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मुंबई: वझे ने देखमुख पर फिर लगाए आरोप, एनआईए ने मनसुख हिरेन को सह-साज़िशकर्ता बताया

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास वाहन मिलने व व्यवसायी मनसुख हिरेन की मौत मामलों में गिरफ़्तार निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वझे ने दावा किया कि अनिल देशमुख ने मुंबई पुलिस में उनकी सेवाएं जारी रखने के लिए उनसे दो करोड़ रुपये मांगे थे. वझे ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य मंत्री अनिल परब ने उनसे मुंबई के कुछ ठेकेदारों से पैसे एकत्र करने को कहा था.

मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाजे पुलिस आयुक्त से मुलाकात की. (फोटो: पीटीआई)

मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाजे पुलिस आयुक्त से मुलाकात की. (फोटो: पीटीआई)

मुंबई/नई दिल्ली: विशेष एनआईए अदालत ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की प्रारंभिक जांच के सिलसिले में निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वझे से पूछताछ के लिए बुधवार को सीबीआई को मंजूरी प्रदान कर दी.

वहीं वझे ने देशमुख और शिवसेना के मंत्री अनिल परब के खिलाफ नए आरोप लगाकर सनसनी फैला दी.

इस बीच एक संबंधित घटनाक्रम में, मुंबई पुलिस ने राज्य पुलिस विभाग को सौंपी गयी एक रिपोर्ट में कहा कि सचिन वझे को पिछले साल जून में तत्कालीन मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के जोर देने पर अपराध खुफिया इकाई (सीआईयू) में तैनात किया गया था. हालांकि तत्कालीन संयुक्त सीपी (अपराध) ने इस पर आपत्ति जतायी थी.

वझे को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास एक वाहन मिलने तथा व्यवसायी मनसुख हिरेन की मौत मामलों में गिरफ्तार किया गया था. वाहन में जिलेटिन की छड़ें रखी थीं.

उस समय से ही सुर्खियों में रहे वझे ने बुधवार को दावा किया कि देशमुख ने मुंबई पुलिस में उनकी सेवाएं जारी रखने के लिए उनसे दो करोड़ रुपये की मांग की थी.

वझे ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य मंत्री परब ने उससे मुंबई के कुछ ठेकेदारों से पैसे एकत्र करने को कहा था. परब ने वझे के दावे को खारिज कर दिया.

पिछले साल पुलिस सेवा में बहाल किए गए वझे ने एक पत्र में सनसनीखेज दावा किया. वझे ने वह पत्र विशेष एनआईए अदालत के समक्ष पेश करने का प्रयास किया. लेकन विशेष न्यायाधीश पीआर सित्रे ने उनके पत्र को रिकॉर्ड पर लेने से इनकार कर दिया और उन्हें आवश्यक प्रक्रिया का पालन करने को कहा.

वझे ने चार पृष्ठों के अपने हस्तलिखित पत्र में दावा किया कि उन्हें छह जून 2020 को सेवा में विधिवत बहाल कर दिया गया. लेकिन कुछ लोग चाहते थे कि उस फैसले को पलट दिया जाए.

वझे ने कहा, ‘जाहिरा तौर पर तब (एनसीपी अध्यक्ष) शरद पवार ने मुझे फिर से निलंबन के तहत रखने का आदेश दिया था. उस समय तत्कालीन गृह मंत्री सर (देशमुख) ने भी मुझसे कहा था कि वह पवार साहब को मना लेंगे और इस उद्देश्य के लिए उन्होंने मुझसे दो करोड़ रुपये देने को कहा.’

वझे (49) ने कहा, ‘मैंने इतनी बड़ी राशि का भुगतान करने में असमर्थता जताई थी. इस पर, गृह मंत्री सर ने मुझे बाद में भुगतान करने को कहा.’

इससे पहले परमबीर सिंह ने पुलिस आयुक्त पद से 17 मार्च को अपने तबादले के तीन दिन बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था और आरोप लगाया था कि देशमुख ने पुलिस अधिकारी सचिन वझे को बार और रेस्तराओं से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करने को कहा था.

वझे ने अपने पत्र में दावा किया कि जनवरी 2021 में, मंत्री परब ने उन्हें बीएमसी में सूचीबद्ध फर्जी ठेकेदारों के खिलाफ जांच करने और लगभग 50 ऐसे ठेकेदारों से कम से कम दो करोड़ रुपये वसूल करने को कहा.

शिवसेना नेता परब ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि वह किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं.

परब ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘मैं शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे और मेरी दो बेटियों के नाम पर कसम खाता हूं कि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है.’

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और गठबंधन सरकार की छवि खराब करने के लिए भाजपा की यह रणनीति थी.

