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यूपी: 10 लोगों को फ़र्ज़ी केस में फंसाने के आरोप में एसएचओ सहित तीन पुलिसकर्मियों पर एफ़आईआर

बीते चार फरवरी को दो पुलिसवाले एटा ज़िले में आगरा रोड पर स्थित ढाबे पर खाना खाने गए थे, लेकिन उन्होंने उसका भुगतान करने से इनकार कर दिया था. जब ढाबा मालिक ने उनसे पैसे मांगे तब उन्होंने उनकी पिटाई कर दी और लूट के आरोप में ढाबे पर मौजूद ग्राहकों सहित 10 लोगों को फंसा दिया था.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के एटा में एक ढाबा मालिक सहित कर्मचारियों को झूठे केस में फंसाने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक उच्चस्तरीय जांच के बाद तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार ने जब अपनी जांच में पाया कि पिछले महीने एक ढाबे के कई ग्राहकों सहित 10 लोगों को झूठे मामलों में फंसाया गया तब मंगलवार को एक इंस्पेक्टर और दो हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई.

पुलिसवालों पर आईपीसी की धारा 384 (उगाही), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 336 (जीवन या सुरक्षा को खतरा पैदा करना और 211 (अपराध का झूठा आरोप) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चार फरवरी को दो पुलिसवाले ढाबे पर खाना खाने गए थे, लेकिन उन्होंने उसका भुगतान करने से इनकार कर दिया था और जब ढाबा मालिक ने उनसे पैसे मांगे तब उन्होंने उनकी पिटाई कर दी और एटा जिले में लूट के आरोप में ढाबे पर मौजूद ग्राहकों सहित 10 लोगों को फंसा दिया था.

रिपोर्ट के अनुसार, एटा जिले में आगरा रोड पर स्थित एक ढाबे पर पुलिस कॉन्स्टेबल संतोष कुमार और शैलेंद्र कुमार ने खाना खाया. उसका बिल 400 रुपये हुआ था. पुलिसवालों ने पूरा बिल चुकाने के बजाय 80 रुपये देने की बात की. हालांकि, शारीरिक रूप से अक्षम ढाबा मालिक प्रवीण यादव, उनके बड़े भाई पुष्पेंद्र और कुछ अन्य स्थानीय लोगों ने पुलिसवालों से कम से कम 200 रुपये चुकाने के लिए कहा.

इसके बजाय कथित तौर पर शराब के नशे में चूर दोनों पुलिसवालों ने पुष्पेंद्र और उनके चचेरे भाई की पिटाई कर दी. ढाबे से जाने के बाद वे दोबारा तीन गाड़ियों में करीब 15 अन्य पुलिसवालों के साथ आए. पुलिसवाले पुष्पेंद्र, उनके चचेरे भाई और आठ ग्राहकों को कोतवाली देहात पुलिस स्टेशन लेकर गए, जहां उनके खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई.

रिपोर्ट के अनुसार, इंस्पेक्टर इंद्रेश पाल सिंह और दो हेड कॉन्स्टेबलों शैलेंद्र और संतोष कुमार ने सभी 30 साल से कम उम्र के युवाओं पर 12 मामले दर्ज किए हैं, जिसमें हत्या का प्रयास भी शामिल है. इसके अलावा आबकारी अधिनियम, हथियार एक्ट और नारकोटिक ड्रग्स एवं साइकोट्रोपिक पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, एफआईआर में पुलिसवालों ने उल्लेख किया कि उन्होंने एक मुठभेड़ के दौरान 10 सदस्यों को पकड़ा.

ढाबा मालिक प्रवीण यादव ने कहा कि उन्हें इसलिए छोड़ दिया गया, क्योंकि वह शारीरिक रूप से अक्षम हैं और इससे अदालत पुलिस की मुठभेड़ की कहानी पर सवाल उठा सकती थी. यादव के अनुसार, पुलिसवालों ने कहा कि इस लंगड़े के चक्कर में एनकाउंटर फर्जी लगेगा.

प्रवीण यादव ने तीन साल पहले अपना एक पैर गंवा दिया था. उन्होंने बीटेक किया है और नौकरी जाने के बाद उन्होंने बड़े भाई के साथ मिलकर ढाबा खोला था.

एफआईआर में आगे कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए 10 सदस्य एक गैंग के सदस्य थे और लूट की योजना तैयार कर रहे थे.

एफआईआर में पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने छह अवैध हथियार, 80 लीटर अवैध शराब और दो किलो प्रतिबंधित सामग्री बरामद की.

उत्तर प्रदेश पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) राजीव कृष्णा ने कहा कि उन्होंने घटना का संज्ञान लिया और एटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मामले को आगे बढ़ाने के लिए कहा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘समयबद्ध तरीके से जांच सुनिश्चित की जाएगी. दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.’

पुलिस महानिरीक्षक (अलीगढ़ रेंज) पीयूष मोदिया ने कहा, ‘मैंने युवकों के खिलाफ मामलों की जांच अलीगढ़ स्थानांतरित कर दी है और शैलेंद्र और संतोष कुमार को निलंबित करने का आदेश दिया है.’

इस बीच, कोतवाली देहात पुलिस स्टेशन के एसएचओ इंद्रेशपाल सिंह को 11 मार्च को तब निलंबित कर दिया गया जब पुलिस स्टेशन से तस्करी के दौरान बरामद करीब 30 लाख रुपये का 1400 कार्टन शराब गायब हो गया. उनके खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई है.