफ ने अपनी पिछली रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की तीन में से एक बाल वधु भारत में रहती है.

संयुक्त राष्ट्र के निकाय ने कहा कि बाल विवाह का जारी रहना भारत के लिए 2030 तक सतत विकास लक्ष्य प्राप्त करने में एक संभावित चुनौती है, क्योंकि पिछले एक दशक के दौरान इसकी प्रगति दक्षिण एशिया के देशों में सबसे मजबूत रही है.

यूनिसेफ इंडिया प्रतिनिधि यास्मीन अली हक ने कहा, ‘भारत में बाल विवाह को समाप्त करने के लिए हमें सबसे गरीब और इस लिहाज से सबसे अधिक जोखिम में रहने वाली लड़कियों और उनके परिवारों पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखना चाहिए. बाल विवाह उन्मूलन प्रयासों को कोविड-19 प्रतिक्रिया और बहाली योजनाओं में एकीकृत किया जाना चाहिए.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)