इस बीच मुंबई की एक अदालत ने बुधवार को सचिन वझे की एनआईए हिरासत नौ अप्रैल तक बढ़ा दी. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने वझे को 13 मार्च को गिरफ्तार किया था.

वझे को बुधवार को विशेष एनआईए न्यायाधीश पीआर सित्रे के सामने पेश किया गया, जिन्होंने वझे की हिरासत नौ अप्रैल तक बढ़ा दी.

परमबीर सिंह का पत्र: मुंबई के दो पुलिस अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार और कदाचार के मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख के आरोपों के संबंध में महानगर पुलिस के दो अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए हैं.

इस संबंध में एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि पुलिस उपायुक्त (प्रवर्तन) राजू भुजबल और सहायक पुलिस आयुक्त संजय पाटिल ने संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) के समक्ष हाल में अपने बयान दर्ज कराए.

मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक सामग्री वाली एक एसयूवी मिलने के मामले से निपटने को लेकर आलोचना का सामना कर रहे सिंह ने पुलिस आयुक्त पद से 17 मार्च को अपने तबादले के तीन दिन बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था और आरोप लगाया था कि देशमुख ने पुलिस अधिकारी सचिन वझे को बार और रेस्तराओं से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करने को कहा था.

बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने के तत्काल बाद देशमुख ने राज्य के गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.

सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा था कि उन्हें वसूली की गृह मंत्री की मांग के बारे में सहायक पुलिस आयुक्त संजय पाटिल ने सूचना दी थी. उन्होंने पाटिल से हुई अपनी ‘चैट’ का भी उल्लेख किया था.

अधिकारी ने जानकारी दी, ‘पाटिल ने अपने बयान में कहा कि वह ठाणे में एक हुक्का पार्लर में छापे के बारे में जानकारी देने के लिए अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ देशमुख से मिले थे. लेकिन इस मुलाकात से पहले या बाद में वह तत्कालीन गृह मंत्री से कभी नहीं मिले.’

उन्होंने बताया कि पुलिस उपायुक्त भुजबल ने अपने बयान में कहा कि वह अपराधों और अन्य मुद्दों पर वरिष्ठों को जानकारी देने के लिए चार मार्च को देशमुख के आधिकारिक आवास पर एक नोडल अधिकारी के रूप में एक बैठक में शामिल हुए थे.

अंबानी के घर के बाहर कार खड़ी करने के मामले में सह-साजिशकर्ता थे मनसुख हिरेन: एनआईए

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को दावा किया कि ठाणे निवासी मनसुख हिरेन 25 फरवरी को मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास कार को खड़ी करने में निलंबित सहायक निरीक्षक सचिन वझे सह-साजिशकर्ता थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने यह भी दावा किया कि अंबानी आतंकी धमकी मामले में अन्य आरोपियों ने 2 से 3 मार्च के बीच उन्हें खत्म करने की साजिश रची.

बता दें कि 20 जिलेटिन की छड़ें के साथ मिली स्कॉर्पियो कार और एक धमकी भरा पत्र, ठाणे में एक ऑटो पार्ट्स की दुकान के मालिक हिरेन से जुड़ा था. 4 मार्च को उनके लापता होने की सूचना मिली और अगले दिन उनका शव कालवा में एक नाले में मिला.

अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल सिंह ने बुधवार को विशेष अदालत के समक्ष वझे की हिरासत की मांग करते हुए कहा, मनसुख हिरेन एक साजिशकर्ता था जो सार्वजनिक सड़क पर जिलेटिन की छड़ें के साथ एसयूवी को लगाने में शामिल था. उसे खत्म कर दिया गया है.

आखिरी सुनवाई के दौरान एनआईए ने दावा किया था कि वह हिरेन की हत्या के पीछे के मकसद का पता लगाने के करीब था.

हालांकि एजेंसी ने बुधवार को मकसद का उल्लेख नहीं किया, और यह दावा किया कि यह संदेह है कि वझे ने हिरेन को मारने की योजना के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की. वझे के अलावा एनआईए ने निलंबित पुलिसकर्मी विनायक शिंदे और कथित सट्टेबाज नरेश गौड़ को आरोपी बनाते हुए दावा किया कि उन्होंने वझे को सिम कार्ड प्रदान किए और दिए.

शिंदे और वझे पर यह भी आरोप है कि एक बैठक में हिरेन की हत्या की योजना बनाई गई थी. एनआईए ने 17 फरवरी को हीरेन और वझे के बीच हुई बैठक का सीसीटीवी फुटेज भी पाया है, जिस दिन उसने दावा किया था कि उसका वाहन चोरी हो गई थी और बाद में जिलेटिन की छड़ें लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया था.

एनआईए का यह भी दावा है कि गवाहों ने कहा है कि वझे हिरेन को बम विस्फोट की घटना में दोषी ठहराने की कोशिश कर रहा था, जिससे उसने मना कर दिया.

इसके अलावा, एनआईए ने दावा किया कि वझे की एक कंपनी से जुड़े एक निजी बैंक में 1.51 करोड़ रुपये मिले और उसने अपने एक साथी को 76 लाख रुपये दिए.

एजेंसी ने कहा कि वह जांच कर रही है कि क्या यह पैसा बम से डराने की साजिश से भी जुड़ा हुआ है और क्या इसका इस्तेमाल जिलेटिन की छड़ें बनाने के लिए किसी भी तरीके से किया गया.

शीर्ष न्यायालय बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार, अनिल देशमुख की याचिकाओं की सुनवाई करेगा

सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र सरकार और इसके पूर्व मंत्री अनिल देशमुख की याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा.

इन याचिकाओं के जरिए बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोपों की सीबीआई जांच का निर्देश दिया गया था. ये आरोप मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने लगाये थे.

शीर्ष न्यायालय की वेबसाइट पर डाली गई मुकदमा/मामला सूची के मुताबिक दोनों याचिकाएं बृहस्पतिवार को सुनवाई के लिए जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ के समक्ष आएगी.

हाईकोर्ट ने पांच अप्रैल को आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया था, जिसके बाद देशमुख ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.

राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है: शिवसेना

शिवसेना ने बुधवार को दावा किया कि देश में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है.

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में लिखा गया है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगाए गए आरोपों के मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी परमबीर सिंह की खिंचाई की थी, लेकिन इन्हीं आरोपों को लेकर जयश्री पाटिल द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान भी लिया.

पार्टी ने ‘सामना’ में कहा, ‘कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है. लेकिन अब यह स्पष्ट है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियो पर निशाना साधने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है.’

शिवसेना ने कहा, ‘महाराष्ट्र सरकार को इस तरह कमजोर करने में संवैधानिक प्राधिकारियों को शामिल किया जाना चिंता की बात है.’

राज्य में शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस पार्टी की गठबंधन सरकार है.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को परमबीर सिंह द्वारा महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की 15 दिन के भीतर प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया था. इसके बाद सिंह ने राज्य के गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था.

अदालत खुद सिंह द्वारा और वकील घनश्याम उपाध्याय तथा स्थानीय शिक्षक मोहन भिडे एवं शहर की वकील जयश्री पाटिल द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी. अदालत ने पाटिल की याचिका पर सीबीआई जांच का निर्देश दिया था.

संपादकीय में कहा गया कि महाराष्ट्र में विपक्षी पार्टी भाजपा इस तरह के बयान दे रही है कि ‘राज्य में इस्तीफा देने वाला अगला मंत्री कौन होगा?’

शिवसेना ने आरोप लगाया, ‘अगर उन्हें इसका भरोसा नहीं होता कि केंद्रीय एजेंसियां उनके लिए काम कर रही हैं तो वे ऐसा बयान नहीं देते. यह राज्य को बदनाम करने का षड्यंत्र है.’

शिवसेना ने कहा कि इससे पहले भी विपक्षी पार्टियों ने सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों के खिलाफ आरोप लगाए हैं और कई मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को इस्तीफा भी देना पड़ा, लेकिन ऐसा घृणास्पद माहौल कभी नहीं था.

‘सामना’ में कहा गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख पर लगे आरोपों की जांच का आदेश दिया जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर 10 साल पुराने भ्रष्टाचार के एक मामले में आपराधिक मुकदमा चलाने पर हाल ही में रोक लगा दी.

शिवसेना के मुखपत्र में सवाल किया गया, ‘ अनिल देशमुख और कर्नाटक के मुख्यमंत्री के लिए अलग-अलग पैमाना क्यों?’

फ्रांस के मीडिया में रफ़ाल युद्धक विमान को लेकर प्रकाशित एक खबर का हवाला देते हुए पार्टी ने पूछा कि अब किसे नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि फ्रांसीसी समाचार पोर्टल ‘मीडिया पार्ट’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि रफ़ाल की निर्माता कंपनी दासो ने एक बिचौलिये को कथित तौर पर 11 लाख यूरो का भुगतान किया था.

शिवसेना ने पूछा, ‘क्या नैतिकता सिर्फ शिवसेना और राकांपा के लिए है?’ भाजपा ने फ्रांस के मीडिया में प्रकाशित खबर को निराधार करार दिया है.

‘सामना’ में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि रफ़ाल मामले में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ और इसे लेकर भाजपा ने राहुल गांधी पर निशाना साधा था क्योंकि वह इस सौदे में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहे थे.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस सौदे की जांच कराने संबंधी मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)